SIP vs PPF: आज के समय में भविष्य को सुरक्षित करने के लिए निवेश करना बेहद जरूरी हो गया है. अब, जब भी पैसों को लंबे समय के लिए निवेश करने की बात की जाती है, तो ज्यादातर लोगों के मन में दो ऑप्शन आते हैं- SIP (Systematic Investment Plan) और PPF (Public Provident Fund). दोनों ही निवेश के अच्छे साधन हैं, लेकिन दोनों के फाइनेंशियल गोल्स, जोखिम और रिटर्न एक-दूसरे से काफी अलग हैं. ऐसे में अगर आप भी अपने पैसे को इनवेस्ट करने का सोच रहे हैं और आपके मन में कंफ्यूजन है कि SIP में निवेश करें या PPF, तो ये आर्टिकल आपके लिए मददगार हो सकता है. यहां हम आपको बेहद आसान भाषा में दोनों का फर्क बता रहे हैं. इसे समझकर आप अपने लिए बेहतर ऑप्शन चुन सकते हैं. तो आइए विस्तार से समझते हैं इस बारे में-
SIP क्या है और कैसे काम करता है?
- SIP यानी सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान एक ऐसा तरीका है, जिसमें आप हर महीने एक तय रकम म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं. इसमें आप छोटी रकम से भी निवेश शुरू कर सकते हैं, जैसे 500 रुपये या 1000 रुपये प्रति महीना.
- SIP मार्केट से जुड़ा होता है. अगर शेयर बाजार अच्छा प्रदर्शन करता है, तो SIP से रिटर्न काफी ज्यादा मिल सकता है. हालांकि, बाजार गिरने पर निवेश की वैल्यू घट भी सकती है, लेकिन लंबे समय में यह उतार-चढ़ाव संतुलित हो जाता है.
- SIP की एक बड़ी खासियत यह है कि जरूरत पड़ने पर इसमें लगाया गया पैसा आसानी से निकाला जा सकता है. इसके अलावा ELSS जैसे SIP विकल्पों में आयकर की धारा 80C के तहत टैक्स छूट भी मिलती है.
- PPF यानी पब्लिक प्रोविडेंट फंड सरकार द्वारा चलाई जाने वाली एक बचत योजना है. यह उन लोगों के लिए सबसे बेहतर मानी जाती है जो बिना किसी जोखिम के निवेश करना चाहते हैं.
- PPF में सरकार द्वारा तय ब्याज दर मिलती है, जो समय-समय पर बदलती रहती है. इस योजना की अवधि 15 साल होती है, इसलिए यह रिटायरमेंट या बच्चों की पढ़ाई जैसे लंबे लक्ष्यों के लिए उपयुक्त है.
- PPF में निवेश किया गया पैसा पूरी तरह सुरक्षित रहता है, लेकिन इसमें लिक्विडिटी कम होती है. निवेशक सात साल पूरे होने के बाद ही आंशिक रूप से पैसा निकाल सकता है.
- PPF की सबसे बड़ी खासियत इसका टैक्स फायदा है. इसमें निवेश की गई रकम, मिलने वाला ब्याज और मैच्योरिटी पर मिलने वाला पूरा पैसा, तीनों ही पूरी तरह टैक्स फ्री होते हैं.
- SIP और PPF के बीच सबसे बड़ा फर्क जोखिम और रिटर्न का है. SIP में जोखिम ज्यादा होता है, लेकिन रिटर्न भी ज्यादा मिलने की संभावना रहती है. वहीं, PPF में जोखिम लगभग नहीं के बराबर होता है, लेकिन रिटर्न सीमित होता है.
- फ्लेक्सिबिलिटी के मामले में SIP आगे है. इसमें आप निवेश की रकम बढ़ा या घटा सकते हैं और जरूरत पड़ने पर निवेश बंद भी कर सकते हैं. PPF में 15 साल का लॉक-इन जरूरी होता है.
- लिक्विडिटी की बात करें, तो SIP से पैसा जल्दी निकाला जा सकता है, जबकि PPF में पैसा लंबे समय तक फंसा रहता है.
अगर आपकी आय स्थिर है, आप बाजार के उतार-चढ़ाव को समझते हैं और लंबे समय में ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, तो SIP आपके लिए बेहतर विकल्प हो सकता है. वहीं, अगर आप सुरक्षित निवेश, गारंटीड रिटर्न और टैक्स फ्री कमाई चाहते हैं, तो PPF आपके लिए सही रहेगा.
सबसे समझदारी भरा तरीका यह है कि आप दोनों में निवेश करें. PPF से सुरक्षा मिलेगी और SIP से पैसों की बढ़त होगी. इस तरह आप जोखिम और रिटर्न के बीच संतुलन बना सकते हैं.














