मायावती ने बीजेपी को और सपा ने मायावती को क्या संकेत दे दिया! आखिर क्या है बहनजी की रणनीति, जान लीजिए

मायावती के जन्मदिन पर सुबह सुबह अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के ज़रिए बधाई दी. ये बधाई सिर्फ़ बधाई तक सीमित नहीं थी बल्कि अखिलेश यादव ने मायावती को एक राजनैतिक संकेत भी दे दिया. ऐसा लगा जैसे अखिलेश को ये लगता है कि भविष्य में मायावती बीजेपी के साथ आ सकती हैं.

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मायावती ने यूपी की राजनीति में दिए बड़े संकेत
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  • मायावती के जन्मदिन पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने उन्हें बधाई दी
  • अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया पर मायावती को बधाई देते हुए गठबंधन की संभावना का इशारा किया
  • बीएसपी ने 2019 में सपा के साथ गठबंधन कर दस लोकसभा सीटें जीतीं लेकिन बाद में अकेले चुनाव लड़ने का फैसला किया
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लखनऊ:

यूपी की राजनीति में सीटों के आंकड़ों में बीएसपी भले कमज़ोर दिखाई देती हो लेकिन उसकी ताक़त को ख़ारिज नहीं किया जा सकता. शायद इसीलिए बीएसपी प्रमुख मायावती के जन्मदिन पर उन्हें सभी दलों से शुभकामनाएं भी मिलीं और मायावती ने भी एक ऐसा तीर फेंका है जिसकी खूब चर्चा हो रही है. क्या है मायावती की रणनीति और कैसे मायावती ने बड़ा संकेत दिया है. बहुजन समाज पार्टी यूपी की 403 सीटों वाली विधानसभा में सिर्फ एक विधायक और लोकसभा में शून्य के आंकड़े पर है बावजूद इसके मायावती की ताक़त कुछ ऐसी है कि कोई उन्हें नज़रअंदाज़ नहीं कर सकता. अभी 15 जनवरी को जब उनका जन्मदिन था तब सीएम योगी ने उन्हें कॉल करके बधाई दी तो वहीं अखिलेश यादव का पोस्ट खूब चर्चा में भी है.

मायावती के जन्मदिन पर सुबह सुबह अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया के ज़रिए बधाई दी. ये बधाई सिर्फ़ बधाई तक सीमित नहीं थी बल्कि अखिलेश यादव ने मायावती को एक राजनैतिक संकेत भी दे दिया. ऐसा लगा जैसे अखिलेश को ये लगता है कि भविष्य में मायावती बीजेपी के साथ आ सकती हैं. मायावती ने भी अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में अखिलेश यादव की आशंका को बढ़ा दिया जब उन्होंने गठबंधन को लेकर ये बयान दिया. 

इस इशारे को अगर समझें तो ये इशारा कहीं ना कहीं बीजेपी को दिया गया है. माना जाता है कि सवर्णों के वोट बैंक का बड़ा हिस्सा बीजेपी को जाता है.ऐसे में मायावती ने इशारा तो दे दिया लेकिन बीजेपी के लिए इस संकेत को स्वीकार करना आसान नहीं होगा.मायावती अकेले चुनाव लड़ने के ऐलान के साथ आगे बढ़ रही हैं। साल 2014 का लोकसभा चुनाव हो या 2017 का विधानसभा चुनाव, मायावती में अकेले चुनाव लड़ा. नतीजे अच्छे नहीं आए। इसके बाद साल 2019 के लोकसभा चुनाव में बीएसपी ने वो किया जिसकी किसी को उम्मीद नहीं थी. उन्होंने सपा से गठबंधन किया. दस लोकसभा सीटें जीतने के बाद बीएसपी ने गठबंधन तोड़ लिया और उसके बाद के सभी चुनाव अकेले लड़ा लेकिन नतीजे बहुत ख़राब आए. 

नतीजे भले ख़राब आए लेकिन बीएसपी ने कांशीराम की पुण्यतिथि के मौके पर लखनऊ में लाखों की भीड़ इकट्ठी करके अपनी ताक़त का प्रदर्शन किया. इस रैली ने बीएसपी को नई ऊर्जा दी तो वहीं उनके विरोधी भी उनकी ताक़त को हल्के में लेने की गलती ना करने की स्थिति में आ गए.मायावती से गठबंधन करना आसान नहीं. मायावती हमेशा अपने सहयोगी से आधा या उससे ज़्यादा हिस्सा मांगती रही हैं. बीजेपी और सपा के गठबंधन में ये झलकता भी रहा है. आज बीजेपी और सपा दोनों बीएसपी से आंकड़ों में काफ़ी मज़बूत हैं. ऐसे में सपा और बीजेपी ने मायावती के बयान पर कुछ यूं बयान दिया. 

समाजवादी पार्टी पार्टी भले ही बीएसपी पर आरोप लगा रही हो लेकिन अखिलेश यादव का ट्वीट बताता है कि सपा भी मायावती की रणनीति को लेकर सजग है. फ़िलहाल यूपी में विधानसभा चुनाव में एक साल का वक़्त बचा है। सपा के पास अखिलेश यादव का पीडीए है तो बीजेपी के पास योगी आदित्यनाथ का हिंदुत्व और विकास का एजेंडा. ऐसे में क्या बीएसपी अपना खोया वजूद हासिल करने के लिए गठबंधन करेगी या सीधी लड़ाई बीजेपी और सपा में होगी, ये देखना दिलचस्प होगा.

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