कानपुर किडनी कांड: सरगना समेत तीन आरोपियों पर 25-25 हजार का इनाम घोषित, दिल्ली-उत्तराखंड में तलाश रही पुलिस की 3 टीमें

Kanpur Kidney Scam: कानपुर में किडनी ट्रांसप्लांट के लिए डोनर से 10 लाख रुपये में किडनी खरीदकर मरीज से 60 लाख वसूले गए. वहीं इस रैकेट का भंडाफोड़ होने के बाद स्वास्थ्य व पुलिस विभाग में हड़कंप मच गया. पुलिस के अनुसार, इस गिरोह ने विदेशी नागरिकों समेत 40‑50 अवैध ट्रांसप्लांट किए.

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Kanpur Kidney Scandal: कानपुर किडनी कांड मामले में फरार चल रहे दो डॉक्टरों और एक ओटी मैनेजर पर पुलिस ने शिकंजा कस दिया है. पुलिस कमिश्नर के आदेश पर तीनों आरोपियों पर 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित किया गया है. पुलिस इस प्रकरण में अब तक डॉक्टर दंपती समेत नौ लोगों को जेल भेज चुकी है, जबकि 12 आरोपियों की तलाश जारी है.

आरोपियों के खिलाफ होगी कुर्की की कार्रवाई

पुलिस के मुताबिक, किडनी ट्रांसप्लांट रैकेट के सरगना  डॉ. रोहित, डॉ. अफजल अहमद और ओटी मैनेजर अली काफी समय से फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं. पुलिस कमिश्नर ने बताया कि जल्द ही आरोपियों के खिलाफ कुर्की की कार्रवाई भी की जाएगी.

पुलिस कमिश्नर रघुबीर लाल ने बताया कि बाकी आरोपियों के खिलाफ भी इनाम घोषित करने की प्रक्रिया शुरू की गई है. डॉ. रोहित दिल्ली-एनसीआर का रहने वाला रहा है, जो आॉपरेशन से पहले एनेस्थीसिया देने का काम करता था. पूरा गिरोह यही संचालित करता है. अफजाल मेरठ के अल्फा अस्पताल में काम करता था. किडनी के मरीज व बेचने वालों की तलाश की जिम्मेदारी इसी पर थी. वहीं अली ओटी टेक्नीशियन है. जान‌कारी मिली है कि उसने ही पास्ल का ऑपरेशन किया था. इनकी तलाश में तीन पुलिस टीमें दिल्ली-एनसीआर व उत्तराखंड भेजी गई हैं.

विदेशों तक फैला नेटवर्क

पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल के मुताबिक, इस रैकेट के तार सिर्फ कानपुर तक सीमित नहीं हैं. शुरुआती जांच में दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और नेपाल तक कनेक्शन मिले हैं. पुलिस का अंदाजा है कि गिरोह अब तक 40‑50 अवैध ट्रांसप्लांट कर चुका है, जिनमें विदेशी नागरिक भी शामिल हैं.

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50000 रुपये के झगड़े से खुला करोड़ों का खेल

अवैध किडनी ट्रांसप्लांट मामले का खुलासा तब हुआ, जब मेरठ में MBA की पढ़ाई कर रहे छात्र आयुष ने पुलिस से शिकायत की. आयुष बिहार के समस्तीपुर के रहने वाले हैं. दरअसल, आर्थिक तंगी से जूझ रहे आयुष ने 10 लाख रुपये में अपनी किडनी बेचने का सौदा किया था, लेकिन ऑपरेशन के बाद दलालों ने उन्हें सिर्फ साढ़े नौ लाख रुपये थमा दिया, जिससे नाराज आयुष ने पुलिस को शिकायत कर दी. 

10 लाख में किडनी खरीदी, 60 लाख में बेची

पुलिस जांच में पता चला कि मुजफ्फरनगर की मरीज पारुल तोमर को किडनी की जरूरत थी. दलालों और डॉक्टरों ने उसके परिजनों से किडनी के बदले 60 लाख रुपये वसूले. वहीं किडनी देने वाले आयुष को सिर्फ साढ़े नौ लाख रुपये मिले. यानी एक ऑपरेशन में इन सरगना को 50 लाख रुपये का मुनाफा हुआ.

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