Emergency Vehicles Traffic Rule: सड़क पर दौड़ती एम्बुलेंस सिर्फ एक वाहन नहीं होती, बल्कि उसके भीतर किसी की सांसें, किसी का भविष्य और किसी परिवार की उम्मीदें होती हैं. हाईवे या शहर की व्यस्त सड़कों पर जब एम्बुलेंस सायरन बजाती हुई आगे बढ़ती है, तो हर सेकंड की कीमत जान के बराबर होती है. इसी वजह से कानून और इंसानियत दोनों हमें यह जिम्मेदारी देते हैं कि हम उसे बिना देरी रास्ता दें, लेकिन अफसोस, जल्दबाजी, लापरवाही और गलत सोच के चलते कई बार लोग इस जिम्मेदारी को नजरअंदाज कर देते हैं और यही एक छोटी सी चूक किसी की जिंदगी पर भारी पड़ सकती है.
हाईवे और शहर की सड़कों पर एम्बुलेंस को विशेषाधिकार प्राप्त वाहन का दर्जा दिया गया है. मोटर वाहन अधिनियम के तहत इसे तुरंत रास्ता देना हर नागरिक का कर्तव्य है. ऐसा नहीं करने पर कानूनी कार्रवाई भी हो सकती है. हाईवे पर एंबुलेंस को रास्ता नहीं देने पर जुर्माना या फिर सजा भी हो सकती है.
एंबुलेंस को पास न देने पर क्या सजा है?
मोटर व्हीकल एक्ट के तहत अगर कोई वाहन चालक एंबुलेंस को जानबूझकर रास्ता नहीं देता, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है. ऐसे में 10,000 तक जुर्माना या फिर कोई वाहन बार-बार ऐसा करता पाया जाता है, तो वाहन चालक को 6 महीने तक की जेल भी हो सकती है. लाइसेंस निलंबित भी हो सकता है. शहरों और नेशनल हाईवे पर लगे सीसीटीवी कैमरे एंबुलेंस के सायरन और लोकेशन को ट्रैक कर दोषियों की पहचान करते हैं. इसके अलावा एंबुलेंस में लगे डैशबोर्ड कैमरे की फुटेज को सबूत मानकर पुलिस सीधे आपके घर ऑनलाइन चालान भेज सकती है.
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कब लागू होता है नियम?
- जब एंबुलेंस सायरन या फ्लैश लाइट के साथ चल रही हो
- ट्रैफिक जाम या हाईवे पर रास्ता रोके रखने पर
- रेड लाइट पर जगह न छोड़ने पर
एंबुलेंस दिखते ही बाईं ओर गाड़ी लगाकर रास्ता दें, अचानक ब्रेक न लगाएं और एंबुलेंस के पीछे चलकर फायदा उठाने की कोशिश न करें. अगर आप लाल बत्ती पर फंसे हैं, तो सावधानी से जगह बनाने की कोशिश करें, ताकि एंबुलेंस निकल सके.













