Degree Mafia: कानपुर में 12वीं पास चला रहा था फर्जी 'डिग्री फैक्ट्री', बिना परीक्षा दिए बना रहे थे डॉक्टर, वकील और ग्रेजुएट्स

Kanpur Fake Degree Racket: इस पूरे काले साम्राज्य को चलाने वाला मुख्य सरगना मनीष कुमार खुद महज 12वीं पास है. हैरान करने वाली बात यह है कि शिक्षा के नाम पर दूसरों को ठगने वाला मनीष दुनिया की नजरों में खुद को 'डॉक्टरेट' की मानद उपाधि से नवाजा गया बड़ा एक्सपर्ट बताता था. वह अपनी इस फर्जी साख का इस्तेमाल भोले भाले लोगों को जाल में फंसाने और अपना धंधा चमकाने के लिए करता था.

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कानपुर में 12वीं पास चला रहा था फर्जी 'डिग्री फैक्ट्री', बिना परीक्षा दिए बना रहे थे डॉक्टर, वकील और ग्रेजुएट्स
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Kanpur Fake Degree Racket Busted: उत्तर प्रदेश के कानपुर में जालसाजी और फर्जीवाड़े का एक ऐसा सनसनीखेज मामला सामने आया है, जिसने पूरे शिक्षा जगत और प्रशासनिक व्यवस्था को हिलाकर रख दिया है. दरअसल, किदवई नगर थाना पुलिस और विशेष जांच दल (SIT) ने एक संयुक्त कार्रवाई करते हुए देशव्यापी फर्जी डिग्री गिरोह का भंडाफोड़ किया है. यह गिरोह पैसों के दम पर बिना किसी परीक्षा के घर बैठे लोगों को 'डॉक्टर', 'वकील' और 'ग्रेजुएट' बना रहा था.

इस पूरे काले साम्राज्य को चलाने वाला मुख्य सरगना मनीष कुमार खुद महज 12वीं पास है. हैरान करने वाली बात यह है कि शिक्षा के नाम पर दूसरों को ठगने वाला मनीष दुनिया की नजरों में खुद को 'डॉक्टरेट' की मानद उपाधि से नवाजा गया बड़ा एक्सपर्ट बताता था. वह अपनी इस फर्जी साख का इस्तेमाल भोले भाले लोगों को जाल में फंसाने और अपना धंधा चमकाने के लिए करता था. वीआईपी और बड़े सेलिब्रिटीज के साथ उसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर मौजूद हैं, जिनका इस्तेमाल वह खुद को रसूखदार दिखाने के लिए करता था.

कानपुर में 12वीं पास चला रहा था फर्जी 'डिग्री फैक्ट्री', बिना परीक्षा दिए बना रहे थे डॉक्टर, वकील और ग्रेजुएट्स
Photo Credit: Arun kumar

पुलिस कमिश्नर ने बताई ये कहानी

मामले पर पुलिस कमिश्नर रघुवीर लाल का कहना है कि इस गिरोह के काम करने का तरीका बेहद प्रोफेशनल और संगठित था. ये लोग सिर्फ एक ऑर्डर पर बिना किसी परीक्षा या कॉलेज जाए 10वीं, 12वीं से लेकर ग्रेजुएशन, पोस्ट ग्रेजुएशन (PG) और लॉ (Law) जैसी बड़ी डिग्रियां मिनटों में तैयार कर देते थे. यह सीधे तौर पर देश के सिस्टम और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ है.

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ऑर्डर' पर तैयार होती थीं डिग्रियां

गिरफ्तार किए गए अभियुक्त अर्जुन और मनीष के पास से पुलिस ने जो सबूत इकट्ठा किए हैं, वह बहुत ही चौंकाने वाले हैं. छापेमारी के दौरान पुलिस को मौके से देश के करीब एक दर्जन नामी विश्वविद्यालयों की फर्जी मोहरें, जाली दस्तावेज और छत्रपति शाहू जी महाराज विश्वविद्यालय (CSJMU) की नकली माइग्रेशन बुकलेट्स मिली हैं. इसके अलावा फर्जीवाड़े में इस्तेमाल होने वाले लैपटॉप, प्रिंटर और मोबाइल भी जब्त किए गए हैं, जिनसे इस रैकेट का पूरा डाटा खंगाला जा रहा है.

बैंक खातों से सामने आया करोड़ों का खेल

शुरुआती जांच में इस सिंडिकेट के वित्तीय लेन-देन को देखकर पुलिस के भी होश उड़ गए. अब तक की पड़ताल में करीब ₹36 लाख से ज्यादा के संदिग्ध बैंक ट्रांजेक्शन का खुलासा हुआ है.  मुख्य आरोपी मनीष कुमार के निजी खाते में ₹16.44 लाख के लेन-देन का पता चला है. वहीं, सहआरोपी अर्जुन यादव के माध्यम से लगभग ₹20 लाख के अवैध वित्तीय ट्रांजेक्शन के पुख्ता सबूत मिले हैं.

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पुलिस और SIT अब इस बात की गहराई से तफ्तीश कर रही है कि इस सिंडिकेट के जरिए अब तक कितने लोगों ने फर्जी डिग्रियां खरीदी हैं. सबसे बड़ा डर यह है कि इस गैंग से फर्जी डिग्री लेकर न जाने कितने लोग अस्पतालों में मरीजों की जान से खेल रहे होंगे या अदालतों में फर्जी वकील बनकर पैरवी कर रहे होंगे. पुलिस इस नेटवर्क के पीछे छिपे कुछ और सफेदपोशों और बड़े नामों की तलाश में जुटी है, जिन्हें जल्द ही बेनकाब किया जाएगा.

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