PM RAHAT Scheme: सड़क दुर्घटनाओं में अक्सर सबसे बड़ी समस्या यह होती है कि घायल व्यक्ति को समय पर इलाज नहीं मिल पाता. कई बार पैसों की कमी भी इलाज में देरी की वजह बनती है. इसी समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने Pradhan Mantri Rahat Road Accident Victim Hospitalisation and Assured Treatment Scheme (PM RAHAT) शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य है कि सड़क हादसे के बाद किसी भी व्यक्ति को पैसों के कारण इलाज से वंचित न रहना पड़े.
क्या है योजना की मुख्य बात?
इस योजना के तहत सड़क दुर्घटना के पात्र पीड़ितों को हादसे के 7 दिनों के अंदर अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज दिया जाएगा. यानी मरीज या उसके परिवार को अस्पताल में पैसे जमा नहीं करने होंगे.
अगर मामला गंभीर है और जान को खतरा है, तो 48 घंटे तक तुरंत इलाज (स्टेबिलाइजेशन) दिया जाएगा. सामान्य यानी कम गंभीर मामलों में 24 घंटे तक तत्काल इलाज की सुविधा मिलेगी. यह सुविधा भारत की किसी भी सड़क पर हुए हादसे पर लागू होगी.
- कोई भी व्यक्ति जो सड़क दुर्घटना में घायल हुआ हो
- दुर्घटना भारत में हुई हो
- मरीज को सरकार द्वारा सूचीबद्ध (एम्पैनल्ड) अस्पताल में भर्ती कराया गया हो
सबसे पहले पुलिस डिजिटल सिस्टम के जरिए दुर्घटना की पुष्टि करेगी. गैर-गंभीर मामलों में 24 घंटे और गंभीर मामलों में 48 घंटे के अंदर सत्यापन जरूरी है.
इलाज का पैसा कौन देगा?अस्पतालों को भुगतान Motor Vehicle Accident Fund (MVAF) से किया जाएगा. अगर दुर्घटना में शामिल वाहन बीमित है, तो बीमा कंपनियां भी योगदान देंगी. पूरी प्रक्रिया डिजिटल प्लेटफॉर्म पर होगी, जिससे भुगतान और क्लेम में पारदर्शिता बनी रहे.
इस योजना के लिए अलग से आवेदन करने की जरूरत नहीं है. यह अपने आप लागू हो जाती है. प्रोसेस भी आसान है. इसके लिए-
- हादसे के बाद 112 पर कॉल करें.
- घायल को नजदीकी सूचीबद्ध अस्पताल में ले जाया जाएगा.
- अस्पताल पोर्टल पर मरीज का रजिस्ट्रेशन करेगा. पहचान के लिए आधार या अन्य दस्तावेज मांगे जा सकते हैं, लेकिन दस्तावेज न होने पर भी इलाज से मना नहीं किया जाएगा.
- इलाज का खर्च (1.5 लाख रुपये तक) सरकार सीधे अस्पताल को देगी. मरीज को कैश देने की जरूरत नहीं होगी.
सड़क हादसे के बाद का पहला एक घंटा 'गोल्डन ऑवर' माना जाता है. इस समय पर सही इलाज मिल जाए तो जान बचने की संभावना काफी बढ़ जाती है. PM RAHAT योजना इसी दिशा में एक बड़ा कदम है. इससे पीड़ित और उनके परिवार पर आर्थिक बोझ कम होगा और समय पर इलाज मिल सकेगा. यह योजना सड़क सुरक्षा और आपातकालीन स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत बनाने की दिशा में एक अहम पहल मानी जा रही है.














