Delhi Govt Bans GPA for Property Registration: दिल्ली की अनधिकृत (कच्ची) कॉलोनियों में रहने वाले 9.5 लाख से ज्यादा मकान मालिकों के लिए बुधवार को बड़ी खबर आई. दिल्ली सरकार ने जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिये मकान के मालिकाना हक पर रोक लगा दी है, जिसके बाद अब रजिस्ट्री को लेकर कई सवाल खड़े हो रहे हैं. लोग असमंजस में हैं कि यदि अब GPA के जरिए संपत्तियों की खरीद-फरोख्त और सीधी रजिस्ट्री नहीं होगी, तो उनके मकानों की रजिस्ट्री आखिरकार कैसे होगी?
कच्ची कॉलोनी में ऐसे होगी पक्की रजिस्ट्री
इसका सीधा और कानूनी उपाय है- केंद्र सरकार की PM-UDAY योजना (Pradhan Mantri - Unauthorized Colonies in Delhi Awas Adhikar Yojana). इस योजना को दिल्ली सरकार ने इस तरह से लोगों के लिए पेश किया है, जिसने लाखों परिवारों की बड़ी टेंशन दूर कर दी है. अगर आप भी दिल्ली की ऐसी किसी कॉलोनी में रहते हैं, तो आपको इस योजना के तहत मालिकाना हक और रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया को विस्तार से समझ लेना चाहिए.
ये भी पढ़ें: दिल्ली में अब GPA-पावर ऑफ अटॉर्नी के आधार पर नहीं होगा प्रॉपर्टी का रजिस्ट्रेशन, नया नियम जान लें
क्या है PM-UDAY योजना?
ये योजना दिल्ली की नोटिफाइड अनधिकृत कॉलोनियों के निवासियों को उनकी संपत्ति पर कानूनी रूप से मालिकाना अधिकार (Awas Adhikar) देने के लिए साल 2019 में शुरू की गई थी.
- इस योजना के तहत निवासियों को 'कन्वेयंस डीड' (CD) या 'ऑथराइजेशन स्लिप' (AS) जारी की जाती है.
- एक बार यह दस्तावेज मिलने के बाद मकान मालिक अपनी संपत्ति को कानूनी रूप से बेच सकते हैं, दूसरे के नाम ट्रांसफर भी कर सकते हैं.
- यही नहीं, अभी और सुनिए... सबसे बड़ी बात ये है कि उस पर बैंकों से होम लोन या मॉर्गेज लोन भी ले सकते हैं.
स्टेप-बाय-स्टेप समझ लें आवेदन की पूरी प्रक्रिया
PM-UDAY के तहत मालिकाना हक पाने की पूरी प्रक्रिया को डिजिटल और पारदर्शी बनाया गया है. इसकी प्रक्रिया बहुत मुश्किल नहीं है.
- ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन: सबसे पहले आवेदक को PM-UDAY के आधिकारिक पोर्टल (pmuday.ncog.gov.in) पर जाना होगा. यहां आपको अपनी डिटेल डालकर रजिस्टर करना होगा.
- मोबाइल ऐप से भी सुविधा: गूगल प्ले स्टोर से PM-UDAY मोबाइल ऐप डाउनलोड कर सकते हैं. यहां भी आपको बेसिक डिटेल भरकर खुद को रजिस्टर करना होगा.
- GIS सर्वे: रजिस्ट्रेशन स्लिप मिलने के बाद डीडीए (DDA) अधिकृत (Empaneled) एजेंसी से अपनी संपत्ति का जीआईएस (GIS) सर्वे कराना होगा. इसके लिए डीडीए ने प्लॉट साइज के हिसाब से 800 रुपये से लेकर 2500 रुपये तक की अधिकतम फीस तय की है.
- दस्तावेज अपलोड करना: सर्वे पूरा होने के बाद आवेदक को पुराने दस्तावेज जैसे- पुराना रजिस्टर्ड जीपीए (GPA), एग्रीमेंट टू सेल (Agreement to Sell), पजेशन लेटर, बिजली का बिल, पैन और आधार कार्ड आदि स्कैन करके पोर्टल पर अपलोड करने होंगे.
- DDA की जांच और वेरिफिकेशन: इसके बाद डीडीए की टीम आपके दस्तावेजों की प्री-स्क्रूटनी करेगी और फील्ड सर्वे टीम मौके पर आकर संपत्ति का फिजिकल वेरिफिकेशन (Physical Verification) करेगी.
- भुगतान और रजिस्ट्री: सब कुछ सही पाए जाने पर पोर्टल पर पेमेंट लिंक जेनरेट हो जाएगा. निर्धारित शुल्क जमा करने के बाद डीडीए अधिकारी कन्वेयंस डीड (CD) या ऑथराइजेशन स्लिप (AS) निष्पादित करेंगे.
अब सबसे महत्वपूर्ण बात- डीडीए अधिकारी की ओर से डीड जारी होने के बाद आवेदक को 3 महीने के भीतर सब-रजिस्ट्रार (Sub-Registrar) कार्यालय में जाकर इसे रजिस्टर कराना अनिवार्य है. यदि 3 महीने के भीतर रजिस्ट्री नहीं कराई गई, तो वह डीड शून्य (Invalid) हो सकती है.
3 किस्त में पेमेंट की सुविधा, 2 किस्त पर मालिकाना हक
इस योजना में मालिकाना हक देने के लिए बहुत ही नाममात्र का चार्ज रखा गया है, जो संपत्ति के कॉर्पेट एरिया और संबंधित इलाके के सर्किल रेट पर निर्भर करता है. हालांकि सर्किल रेट एरिया के हिसाब से चार्ज तय करता है. 100 वर्ग मीटर से छोटे मकानों के लिए सर्किल रेट के बेहद मामूली हिस्से के आधार पर चार्ज तय होता है. इसके अलावा, लोगों को राहत देने के लिए डीडीए ने इस शुल्क को तीन समान किस्तों में चुकाने का विकल्प भी दिया है. दो किस्तें जमा होने पर प्रोविजनल अधिकार और पूरा भुगतान होने पर स्थायी मालिकाना हक मिल जाता है.
ये भी पढ़ें: मोबाइल-लैपटॉप हो सकते हैं सस्ते! सरकार ने इन चीजों पर कस्टम ड्यूटी माफ की, मार्च 2029 तक मिलेगी छूट