अपना Mutual Fund Portfolio कैसे बनाएं? आसान भाषा में समझें सही स्टेटर्जी

Mutual Fund Portfolio: अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए बड़े काम का साबित हो सकता है. आइए जानते हैं म्यूचुअल फंड का पोर्टफोलियो कैसे बनाएं और इसके लिए सही रणनीति क्या होगी.

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म्यूचुअल फंड का पोर्टफोलियो कैसे बनाएं?

Mutual Fund Portfolio: म्यूचुअल फंड आज निवेश का एक पॉपुलर और आसान तरीका बन चुका है. इसमें कम रकम से शुरुआत की जा सकती है, अलग-अलग सेक्टर और एसेट क्लास में निवेश का मौका मिलता है और जोखिम को बांटने यानी डाइवर्सिफिकेशन का फायदा भी मिलता है. लेकिन नए निवेशकों के मन में सबसे पहला सवाल यही आता है कि पोर्टफोलियो की शुरुआत कैसे करें? अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सोच रहे हैं, तो ये आर्टिकल आपके लिए बड़े काम का साबित हो सकता है. आइए जानते हैं म्यूचुअल फंड का पोर्टफोलियो कैसे बनाएं और इसके लिए सही रणनीति क्या होगी. 

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कैसे बनाएं म्यूचुअल फंड का पोर्टफोलियो?

एक साथ बड़ी रकम न लगाएं

अगर आप पहली बार म्यूचुअल फंड में निवेश कर रहे हैं या फिक्स्ड डिपॉजिट जैसे सुरक्षित विकल्पों से पैसा निकालकर आ रहे हैं, तो सबसे पहले पूरी रकम एक साथ निवेश करने से बचें. इससे अलग- 

  • स्टेप-बाय-स्टेप निवेश करें
  • बाजार को समझने के लिए समय दें और
  • अपनी जोखिम क्षमता को परखें.

धीरे-धीरे निवेश करने से बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम पड़ता है.

SIP से करें शुरुआत

नए निवेशकों के लिए सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (SIP) सबसे बेहतर तरीका माना जाता है. SIP में-

  • हर महीने तय रकम निवेश होती है.
  • बाजार गिरने पर ज्यादा यूनिट मिलती हैं.
  • औसत लागत (रुपी कॉस्ट एवरेजिंग) का फायदा मिलता है और 
  • निवेश में अनुशासन आता है.

लंबी अवधि में SIP बेहतर रिटर्न की संभावना बढ़ा सकता है.

एसेट एलोकेशन है सफलता की कुंजी

सिर्फ एक ही फंड में पैसा लगाना समझदारी नहीं है. निवेश को अलग-अलग एसेट क्लास में बांटना जरूरी है. जैसे- 

  • आप अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड (शेयर बाजार आधारित)
  • डेट फंड (बॉन्ड/फिक्स्ड इनकम)
  • गोल्ड फंड
  • अंतरराष्ट्रीय फंड (जरूरत के अनुसार) शामिल कर सकते हैं.

इसे एसेट एलोकेशन कहते हैं और इसमें जोखिम थोड़ा कम होता है. 

किस फंड से करें शुरुआत?

अगर आपकी उम्र कम है और निवेश का लक्ष्य 7 साल या उससे ज्यादा है, तो आप इक्विटी फंड में ज्यादा हिस्सा रख सकते हैं. अगर आप कम जोखिम चाहते हैं, तो आपके लिए डेट फंड या मल्टी-एसेट फंड बेहतर ऑप्शन हो सकते हैं.

आप डायवर्सिफाइड इक्विटी फंड से, इंडेक्स फंड (निफ्टी 50 / सेंसेक्स आधारित) से या मल्टी-एसेट फंड से शुरुआत कर सकते हैं. इंडेक्स फंड में फंड मैनेजर के फैसलों का जोखिम कम होता है और खर्च (Expense Ratio) भी कम होता है.

मिड कैप और स्मॉल कैप में सावधानी

मिड कैप और स्मॉल कैप फंड में रिटर्न की संभावना ज्यादा होती है, लेकिन उतार-चढ़ाव भी ज्यादा होता है. ऐसे में शुरुआत में इनसे बचना बेहतर है. आप अनुभव बढ़ने पर पोर्टफोलियो का छोटा हिस्सा इसमें लगा सकते हैं.

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इन बातों का भी रखें ध्यान 

इन तमाम बातों से अलग साल में कम से कम एक बार अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करें, लक्ष्य बदलने पर एसेट एलोकेशन में बदलाव करें और बाजार की खबरों के आधार पर बार-बार बदलाव करने से बचें. ध्यान रखें निवेश आपकी आय, खर्च, लक्ष्य और जोखिम सहन करने की क्षमता पर निर्भर करता है. ऐसे में कभी भी जल्दबाजी न करें, पहले पूरा प्लान बनाएं, SIP से शुरुआत करें, डाइवर्सिफिकेशन रखें और धैर्य बनाए रखें.

Disclaimer: म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन हैं. निवेश से पहले संबंधित दस्तावेजों को ध्यान से पढ़ें और आवश्यकता हो तो वित्तीय सलाहकार से परामर्श लें.

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