ग्रेटर नोएडा और दादरी में फ़्लैटों की बंपर हुई सेल, स्टांप विभाग की रिकॉर्ड 1450 करोड़ की कमाई 

अधिकारियों के अनुसार इस पूरे वित्तीय वर्ष में कुल 1.6 लाख संपत्तियों का पंजीकरण हुआ, जो पिछले साल के 1.7 लाख से कम है। यानी खरीद बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ी लेकिन सरकार की छूट योजनाओं ने रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह गिरने नहीं दिया.

विज्ञापन
Read Time: 2 mins
नई दिल्ली:

ग्रेटर नोएडा और दादरी में फ्लैटों की रिकॉर्ड तोड़ सेल हुए हुई है. वित्तीय वर्ष 2025-26 में स्टांप एवं पंजीकरण विभाग की कमाई ने नया रिकॉर्ड बनाया, लेकिन इसके पीछे एक दिलचस्प ट्रेंड सामने आया—संपत्ति रजिस्ट्रेशन घटे, जबकि रियायतों ने राजस्व को संभाले रखा. विभाग ने 4,498.7 करोड़ रुपये जुटाए, जो एक दशक में सबसे अधिक है, हालांकि यह 5,180 करोड़ के लक्ष्य का 87% ही रहा.

इस पूरे वित्तीय वर्ष में कुल 1.6 लाख संपत्तियों का पंजीकरण हुआ, जो पिछले साल के 1.7 लाख से कम है. यानी खरीद बिक्री की रफ्तार धीमी पड़ी लेकिन सरकार की छूट योजनाओं ने रजिस्ट्रेशन को पूरी तरह गिरने नहीं दिया. खास तौर पर रियायती श्रेणी में आने वाले मामलों में बढ़ोतरी देखी गई. 2024-25 के 8,976 के मुकाबले 2025-26 में 9,899 लोगों ने छूट का फायदा उठाया.

AIG अरुण शर्मा के मुताबिक सरकार की नीतियां इस बदलाव की बड़ी वजह रहीं. जुलाई 2025 में महिलाओं के लिए स्टांप ड्यूटी में छूट की सीमा 10 लाख से बढ़ाकर 1 करोड़ रुपये कर दी गई. इससे महिला खरीदारों को 1% की छूट मिलने लगी, जिससे वे अधिकतम 1 लाख रुपये तक बचत कर सकीं. इसका असर यह हुआ कि कम कीमत वाले सौदों की जगह अब ज्यादा मूल्य की संपत्तियों में भी रियायत का लाभ लिया जाने लगा.

इसके अलावा, किराये के समझौतों पर स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस में 90% तक की कटौती ने भी सिस्टम में अधिक लोगों को जोड़ने का काम किया. वहीं, जनवरी 2026 में पारिवारिक स्तर पर व्यावसायिक और औद्योगिक संपत्तियों के हस्तांतरण को महज 5,000 रुपये में संभव बनाकर सरकार ने कारोबारियों को बड़ी राहत दी.राजस्व के लिहाज से ग्रेटर नोएडा सबसे आगे रहा, जहां से 1,284.8 करोड़ रुपये आए.नोएडा-1 और दादरी भी बड़े योगदानकर्ता रहे। यह साफ संकेत है कि बड़े और हाई-वैल्यू ट्रांजैक्शन अब भी इन इलाकों में केंद्रित हैं.

Advertisement
Featured Video Of The Day
Sucherita Kukreti | Bengal Election 2026: Malda हिंसा पर TMC प्रवक्ता को सुचरिता ने सुनाई खरी खरी!
Topics mentioned in this article