पहली बार इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) भरना कई लोगों के लिए मुश्किल हो सकता है, क्योंकि इसमें ITR-1 से लेकर ITR-7 तक कई तरह के फॉर्म होते हैं. हर फॉर्म के लिए अलग-अलग नियम और पात्रता होती है. अगर, आप गलत ITR फॉर्म चुन लेते हैं, तो आपकी रिटर्न प्रोसेस होने में देरी हो सकती है या फिर उसे खारिज भी किया जा सकता है. टैक्स एक्सपर्ट्स के मुताबिक, सही फॉर्म चुनने से पहले अपनी आय के प्रकार और स्रोत को समझना बहुत जरूरी है.
सही ITR फॉर्म क्यों जरूरी है?
इनकम टैक्स विभाग अलग-अलग तरह की आय के लिए अलग-अलग ITR फॉर्म तय करता है. जैसे सैलरी से कमाई, बिजनेस से कमाई, कंपनी, ट्रस्ट या पार्टनरशिप से आय आदि. इन सभी के लिए अलग फॉर्म होता है. अगर, कोई व्यक्ति गलत फॉर्म भर देता है, तो उसकी रिटर्न में गलती मानी जाती है. ऐसे में उसे फिर से सही फॉर्म के साथ रिटर्न दाखिल करनी पड़ सकती है.
ITR-1- यह उन लोगों के लिए होता है, जिनकी इनकम सीधी होती है. आप ITR-1 भर सकते हैं अगर आपकी कुल सालाना आय 50 लाख रुपये से कम है, आपकी आय सैलरी या पेंशन से है, आपके पास सिर्फ एक ही घर है या अन्य स्रोतों से आय है, जैसे बैंक में जमा पर ब्याज, सेविंग अकाउंट का ब्याज और इनकम टैक्स रिफंड का ब्याज आदि.
ITR-2- अगर आपकी आय 50 लाख से अधिक है, एक से अधिक घर हैं, कैपिटल गेन यानी शेयर/म्युचुअल फंड या विदेश में संपत्ति है, तो यह फॉर्म भरें.
ITR-3- यह उन लोगों के लिए है जिनकी आय व्यवसाय या पेशे से है.
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ITR-4- यह अनुमानित योजना (Presumptive Taxation Scheme - 44AD/44ADA/44AE) के तहत आने वाले छोटे करदाताओं के लिए है.
ITR-5- यह उन संस्थाओं के लिए होता है, जैसे पार्टनरशिप फर्म, लिमिटेड लाइबिलिटी पार्टनरशिप, AOP (लोगों का समूह) और BOI (व्यक्तियों का समूह), को-ऑपरेटिव सोसाइटी और कुछ ट्रस्ट जो ITR-7 में नहीं आते.
ITR-6- सभी कंपनियों के लिए होता है, जैसे- देश की कंपनियां, विदेशी कंपनियां और कोई भी संस्था जिसे कानून के अनुसार कंपनी माना जाता है.
ITR-7- उन संस्थाओं के लिए होता है जो टैक्स में छूट लेती हैं, जैसे- चैरिटेबल और धार्मिक ट्रस्ट, राजनीतिक पार्टियां, स्कूल, कॉलेज, यूनिवर्सिटी और रिसर्च संस्थान और वे संस्थाएं जो आयकर एक्ट की खास धाराओं (139(4A), 139(4B), 139(4C), 139(4D)) के तहत आती हैं.














