दिल्ली से सिलीगुड़ी 6 घंटे में और वाराणसी सिर्फ 3.5 घंटे में, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट पर काम तेज, जानिए क्या होगा रूट मैप

केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बंगाल के लिए बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट का ऐलान किया. इस प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली को सिलीगुड़ी से जोड़ा जाएगा. यह ट्रेन लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी.

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दिल्ली से सिलीगुड़ी बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट
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केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज शनिवार को पश्चिम बंगाल के लिए एक नई बुलेट ट्रेन परियोजना की घोषणा की. इस प्रस्तावित बुलेट ट्रेन कॉरिडोर के जरिए दिल्ली को सिलीगुड़ी से जोड़ा जाएगा. यह ट्रेन लखनऊ, वाराणसी और पटना जैसे प्रमुख शहरों से होकर गुजरेगी. उन्होंने बताया कि इस बुलेट ट्रेन के शुरू होने के बाद दिल्ली से सिलीगुड़ी का सफर सिर्फ करीब 6 घंटे में पूरा हो सकेगा और वाराणसी के लिए 3.5 घंटे का समय लगेगा, जिससे यात्रियों का समय काफी बचेगा और यात्रा पहले से कहीं ज्यादा आसान हो जाएगी.

दरअसल, रेल मंत्रालय ने केंद्रीय बजट 2026-27 में देश को रफ्तार देने के लिए नए हाई-स्पीड रेल यानी बुलेट ट्रेन कॉरिडोर का ऐलान किया है. इस मेगा प्रोजेक्ट के तहत दिल्ली से वाराणसी और वाराणसी से सिलीगुड़ी (पश्चिम बंगाल) को जोड़ा जा रहा है, जिससे दिल्ली से सिलीगुड़ी का कुल सफर महज 6 से 7 घंटे में सिमट जाएगा. वहीं दिल्ली से वाराणसी की 800 किमी से अधिक की दूरी सिर्फ 3.5 घंटे में पूरी होगी.

दिल्ली-वाराणसी हाई-स्पीड कॉरिडोर

यह कॉरिडोर देश की राजधानी दिल्ली को सीधे उत्तर प्रदेश के वाराणसी से जोड़ेगा. इससे लगभग 865 किलोमीटर की दूरी, जो मौजूदा समय 8 से 11 घंटे के मुकाबले होती है वह इसके शुरू होने के बाद मात्र लगभग 3.5 घंटे में पूरी होगी.

स्टेशन और रूट मैप

यह दिल्ली के हजरत निजामुद्दीन से शुरू होकर नोएडा सेक्टर 146, जेवर एयरपोर्ट, मथुरा, आगरा, इटावा, कन्नौज, लखनऊ, रायबरेली, प्रतापगढ़, प्रयागराज और भदोही होते हुए वाराणसी (मंडुआडीह) तक जाएगा.

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दिल्ली से सिलीगुड़ी रूट मैप

जब कॉरिडोर पूरी तरह से बनकर तैयार हो जाएंगे, तो दिल्ली से सिलीगुड़ी करीब 1500 किमी का सफर बहुत कम समय में तय होगा. दिल्ली, नोएडा जेवर,  मथुरा, आगरा, इटावा, लखनऊ, प्रयागराज, वाराणसी, पटना (बिहार) और सिलीगुड़ी पश्चिम बंगाल तक रहेगा.

रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि पश्चिम बंगाल में रेलवे के विकास के लिए अब पहले से कहीं ज्यादा पैसा दिया जा रहा है. जहां UPA सरकार के समय करीब 4,000 करोड़ रुपये दिए जाते थे, वहीं अब मोदी सरकार ने इसे बढ़ाकर 14,205 करोड़ रुपये कर दिया है. उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में कई रेल परियोजनाएं पिछली सरकार की मंजूरी न मिलने के कारण अटक गई थीं।. कई मामलों में सिर्फ प्रशासनिक अनुमति की जरूरत थी, लेकिन वह भी नहीं मिल पाई और कुछ प्रोजेक्ट तो कोर्ट तक पहुंच गए.

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रेल मंत्री के अनुसार, पश्चिम बंगाल को कई अन्य राज्यों से पहले वंदे भारत स्लीपर और अमृत भारत ट्रेनें मिल चुकी हैं और आगे भी नए प्रोजेक्ट शुरू किए जाएंगे. कोलकाता मेट्रो को लेकर उन्होंने कहा कि पहले 42 साल में सिर्फ 28 किलोमीटर मेट्रो लाइन बनी थी, जबकि मोदी सरकार के दौरान 45 किलोमीटर नई मेट्रो लाइन तैयार की गई है. साथ ही अगले 5 साल में कोलकाता में 60 नई आधुनिक मेट्रो ट्रेनें (रैक) चलाई जाएंगी. इसके अलावा ईस्ट‑वेस्ट डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भी बनाया जाएगा, जो डानकुनी से सूरत तक कनेक्ट करेगा.

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