Cyber Insurance: आजकल डिजिटल दुनिया का समय है. लोग अधिकांश समय ऑनलाइन रहकर बिताते हैं. बैंकिंग, शॉपिंग, ऑफिस वर्क और सोशल नेटवर्किंग आदि हर एक चीज की जानकारी इंटरनेट पर रहती है. यही कारण है कि आज के समय में साइब क्राइम का मामले भी तेजी से बढ़े हैं. साइबर ठग डेटा चोरी कर उसका गलत इस्तेमाल भी करते हैं. हालांकि, डेटा चोरी और साइबर ठगी से बचने के लिए एक तरीका बहुत असरदार है और वह है साइबर इंश्योरेंस, जिससे नुकसान की भरपाई हो सकती है. चलिए आपको बताते हैं क्या है साइबर इंश्योरेंस और यह किसे लेनी चाहिए.
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साइबर इंश्योरेंस क्या है?
साइबर इंश्योरेंस एक ऐसी बीमा योजना है, जो किसी कंपनी को साइबर अपराधों से होने वाले नुकसान से बचाने में मदद करती है. अगर किसी कंपनी पर साइबर अटैक, हैकिंग या डेटा चोरी (डेटा ब्रीच) होता है, तो यह बीमा उस नुकसान की भरपाई में सहायता करता है. साइबर इंश्योरेंस कंपनियों को उन खर्चों से बचाता है जो इंटरनेट से जुड़े खतरों के कारण उनके आईटी सिस्टम,
डेटा प्रबंधन (information governance) और सूचना सुरक्षा नीतियों को नुकसान पहुंचाते हैं. ऐसे नुकसान सामान्य बिजनेस बीमा योजनाओं में शामिल नहीं होते, इसलिए साइबर इंश्योरेंस जरूरी हो जाता है.
यह उसी तरह काम करता है, जैसे कंपनियां प्राकृतिक आपदाओं या भौतिक नुकसान के लिए बीमा करवाती हैं. यदि किसी कंपनी पर साइबर हमला होता है और उससे आर्थिक नुकसान होता है, तो साइबर इंश्योरेंस उस नुकसान को कवर करता है और कंपनी को फिर से सामान्य रूप से काम शुरू करने में मदद करता है. यह बीमा कंपनियों को साइबर अपराधों से होने वाले आर्थिक जोखिम से बचाने के लिए बनाया गया है.
साइबर इंश्योरेंस में दो तरह की कवरेज होती हैफर्स्ट-पार्टी कवरेज- यह कवरेज कंपनी को सीधे हुए नुकसान को कवर करती है. जैसे डेटा चोरी होने पर नुकसान, सर्वर या सिस्टम डाउन होने से नुकसान और कंपनी के काम रुकने से हुआ आर्थिक नुकसान आदि.
थर्ड-पार्टी कवरेज- यह कवरेज उन लोगों या कंपनियों के नुकसान को कवर करती है, जो उस कंपनी से जुड़े थे और साइबर हमले की वजह से प्रभावित हुए. जैसे ग्राहकों का डेटा चोरी होना और बिजनेस पार्टनर को नुकसान होना आदि.














