RBI Liberalized Remittance Scheme: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) के तहत भारतीय नागरिक विदेश में अलग‑अलग कामों के लिए पैसे भेज सकते हैं. इस साल के बजट में सरकार ने कुछ खास तरह की विदेश भेजी जाने वाली रकम (remittances) पर लगने वाले TCS यानी Tax Collected at Source की दरें कम करने का ऐलान किया है. दरअसल, लिबरलाइज्ड रेमिटेंस स्कीम (LRS) एक फ्रेमवर्क है, जिसे रिज़र्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने शुरू किया है. यह स्कीम देश में रहने वाले लोगों को हर फाइनेंशियल ईयर (अप्रैल-मार्च) में मंजूर करंट या कैपिटल अकाउंट ट्रांजैक्शन के लिए USD 2,50,000 (लगभग ₹2.09 करोड़) तक भेजने की इजाजत देती है.
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2026 के लिए LRS नियम
बजट 2026 से एजुकेशन और मेडिकल ट्रीटमेंट जैसे आम रेमिटेंस पर फाइनेंशियल बोझ कम करने के लिए टैक्स कलेक्टेड ऐट सोर्स (TCS) रेट में काफी रेशनलाइजेशन किए गए हैं. इसमें कुल लिमिट हर व्यक्ति के लिए हर फाइनेंशियल ईयर में USD 2,50,000 ही रहेगी, सिर्फ देश में रहने वाले लोग गार्जियन वाले माइनर्स सहित ही एलिजिबल हैं. यह कॉर्पोरेट्स, पार्टनरशिप फर्म्स, HUFs, या ट्रस्ट्स के लिए उपलब्ध नहीं है. इसके अलावा सभी ट्रांजैक्शन के लिए एक वैलिड PAN कार्ड और फॉर्म A2 जरूरी है.
किन चीजों के लिए भेज सकते हैं पैसे
Resident Indians इन कामों के लिए विदेश में पैसा भेज सकते हैं. जैसे- विदेश में पढ़ाई, विदेश में इलाज, यात्रा (ट्रैवल), किसी नजदीकी रिश्तेदार की देखभाल के लिए पैसा भेजना, गिफ्ट या दान और विदेशी शेयरों, म्यूचुअल फंड या प्रॉपर्टी में निवेश आदि.
इन कामों के लिए विदेश में पैसा नहीं भेज सकते. जैसे- मार्जिन ट्रेडिंग / फॉरेक्स ट्रेडिंग, लॉटरी टिकट, स्वीपस्टेक, फुटबॉल पूल, प्रतिबंधित या बैन की गई मैगजीन, किसी भी तरह का विदेशी मुद्रा ट्रेडिंग और उन देशों को भेजी जाने वाली रकम जिनको FATF ने "non-cooperative" बताया है.
टैक्स नियम में बदलावनए बजट में सरकार ने टैक्स कलेक्टेड एट सोर्स यानी टीसीएस के नियमों में राहत दी है. अब विदेश टूर पैकेज पर टीसीएस दर को 5 फीसदी से घटाकर 2 प्रतिशत कर दिया गया है. मेडिकल ट्रीटमेंट और विदेश पढ़ाई के लिए भेजी जाने वाली राशि पर 10 लाख रुपये तक कोई टीसीएस नहीं लगेगा. 10 लाख से ऊपर की रकम पर केवल 2 प्रतिशत टीसीएस देना होगा. इससे मध्यम वर्ग के परिवारों को सीधी राहत मिलेगी.














