कहते हैं बच्चे मन के सच्चे होते हैं और खेल-खेल में की गई उनकी गलतियों को प्यार से सुधारा जा सकता है. लेकिन कानपुर के गोविंद नगर थाना क्षेत्र से एक ऐसी हृदयविदारक घटना सामने आई है, जिसने समाज की असंवेदनशीलता पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. महज 'चोर-चोर' कहे जाने के ताने से आहत होकर एक 12 साल की मासूम बच्ची ने मौत को गले लगा लिया.
किरायेदार के घर से ज्वेलरी और मेकअप बॉक्स उठा लाई
मूल रूप से सेन पश्चिम पारा के कठोंगर गांव के रहने वाले किसान संदीप मिश्रा की 12 वर्षीय बेटी दिव्यांशी अपनी मां माधुरी के साथ गुजैनी इलाके में रह रही थी. खेल-खेल में दिव्यांशी अपने ही मकान में रहने वाले एक किरायेदार के घर से ज्वेलरी और मेकअप बॉक्स उठा लाई थी. जब किरायेदार ने इसकी शिकायत की, तो मां माधुरी ने बेटी को डांटा. मासूम दिव्यांशी ने अपनी गलती मानते हुए बताया कि वह इसे सिर्फ खेलने के लिए लाई थी, जिसके बाद सामान वापस कर दिया गया.
परिजनों का दिल नहीं पसीजा
मां माधुरी का आरोप है कि सामान वापस मिल जाने के बाद भी किरायेदार और उसके परिजनों का दिल नहीं पसीजा. वे लगातार दिव्यांशी को "चोर-चोर" कहकर चिढ़ाने और प्रताड़ित करने लगे. लोक-लाज और इस अपमान से मासूम का बाल-मन बुरी तरह टूट गया और वह गुमसुम रहने लगी.
शनिवार दोपहर को मां माधुरी अपनी बेटी को समझा-बुझाकर अपनी ड्यूटी पर चली गई थीं. लेकिन ममता का दिल बार-बार घबरा रहा था. जब वह दोपहर करीब 4 बजे घर लौटीं, तो दरवाजा खुला हुआ था. कमरे के अंदर का मंजर देखकर मां के पैरों तले जमीन खिसक गई. सामने पंखे से साड़ी के फंदे के सहारे उनकी लाडली दिव्यांशी का शव लटक रहा था.
दोषियों के खिलाफ होगी कार्रवाई
घटना की सूचना मिलते ही इलाके में हड़कंप मच गया. मौके पर पहुंची गोविंद नगर पुलिस और फॉरेंसिक टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाए हैं. गोविंद नगर इंस्पेक्टर अशोक कुमार दुबे ने बताया कि शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है. मामले की गहराई से जांच की जा रही है. परिजनों से मिलने वाली तहरीर और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.