भारतीय रेलवे ने 'जन विश्वास (प्रावधान संशोधन) अधिनियम' के तहत नियमों को सख्त करते हुए खतरनाक और प्रतिबंधित सामान ले जाने पर जुर्माना बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया है. इसके साथ ही यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा को ध्यान में रखते हुए कई अन्य जुर्मानों में भी भारी वृद्धि की गई है. यह बदलाव जन विश्वास (संशोधन प्रावधान) अधिनियम, 2026 के तहत किया गया है, जिसमें रेलवे एक्ट की धारा 165 में संशोधन किया गया है. इस संबंध में रेल मंत्रालय ने आधिकारिक नोटिफिकेशन भी जारी कर दिया है. रेलवे एक्ट की धारा 165 उन मामलों से जुड़ी है, जब कोई व्यक्ति नियमों के खिलाफ खतरनाक या आपत्तिजनक सामान ट्रेन में ले जाता है. यह धारा धारा 67 के उल्लंघन से संबंधित है.
भारतीय रेलवे के नए नियम
पहले नियम के अनुसार, ऐसे मामलों में सिर्फ 500 रुपये तक का जुर्माना लगता था, लेकिन अब इसे बढ़ाकर 10,000 रुपये कर दिया गया है. इसके अलावा, अगर ऐसे सामान से किसी तरह का नुकसान, चोट या दुर्घटना होती है, तो संबंधित व्यक्ति को उसकी जिम्मेदारी भी उठानी होगी. रेलवे का कहना है कि इस सख्ती का उद्देश्य यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाना और ट्रेनों में खतरनाक सामान ले जाने की घटनाओं पर रोक लगाना है. यात्रियों को सलाह दी गई है कि यात्रा के दौरान रेल नियमों का पालन करें और किसी भी तरह का प्रतिबंधित सामान ट्रेन में न लाएं, ताकि भारी जुर्माने से बचा जा सके.
अब जुर्माने के साथ नुकसान की भरपाई भी करनी होगी
संशोधित धारा 165 के तहत सजा को काफी बढ़ा दिया गया है. अब अगर कोई व्यक्ति ट्रेन में खतरनाक या प्रतिबंधित सामान लेकर चलता है या उसे रेलवे के जरिए भेजता है, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी. इस नियम के मुताबिक, ऐसे सामान को जब्त कर हटाया जाएगा. साथ ही यदि उस सामान की वजह से कोई नुकसान, चोट या दुर्घटना होती है, तो उसकी भरपाई भी उसी व्यक्ति को करनी पड़ेगी यानी अब न सिर्फ जुर्माना देना होगा, बल्कि नुकसान की पूरी जिम्मेदारी भी उठानी होगी. संशोधित नियम के अनुसार, अब जुर्माना पहले से काफी ज्यादा कर दिया गया है. पहले जहां इस तरह के मामले में अधिकतम 500 रुपये का जुर्माना लगता था, अब यह साफ कहा गया है कि जुर्माना कम से कम 10,000 रुपये से कम नहीं होगा.
खतरनाक या आपत्तिजनक सामान
- पेट्रोल, डीजल और केरोसिन
- गैस सिलेंडर और स्टोव
- पटाखे और आतिशबाजी
- एसिड और संक्षारक रसायन
- माचिस, सिगरेट और अन्य विस्फोटक सामग्री
धारा 67 क्या कहती है?
रेलवे एक्ट की धारा 67 के अनुसार, यात्री ट्रेन में किसी भी तरह का खतरनाक या आपत्तिजनक सामान बिना नियमों का पालन किए नहीं ले जा सकते. अगर कोई ऐसा सामान ले जाना चाहता है, तो उसे पहले लिखित में इसकी जानकारी रेलवे के अधिकृत कर्मचारी को देनी होती है और पैकेट पर भी साफ-साफ उसकी जानकारी लिखनी होती है.
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