बेटी जन्मी तो परिवार ने किया ग्रैंड वेलकम, गाजे‑बाजे और आतिशबाजी से घर लाया नन्ही मेहमान  

हमीरपुर जिले से बेटियों के प्रति बदली सोच की एक प्रेरणादायक कहानी सामने आई है. बेटी के जन्म पर परिवार ने गाजे‑बाजे, डीजे और आतिशबाजी के साथ ग्रांड वेलकम किया. अस्पताल से घर तक कारों के काफिले में नन्ही मेहमान को लाया गया.

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Girl Child Celebration: आज भी समाज में बेटियों के जन्म पर मायूसी की खबरें सुनने को मिल जाती हैं, लेकिन हमीरपुर जिले से आई यह कहानी सोच बदलने वाली है. यहां एक परिवार ने बेटी के जन्म को किसी त्योहार से कम नहीं माना. अस्पताल से लेकर घर तक गाजे‑बाजे, ढोल‑नगाड़ों और कारों के काफिले के साथ नवजात बेटी का ऐसा स्वागत किया गया, जिसे देखकर हर कोई भावुक हो गया. परिवार ने यह संदेश दिया कि बेटियां बोझ नहीं, बल्कि घर की खुशियों की सबसे बड़ी वजह होती हैं.

रवींद्र निगम की रिपोर्ट..

बेटी के जन्म से घर में खुशी की लहर

हमीरपुर जिला मुख्यालय के रमेडी मोहल्ला निवासी रेखा पत्नी अभय ने 29 मार्च को अपनी पहली संतान के रूप में बेटी को जन्म दिया. जैसे ही यह खुशखबरी परिवार को मिली, पूरे घर में खुशी की लहर दौड़ गई. परिवार ने तय किया कि बेटी के आगमन को खास और यादगार बनाया जाएगा.

अस्पताल से घर तक निकला जश्न का काफिला

जब मां और नवजात बेटी को अस्पताल से छुट्टी मिली, तो परिवार डीजे, ढोल‑नगाड़ों और कारों के काफिले के साथ अस्पताल पहुंचा. बेटी को बड़े ही सम्मान और प्यार के साथ घर लाया गया. रास्ते भर संगीत और नाच‑गाने के बीच लोगों ने इस अनोखे स्वागत को देखा.

फूलों की वर्षा और आतिशबाजी से स्वागत

घर पहुंचने पर पहले से ही हर तरफ सजावट की गई थी. फूलों से रास्ता सजाया गया था और जैसे ही बेटी घर में आई, उस पर पुष्प वर्षा की गई. रोली से तिलक लगाकर बेटी का स्वागत हुआ और जमकर आतिशबाजी भी की गई. परिवार के लोगों ने डीजे की धुन पर नाचकर अपनी खुशी जाहिर की.

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पिता ने कहा- बेटी हमारे घर की रौनक है

बेटी के पिता अभय ने बताया कि बेटी का जन्म उनके लिए सबसे बड़ी खुशी है. उनका कहना है कि बेटियां घर की शान होती हैं और उनके आने से परिवार में नई ऊर्जा और खुशियां आती हैं. परिवार के मुखिया और बेटी के बड़े पिता पवन कुमार ने कहा कि उनके परिवार में बेटियों को हमेशा बेटों से कम नहीं माना गया. उन्होंने बताया कि छोटे भाई को पहली संतान के रूप में बेटी मिली है और पूरा परिवार इससे बेहद खुश है. उनका मानना है कि बेटी के आने से घर और भी खुशहाल होगा.

समाज के लिए एक सकारात्मक उदाहरण

यह आयोजन सिर्फ जश्न नहीं, बल्कि समाज के लिए एक साफ संदेश है कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं. हमीरपुर का यह परिवार साबित करता है कि सोच बदले तो समाज भी बदले. बेटी का ऐसा भव्य स्वागत आज के समय में एक प्रेरणादायक मिसाल बन गया है.

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