Income Tax Rule 2026: साल 2025 टैक्सपेयर्स के लिए कई अहम राहत और बदलाव लेकर आया. पिछले बजट 2025 में जहां मिडिल क्लास और सैलरीड लोगों को बड़ी राहत दी गई, वहीं टैक्स सिस्टम को सरल और पारदर्शी बनाने की कोशिश भी की गई है. टैक्स-फ्री इनकम लिमिट बढ़ाने से लेकर टीडीएस नियमों में ढील और रिटर्न फाइलिंग की समय-सीमा बढ़ाने तक ये बदलाव आने वाले सालों में आपकी टैक्स प्लानिंग को सीधे प्रभावित करेंगे.
आइए जानते हैं 2025 के ऐसे ही 5 बड़े इनकम टैक्स बदलाव, जिनका असर आपकी कमाई और टैक्स पर पड़ेगा.
1. ₹12.75 लाख तक की इनकम पर जीरो टैक्स
बजट 2025 की सबसे बड़ी राहत सेक्शन 87A के तहत टैक्स रिबेट बढ़ाना है. नए टैक्स रिजीम में अगर किसी व्यक्ति की नेट टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख तक है, तो उसे कोई टैक्स नहीं देना होगा. वहीं, सैलरीड टैक्सपेयर्स को ₹75,000 की स्टैंडर्ड डिडक्शन का फायदा मिलता है. इसका मतलब यह है कि ₹12.75 लाख तक की ग्रॉस सैलरी पर भी टैक्स शून्य रहेगा. हालांकि, अगर टैक्सेबल इनकम ₹12 लाख से ऊपर जाती है, तो फिर चुने गए टैक्स रिजीम के मुताबिक टैक्स देना होगा.
2. इलाज और निवेश के नियमों में बड़ा सुधार
बजट 2025 में सैलरीड कर्मचारियों के लिए एक और राहत दी गई है. अब विदेश में मेडिकल ट्रीटमेंट के लिए कंपनी द्वारा किए गए खर्च पर टैक्स-फ्री पर्क्विजिट की सीमा बढ़ाई जाएगी. पर्क्विजिट (Perquisite) का मतलब होता है, सैलरी के अलावा कर्मचारी को मिलने वाले एडिशनल बेनिफिट या सुविधाएं. यह सीमा पहले कई दशकों से बदली नहीं गई थी. सरकार का मानना है कि समय के साथ जीवन स्तर और खर्चों में बदलाव आया है, इसलिए इन सीमाओं को अपडेट करना जरूरी था. इससे ज्यादा कर्मचारियों को टैक्स छूट का फायदा मिलेगा.
3. ULIP से होने वाली कमाई पर टैक्स के नियम साफ
बजट 2025 में ULIP (यूनिट लिंक्ड इंश्योरेंस प्लान) को लेकर टैक्स नियमों को स्पष्ट किया गया है. जिन ULIP पॉलिसी पर सेक्शन 10(10D) के तहत छूट नहीं मिलती, उन्हें अब ‘कैपिटल एसेट' माना जाएगा. ऐसे में उनसे मिलने वाला मुनाफा कैपिटल गेंस के रूप में टैक्सेबल होगा. यह स्पष्टता इसलिए जरूरी थी क्योंकि 2021 में ₹2.5 लाख से ज्यादा प्रीमियम वाले ULIP पर टैक्स लगाने के बाद भ्रम की स्थिति बनी हुई थी.
4. सीनियर सिटीजन को ब्याज की कमाई पर बड़ी राहत
सीनियर सिटीजन के लिए बजट 2025 में अच्छी खबर सामने आई. ब्याज इनकम पर TDS की सीमा ₹50,000 से बढ़ाकर ₹1 लाख कर दी गई है. इसका मतलब यह है कि अब बैंक एफडी या अन्य ब्याज से सालाना ₹1 लाख तक की इनकम पर TDS नहीं कटेगा. इससे बुजुर्गों को कैश फ्लो में राहत मिलेगी और रिफंड की झंझट भी कम होगी.
5. डिविडेंड इनकम पर TDS सीमा दोगुनी
छोटे निवेशकों को राहत देते हुए सरकार ने डिविडेंड इनकम पर TDS की सीमा ₹5,000 से बढ़ाकर ₹10,000 कर दी है. यानी अगर किसी व्यक्ति को साल भर में ₹10,000 तक का डिविडेंड मिलता है, तो उस पर TDS नहीं कटेगा. इस बदलाव से खासतौर पर छोटे शेयरहोल्डर्स को फायदा देगा.
इनकम टैक्स से जुड़े ये बदलाव साफ संकेत देते हैं कि सरकार टैक्स सिस्टम को आसान और टैक्सपेयर्स के अनुकूल बनाना चाहती है. अगर आप सैलरीड एम्प्लॉई हैं, सीनियर सिटीजन हैं या निवेश करते हैं, तो 2025 के ये नियम आपकी टैक्स प्लानिंग में अहम भूमिका निभाएंगे. सही जानकारी और समय पर योजना बनाकर आप इन बदलावों का पूरा फायदा उठा सकते हैं.














