शेयर बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग क्या होता है, समझें यहां

ऑप्शन ट्रेडिंग एक प्रकार से एक ऐसा अनुबंध या कहें कॉन्ट्रेक्ट है जो एक खरीदार और एक विक्रेता के बीच होता है.

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शेयर बाजार में ऑप्शन ट्रेडिंग है कमाई का जरिया
नई दिल्ली:

शेयर बाजार में निवेश कर पैसा कमाने के दो रास्ते बताए जाते हैं. एक है इनवेस्टिंग और दूसरा है ट्रेडिंग. इनवेस्टिंग पर कुछ बातें हो चुकी हैं. लेकिन आज बता ट्रेडिंग की करते हैं. ट्रेडिंग में ऑप्शन ट्रे़डिंग के बारे में बात करते हैं. ऑप्शन ट्रेडिंग (Option Trading) को विकल्प निवेश के नाम से भी पुकारा जाता है. यह एक फाइनेंसियल ऑप्शन है जिसके तहत एक ट्रेडर या निवेशक किसी खास समय पर एक खास मूल्य पर किसी विशेष संपत्ति को खरीदने या बेचने का अधिकार रखता है. ऑप्शन ट्रेडिंग एक प्रकार से एक ऐसा अनुबंध या कहें कॉन्ट्रेक्ट है जो एक खरीदार और एक विक्रेता के बीच होता है. इसमें खरीदार को कुछ प्रीमियम का भुगतान करके एक निश्चित तिथि पर किसी स्टाइक प्राइस पर प्रतिभूतियों को खरीद और बेच सकते है. ऑप्शन ट्रेडिंग में कॉल और पुट ऑप्शन खरीदे या बेचे जाते हैं.

इस ट्रेडिंग में यदि किसी को लगता है कि भविष्य में किसी शेयर की कीमत चढ़ने वाले हैं तो वह ऑप्शन ट्रेडिंग के जरिए उस शेयर को बिना पूरे पैसे दिए एक प्रीमियम देकर भविष्य के लिए शेयर को खरीद या बेच सकता है. सझलिए कि निवेशको द्वारा विभिन्न वित्तीय उद्देश्यों की पूर्ति के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग का उपयोग किया जाता है. साथ ही यह ट्रेड लेने वाले को ज्यादा नुकसान से भी बचाता है. यहां गौर करने की बात यह है कि अगर भविष्य में शेयर की कीमतों में उतार-चढ़ाव होता है तो ट्रेड लेने वाले को केवल उतने ही पैसों का नुकसान होगा जितना उसने प्रीमियम दिया होगा. 

ऑप्शन ट्रेडिंग में निवेशक इस बात का निष्कर्ष निकालने के लिए इसका उपयोग करते हैं कि निकट भविष्य में संपत्ति का मूल्य कितना बढ़ेगा या कम होगा. और यह भी कोई संपत्ति खरीदने की आवश्यकता के बगैर. यह निवेशक को एक निश्चित अवधि के बाद पहले से ही तय पूर्व-निर्धारित दर पर सिक्योरिटीज, ईटीएफ या इंडेक्स फंड जैसे कई उपकरणों में ट्रेडिंग करने की अनुमति देता है. 

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एक प्रकार से देखा जाए तो ऑप्शन ट्रेडिंग के जरिये कोई भी मार्केट में शेयर खरीद और बेच सकता है. यह ट्रेडिंग बड़ा लाभ कमाने में सहायता कर सकती है. साथ ही यह किसी बड़े नुकसान से भी बचाती है. 

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ऑप्शन ट्रेडिंग में दो प्रकार से ट्रेड होता है. कॉल ऑप्शन और पुट ऑप्शन. यानी ऑप्शन ट्रेडिंग में किसी भी प्रतिभूति जैसे बैंकनिफ्टी, निफ्टी, स्टॉक्स को खरीदने और बेचने के लिए ऑप्शन ट्रेडिंग में कॉल और पुट दो प्रकार के आवश्यक ऑप्शन हैं. 

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कॉल ऑप्शन (Call Option) – कॉल ऑप्शन को कॉल यूरोपियन (Call European CE) से दर्शाया जाता है. यह एक तय कीमत पर खास संपत्ति को खरीदने का अधिकार प्रदान करती है. किसी इंडेस्क्स और स्टॉक की कीमतों के ऊपर जाने का अनुमान लगने पर कॉल ऑप्शन खरीदा जाता है. जैसे-जैसे बाजार में इंडेस्क्स और स्टॉक की कीमतों में बढ़ोतरी होती वैसे ही कॉल ऑप्शन की कीमत भी बढ़ती है.

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पुट ऑप्शन (Put Option) – पुट ऑप्शन को Put European (PE) से दर्शाया जाता है. पुट ऑप्शन एक तय मूल्य पर एक खास संपत्ति को बेचने का अधिकार देती है. मार्केट के इंडेक्स या स्टॉक की कीमतों में गिरावट का अंदेशा होने पर पुट ऑप्शन खरीदा जाता है. बता दें कि एक पुट ऑप्शन खरीदने पर यदि ऑप्शन की कीमत सोचे गई कीमत के अनुसार गिर जाती है, तो बहुत लाभ कमाया जा सकता है. वहीं, यदि कीमत में उछाल आने से वृद्धि हो जाती है और आप सही समय पर अपने ऑप्शन को बेचने से चूक जाते हैं, तो भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है.

इस ट्रेड से जुड़े कुछ खास शब्दों के बारे में जानकारी जरूरी है. 
संचालन मूल्य (Strike Price): यह वह कीमत है जिस पर एक ऑप्शन की बिक्री या खरीदारी होती है.

प्रीमियम (Premium): यह वह राशि है जो एक ऑप्शन को खरीदने या बेचने के लिए दी जाती है.

ऑप्शन ग्रीक्स (Option Greeks): ये विभिन्न पैरामीटर हैं यानी वे नंबर हैं जो ऑप्शन की मूल्य और ऑप्शन के मूवमेंट के बारे में कुछ समझाने में मदद करते हैं. ये ग्रीक्स आमतौर पर वेगा, थीटा, रो, गामा और डेल्टा होते हैं और ऑप्शन ट्रेडिंग में महत्वपूर्ण हैं. (इन सबके बारे में चर्चा किसी अन्य लेख में...)

समय सीमा (Expiry date): यह वह तारीख है जब एक ऑप्शन की मान्यता खत्म होती है और ऑप्शन पर ट्रेडिंग समाप्त हो जाती है. 

मार्जिन (Margin): यह वह एक निश्चित राशि है जिस मार्जिन कहा जाता है, जो ट्रेडर के लिए एक प्रकार से सुरक्षा राशि है जिसकी जरूरत होती है किसी भी खरीदारी या बिक्री के पहले. यह मार्जिन मनी खाते में होने के बाद ही बिक्री या खरीदारी की जा सकती है

निवेशक (Trader): यह व्यक्ति होता है जो ऑप्शन ट्रेडिंग में ऑप्शन को खरीदने या बेचने का फैसला लेता है और ऑप्शन एक्सचेंज (Option Exchange) करता है.

विनिमय (Exchange): यह एक माध्यम होता है जिसके माध्यम से ऑप्शन खरीदे और बेचे जा सकते हैं. एक्सचेंज बाजार में ऑप्शन ट्रेड किए जाते हैं और इन एक्सचेंज पर ऑप्शन की कीमतें तय होती हैं.
 

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