मायावती पर निगाहें, आकाश पर निशाना... चंद्रशेखर आजाद रावण का ये नया बहाना

आकाश आनंद के खिलाफ चंद्रशेखर रावण ने डबल डोज वाली रणनीति बनाई है. वे मायावती के खिलाफ सीधे-सीधे कुछ बोलने से बचते हैं, लेकिन आकाश आनंद को उभरने से पहले ही वे राजनीति में फिनिश करने की तैयारी में हैं.

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लखनऊ:

बहुजन समाज पार्टी (BSP) प्रमुख मायावती और आजाद समाज पार्टी के अध्यक्ष और यूपी के नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद रावण के बीच तलवारें खिंच गई हैं. दोनों ने एक दूसरे पर कई गंभीर आरोप लगाए हैं. ताजा विवाद के केंद्र में हैं मायावती के भतीजे आकाश आनंद. बीएसपी चीफ ने आकाश के स्पीच देने पर रोक लगा दी है. आकाश पर लगी नई पाबंदी पर चंद्रशेखर रावण ने तंज किया है. उन्होंने कहा कि वे आकाश के लिए दुआ करते हैं. ये उनके घर का मामला है. मायावती ने उन्हें पार्टी के अंदर और बाहर कर उनका भविष्य तो चौपट कर ही दिया है.

मायावती ने भतीजे आकाश के मीडिया से बात करने पर लगाई रोक

कहा गया है कि आकाश आनंद अपनी सभी मीटिंग इनडोर करेंगे. मतलब ये है कि आकाश क्या कर रहे हैं और क्या कह रहे हैं ये किसी को पता नहीं चले. मायावती ने अपने भतीजे के मीडिया से बात करने पर भी रोक लगा दी है. वे अब किसी पत्रकार को इंटरव्यू नहीं दे पाएंगे. मायावती के इन फैसलों के पीछे ये तर्क दिया गया है कि पार्टी की इकलौती आवाज सिर्फ़ मायावती ही रहें.

मायावती ने कांशीराम की बनाई बीएसपी को बर्बाद कर दिया है. पिछले बारह सालों में मायावती ने कभी कोई संघर्ष नहीं किया. उन्होंने दलित समाज की कोई परवाह नहीं की. अगर उन्होंने ऐसा किया होता, तो फिर लोगों को मेरी जरूरत क्यों पड़ती?

चंद्रशेखर आजाद

अध्यक्ष, आजाद समाज पार्टी

उपचुनाव में आजाद समाज पार्टी ने बीएसपी से बेहतर प्रदर्शन किया

आजाद समाज पार्टी अब यूपी में बीएसपी के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द बन चुकी है. बीते लोकसभा चुनाव में यूपी में बीएसपी का खाता तक नहीं खुला, लेकिन चंद्रशेखर रावण नगीना की सुरक्षित सीट से चुनाव जीत गए. जबकि आकाश आनंद ने यूपी में चुनाव प्रचार की शुरुआत नगीना से ही की थी. बीते दिनों हुए विधानसभा के उपचुनाव में भी तीन सीटों पर आजाद समाज पार्टी का प्रदर्शन बीएसपी से बेहतर रहा. अब दोनों पार्टियां पंचायत चुनाव में जुटी हैं.

चंद्रशेखर रावण ने बनाई डबल डोज वाली रणनीति

आकाश आनंद के खिलाफ चंद्रशेखर रावण ने डबल डोज वाली रणनीति बनाई है. वे मायावती के खिलाफ सीधे-सीधे कुछ बोलने से बचते हैं. उनका लाइन यही कहता है कि मायावती बड़ी नेता हैं. उनका हम मान सम्मान करते हैं, लेकिन आकाश आनंद को उभरने से पहले ही वे राजनीति में फिनिश करने की तैयारी में हैं. दलित नौजवानों का एक बड़ा वर्ग उनके साथ है. पश्चिमी यूपी में आजाद समाज पार्टी ने पैठ बना ली है. दलितों के साथ-साथ मुस्लिम समाज का समर्थन भी मिलने लगा है. यहीं से मायावती के लिए खतरे की घंटी बज गई है.

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