वाराणसी के बहुचर्चित ज्ञानवापी मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाया है. जमीन अदला-बदली को लेकर चल रहे विवाद में कोर्ट ने अब लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए अंजुमन इंतजामिया और काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास दोनों पर जुर्माना लगाया है. साथ ही, अदालत ने साफ कर दिया है कि अब जवाब दाखिल करने में ढिलाई बर्दाश्त नहीं की जाएगी. इस फैसले के बाद मामले ने फिर से तूल पकड़ लिया है.
जवाब दाखिल का मौका खत्म, कोर्ट सख्त
ज्ञानवापी से जुड़े जमीन अदला-बदली विवाद में कोर्ट ने दोनों पक्षों को काफी समय दिया था, लेकिन समय पर जवाब दाखिल नहीं करने पर अदालत ने सख्ती दिखाई. अब कोर्ट ने साफ कर दिया है कि आगे और समय नहीं दिया जाएगा और जो भी पक्ष लापरवाही करेगा, उसे इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.
अंजुमन इंतजामिया और न्यास पर जुर्माना
कोर्ट ने अंजुमन इंतजामिया पर 500 रुपये का जुर्माना लगाया है. वहीं, इससे पहले काशी विश्वनाथ मंदिर न्यास पर भी जवाब दाखिल न करने को लेकर 300 रुपये का हर्जाना लगाया जा चुका है. यह कदम अदालत की नाराजगी को साफ दर्शाता है.
जमीन अदला-बदली पर उठे सवाल
इस पूरे मामले को बनारस बार के पूर्व महामंत्री नित्यानंद राय ने अदालत में चुनौती दी है. उनका कहना है कि जब पूरी जमीन बाबा विश्वनाथ की बताई जा रही है, तो फिर अंजुमन इंतजामिया के साथ जमीन की अदला-बदली का आधार क्या था. इसी सवाल को लेकर उन्होंने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
2021 की प्रक्रिया को बताया अवैध
याचिका में आरोप लगाया गया है कि साल 2021 में हुई जमीन अदला-बदली पूरी तरह से नियमों के खिलाफ की गई. याचिकाकर्ता ने मांग की है कि इस समझौते को शून्य घोषित किया जाए और विश्वनाथ कॉरिडोर की जमीन पर सिर्फ काशी विश्वनाथ मंदिर का ही अधिकार माना जाए. मामले में अब अगली सुनवाई 19 अगस्त को तय की गई है. इस सुनवाई में दोनों पक्षों की दलीलों पर आगे चर्चा होगी.











