Ambulance Rules: केंद्र सरकार ने सड़क पर चलने वाली एंबुलेंस के लिए नए नियम प्रस्तावित किए हैं. इन नियमों के तहत कुछ खास कैटेगरी की एंबुलेंस में अब नए सुरक्षा और इमरजेंसी से जुड़े मानकों का पालन करना अनिवार्य होगा. साथ ही इलेक्ट्रिक एंबुलेंस के लिए भी अलग से नियम तय किए गए हैं. ये ड्राफ्ट नियम सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने जारी किए हैं. इन नए नियमों का मकसद एंबुलेंस की सुरक्षा को बेहतर बनाना और मरीजों को ले जाने वाले वाहनों में बेहतर इमरजेंसी मेडिकल सुविधाएं सुनिश्चित करना है.
एंबुलेंस के लिए AIS-125 नियम अनिवार्य
ड्राफ्ट नियमों के अनुसार, 1 अप्रैल 2018 के बाद बनी सभी रोड एंबुलेंस यानी L और M कैटेगरी की गाड़ियों को AIS-125 (Part 1)-2014 के नियमों का पालन करना जरूरी होगा. आगे अगर इन नियमों में कोई बदलाव होता है, तो उसका पालन भी करना होगा.
कुछ एंबुलेंस में जरूरी होंगे सेफ्टी और रेस्क्यू उपकरण
सरकार ने यह भी प्रस्ताव रखा है कि कुछ खास तरह की एंबुलेंस में इमरजेंसी और रेस्क्यू उपकरण लगाना अनिवार्य होगा. M कैटेगरी की Type B, Type C और Type D एंबुलेंस सभी में फाइनल नियम लागू होने के 3 महीने बाद बनने वाली एंबुलेंस में यह नियम लागू होंगे. इसके साथ ही इन सभी में AIS-125 के अनुसार तय सुरक्षा और इमरजेंसी उपकरण लगाना जरूरी होगा.
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इलेक्ट्रिक एंबुलेंस के लिए नए नियम
सरकार ने इलेक्ट्रिक एंबुलेंस के लिए भी नए नियम तय किए हैं. 1 अक्टूबर 2026 के बाद बनने वाली सभी इलेक्ट्रिक एंबुलेंस में अतिरिक्त बैटरी लगाना जरूरी होगा. ये बैटरियां एंबुलेंस में लगे मेडिकल उपकरण जैसे ऑक्सीजन, मॉनिटर आदि. चलाने के लिए होंगी. इन अतिरिक्त बैटरियों के नियम और स्पेसिफिकेशन AIS-125 मानकों के अनुसार तय किए जाएंगे और समय-समय पर बदले भी जा सकते हैं.














