kanpur Illigal kidney Racket News: कानपुर में अवैध किडनी ट्रांसप्लांट (kidney Transplant) से जुड़ा एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने स्वास्थ्य व्यवस्था और निजी अस्पतालों की कार्यप्रणाली कटघरे में खड़ा कर दिया है. पारुल तोमर नाम की महिला के इलाज पर परिजनों ने करीब 80 लाख रुपये खर्च किए, इसके बावजूद आज भी वह जीवन और मौत के बीच संघर्ष कर रही हैं.
पारुल फिलहाल हैलट अस्पताल (GSVM मेडिकल कॉलेज) के आईसीयू में भर्ती हैं, जहां उनकी हालत बेहद नाजुक बनी हुई है. डॉक्टरों के मुताबिक ट्रांसप्लांट के बाद उचित देखभाल और मेडिकल प्रोटोकॉल का पालन न होने की वजह से उनके शरीर में गंभीर संक्रमण फैल गया है. इसके चलते उनकी स्थिति लगातार बिगड़ती जा रही है.
मानकों की अनदेखी ने बढ़ाई मुश्किल
मेडिसिन विभाग के प्रोफेसर डॉ. सौरभ अग्रवाल ने बताया कि किडनी ट्रांसप्लांट के बाद मरीज को सख्त आइसोलेशन और संक्रमण मुक्त वातावरण में रखना बेहद जरूरी होता है. लेकिन इस मामले में इन आवश्यक नियमों की अनदेखी की गई, जिसके कारण संक्रमण तेजी से फैल गया. वर्तमान में पारुल का हीमोग्लोबिन गिरकर 6.3 तक पहुंच गया है, जो बेहद चिंताजनक स्थिति है.
GSVM मेडिकल कॉलेज का बड़ा खुलासा
GSVM मेडिकल कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि उनके संस्थान में किडनी ट्रांसप्लांट की कोई सुविधा या अनुमति नहीं है. इससे साफ हो गया है कि यह पूरी सर्जरी अवैध तरीके से की गई थी, जिसने एक महिला की जान को गंभीर खतरे में डाल दिया.
SGPGI लखनऊ रेफर करने की तैयारी
पारुल की बिगड़ती हालत को देखते हुए उन्हें लखनऊ के संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (SGPGI) रेफर करने की तैयारी की जा रही है. इसके लिए मुख्य चिकित्सा अधिकारी को पत्र भेजकर एम्बुलेंस और अन्य जरूरी व्यवस्था सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं.
पुलिस जांच में कई नाम सामने
इस पूरे मामले में पुलिस जांच भी तेज हो गई है. डीसीपी कासिम आबिदी के अनुसार, रावतपुर थाना क्षेत्र के एक निजी अस्पताल में अवैध किडनी खरीद-फरोख्त का मामला सामने आया है. जांच में छह लोगों समेत कई डॉक्टरों के नाम सामने आए हैं, जिनमें से कुछ आरोपी फरार हैं. उनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार दबिश दी जा रही है.
आर्थिक तंगी में बेची गई किडनी
जांच के दौरान यह भी सामने आया कि किडनी बेचने वाले दो व्यक्तियों से पूछताछ की गई. इनमें से एक व्यक्ति देहरादून का एमबीए छात्र बताया जा रहा है, जिसने आर्थिक तंगी और फीस के दबाव में यह कदम उठाया. दोनों व्यक्तियों का इलाज जारी है और उनकी स्थिति फिलहाल स्थिर बताई जा रही है.
इस पूरे मामले ने अवैध अंग प्रत्यारोपण के नेटवर्क और स्वास्थ्य व्यवस्था में निगरानी की कमी को उजागर कर दिया है. इतनी बड़ी रकम लेने के बावजूद मरीज की सुरक्षा और मानकों की अनदेखी करना एक गंभीर लापरवाही है, जिसने एक महिला को मौत के मुहाने पर पहुंचा दिया.













