अवध को अहमियत, पश्चिम को भी पावर… चुनाव से पहले कैबिनेट विस्तार से योगी का यूपी में शक्ति-संतुलन!

यूपी में कैबिनेट विस्तार के जरिए जातीय के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन साधने की भी कोशिश की गई है. कैबिनेट विस्तार में अवध और पश्चिम को ज्यादा अहमियत दी गई है.

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  • उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव से पहले योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार हुआ है
  • नए कैबिनेट में जातीय संतुलन बनाए रखते हुए एक ब्राह्मण और बाकी सभी सदस्य एससी या ओबीसी समाज से हैं
  • कैबिनेट विस्तार में पूर्वांचल, पश्चिमांचल और अवध के प्रतिनिधित्व को संतुलित किया गया है
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लखनऊ:

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ सरकार का कैबिनेट विस्तार हो गया है. इसे आखिरी कैबिनेट विस्तार माना जा रहा है, क्योंकि अगले साल फरवरी-मार्च में विधानसभा चुनाव भी होने हैं. विधानसभा चुनाव से पहले यूपी में कैबिनेट विस्तार हुआ, जिसमें 6 नए चेहरों को शामिल किया गया है. इनमें सिर्फ एक ब्राह्मण है और बाकी सभी एससी या ओबीसी समाज से आते हैं. 

कैबिनेट विस्तार कर बीजेपी ने जातीय संतुलन को तो साध लिया है. लेकिन साथ ही साथ क्षेत्रीय संतुलन भी साधा है. राजनीति में जाति के साथ-साथ क्षेत्रीय संतुलन भी बनाए रखना बहुत जरूरी है. जब बात उत्तर प्रदेश की हो, तो यह और भी जरूरी हो जाता है.

उत्तर प्रदेश की सियासत में प्रदेश को चार हिस्सों- पूर्वांचल, पश्चिमांचल, अवध और बुंदेलखंड आते हैं. इनमें अभी पूर्वांचल का दबदबा सबसे ज्यादा है.

पूर्वांचल का कितना दबदबा?

पूर्वांचल का दबदबा इसलिए ज्यादा है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जिस वाराणसी सीट से सांसद हैं, वह इसी इलाके में आती है. 

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मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ गोरखपुर से आते हैं. बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष पंकज चौधरी भी गोरखपुर के रहने वाले हैं और बगल की ही महाराजगंज सीट से सांसद हैं. इनके अलावा एनडीए के सहयोगी दलों में ओम प्रकाश राजभर, डॉ. संजय निषाद, अनुप्रिया पटेल जैसे नेता भी पूर्वांचल से हैं. 

मंत्रियों में सूर्य प्रताप शाही, एके शर्मा, दया शंकर सिंह, दारा सिंह चौहान, रवीन्द्र जयसवाल, अनिल राजभर, दयाशंकर मिश्रा दयालु, आशीष पटेल, गिरीश चंद्र यादव, विजय लक्ष्मी गौतम और दानिश अंसारी जैसे नाम हैं.

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पश्चिम और अवध कमजोर?

हालांकि, सीएम योगी के मंत्रिमंडल में पश्चिम और अवध कमजोर है, ये कहना उतना ठीक नहीं है. लेकिन प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और प्रदेश अध्यक्ष जैसे भारी भरकम पद पूर्वांचल के पास हैं. इसलिए अन्य जगहों को अहमियत देना क्षेत्रीय संतुलन के लिए जरूरी है. 

पश्चिम से प्रमुख चेहरों में बेबी रानी मौर्य, लक्ष्मी नारायण चौधरी, जयवीर सिंह, धर्मपाल सिंह, राकेश सचान, योगेन्द्र उपाध्याय, सुनील शर्मा, अनिल कुमार कपिलदेव अग्रवाल, संदीप सिंह, नरेंद्र कश्यप जैसे कई नाम शामिल हैं.

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कैबिनेट विस्तार में किसे ज्यादा तरजीह?

कैबिनेट विस्तार के जरिए अवध और पश्चिम को ज्यादा अहमियत दी गई है. रविवार को जितने मंत्रियों ने शपथ ली, उनमें मनोज पांडेय रायबरेली से, भूपेंद्र चौधरी मुरादाबाद से, हंसराज विश्वकर्मा वाराणसी से, कैलाश राजपूत कन्नौज से, कृष्णा पासवान फतेहपुर से, सुरेंद्र दिलेर अलीगढ़ से, अजीत पाल कानपुर देहात से और सोमेंद्र तोमर मेरठ से आते हैं. यानी पूर्वांचल से सिर्फ हंसराज विश्वकर्मा मंत्रिमंडल में शामिल हुए हैं. बाकी सब अवध या पश्चिम से मंत्री बनाए गए हैं.

पूर्वांचल का वेटेज ज्यादा ना लगे, इसी वजह से अन्य क्षेत्रों में संतुलन ठीक करने की कोशिश इस मंत्रिमंडल विस्तार में की गई है. हालांकि नामी चेहरों के मामले में पूर्वांचल अभी भी काफी आगे दिखाई देता है.

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