Long-Term VS Short-Term Personal Loan: लोन लेते समय ज्यादातर लोग सिर्फ EMI देखकर फैसला कर लेते हैं. अधिकतर लोगों को लगता है कि कम EMI देना ज्यादा फायदेमंद ऑप्शन है, लेकिन असली खेल लोन की अवधि (Tenure) में छिपा होता है. लॉन्ग टर्म लोन EMI बढ़ा देता है, लेकिन इसमें कुल ब्याज कम लगता है. वहीं, शॉर्ट टर्म लोन EMI तो कम करता है, लेकिन इसमें कुल मिलाकर ज्यादा ब्याज चुकाना पड़ता है. आइए समझते हैं इस बारे में-
मान लीजिए आपने 5 लाख रुपये का लोन 12% ब्याज पर लिया है. अब, अगर आप इसे 3 साल में चुकाते हैं, तो EMI ज्यादा होगी लेकिन कुल ब्याज कम लगेगा. वहीं, 5 साल में चुकाने पर EMI कम होगी, लेकिन ब्याज हजारों रुपये ज्यादा देना पड़ सकता है. ऐसे में लोन लेते समय सिर्फ EMI नहीं, ब्लिक कुल भुगतान (Total Repayment) पर भी ध्यान देना जरूरी होता है.
कब चुनें शॉर्ट टर्म लोन?
अगर आपकी आय स्थिर है और हर महीने बचत भी हो रही है, तो शॉर्ट टर्म लोन बेहतर हो सकता है. इससे आप जल्दी कर्ज मुक्त हो जाते हैं और भविष्य के लिए निवेश शुरू कर सकते हैं. साथ ही मानसिक सुकून भी रहता है कि लोन जल्दी खत्म हो जाएगा. लेकिन अगर आप सेल्फ-एम्प्लॉयड हैं या आपकी आय अनियमित है, तो ज्यादा EMI जोखिम भरी हो सकती है. किसी महीने पैसे कम होने पर आपकी EMI डिफॉल्ट हो सकती है, जिससे पेनल्टी और क्रेडिट स्कोर पर असर पड़ सकता है.
इसके लिए सबसे पहले अपने महीने के सारे खर्चों को जोड़ लें. जैसे- किराया, स्कूल फीस, बीमा, दूसरे EMI आदि. कोशिश करें कि सभी लोन मिलाकर आपकी नेट इनकम का 40-50% से ज्यादा न हो. अगर शॉर्ट टर्म चुनने से यह सीमा पार हो रही है, तो लॉन्ग टर्म लेना समझदारी हो सकती है. वहीं, अगर लोन पर ब्याज 14-16% जितना है, तो जल्दी चुकाना फायदेमंद है.
होम लोन में क्या करें?होम लोन पर ब्याज दर कम होती है और टैक्स छूट (Section 24 और 80C) भी मिलती है. ऐसे में लॉन्ग टर्म लेकर साथ-साथ निवेश करना अच्छा ऑप्शन हो सकता है.
इस तरह आप अपनी आय और जरूरतों को ध्यान में रखकर दोनों में से सही ऑप्शन को चुन सकते हैं.













