Budget 2026: इनकम टैक्स में बड़े बदलाव की तैयारी! क्या सरकार लाएगी 25% का नया टैक्स स्लैब? मिडिल क्लास को राहत देने के लिए इंडस्ट्री ने रखा बड़ा प्रस्ताव

Budget 2026 Income Tax Updates: इंडस्ट्री की मांग यह है कि टैक्स स्लैब ऐसी बनाई जाएं कि लोगों को अपनी बढ़ी हुई सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में न देना पड़े, बल्कि वे उसे खर्च कर सकें जिससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो.

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Budget 2026 Expectations: अगर 50 लाख तक की इनकम पर टैक्स स्लैब में राहत मिलती है, तो बजट 2026 को मिडिल क्लास के लिए बड़ा तोहफा माना जाएगा.
नई दिल्ली:

आम बजट 2026-27 को लेकर तैयारियां शुरू हो चुकी हैं. एक बार फिर मिडिल क्लास की निगाहें सरकार पर टिकी हैं. फरवरी 2026 में पेश होने वाले इस बजट (Union Budget 2026) से मिडिल क्लास को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है. पिछले बजट में न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) के तहत 12.75 लाख रुपये तक की इनकम को टैक्स-फ्री किया गया था. हाल ही में उद्योग जगत (PHDCCI) ने सरकार को एक ऐसा प्रस्ताव भेजा है, जो अगर मंजूर हो गया, तो 30 लाख से 50 लाख रुपये सालाना कमाने वालों की मौज आ जाएगी.

दरअसल, उद्योग जगत ने सरकार से मांग की है कि 30% की सबसे ऊंची टैक्स दर को 50 लाख रुपये से ज्यादा की इनकम पर लागू किया जाए.फिलहाल नई टैक्स व्यवस्था में 24 लाख रुपये से ज्यादा की कमाई पर सीधा 30% टैक्स लग जाता है. इंडस्ट्री का मानना है कि आज की महंगाई को देखते हुए 24 लाख रुपये को हाई इनकम(High Income) मानना गलत है. इससे मिडिल क्लास के पास बचत के लिए पैसे कम बचते हैं.

Budget 2026 से टैक्सपेयर्स को क्या उम्मीदें

हर साल बजट आने से पहले लोगों के मन में सबसे बड़ा सवाल यही रहता है कि क्या इस बार इनकम टैक्स में कोई राहत मिलेगी. महंगाई बढ़ रही है और रोजमर्रा का खर्च भी, इसलिए टैक्स स्लैब बदलने की मांग तेज हो गई है. अभी नई टैक्स व्यवस्था में 24 लाख रुपये से ज्यादा कमाने वालों पर 30% टैक्स लगता है, जिसे बहुत से लोग आज के समय में सही नहीं मानते.

इंडस्ट्री की नई मांग क्या है? 

उद्योग संगठन PHDCCI (पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री) ने वित्त मंत्रालय को बजट से पहले सुझाव भेजे हैं. इसमें व्यक्तिगत इनकम टैक्स स्ट्रक्चर में बड़ा बदलाव प्रस्तावित किया गया है. PHDCCI ने बजट से पहले अपने सुझाव में व्यक्तिगत आयकर प्रणाली (Personal income tax system) में बड़े बदलाव करने का प्रस्ताव रखा गया है, ताकि टैक्सपेयर्स को राहत मिल सके.

नया टैक्स स्ट्रक्चर कैसा हो? 

PHDCCI ने सुझाव दिया है कि टैक्स का बोझ इस तरह कम किया जाना चाहिए:

  • 30 लाख रुपये तक की इनकम: अधिकतम टैक्स दर 20%
  • 30 से 50 लाख रुपये की इनकम: टैक्स दर 25%
  • 50 लाख रुपये से ऊपर: 30% टैक्स स्लैब

अगर यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो लाखों टैक्सपेयर्स को सीधा फायदा मिल सकता है.

टैक्सपेयर्स को क्या फायदा होगा?

30 लाख तक की कमाई पर बड़ी राहत: अभी के नियमों के हिसाब से जैसे ही आपकी सैलरी बढ़ती है, टैक्स का रेट भी तेजी से बढ़ता है. इंडस्ट्री की मांग है कि जिसकी सालाना कमाई 30 लाख रुपये तक है, उससे 20% से ज्यादा टैक्स न लिया जाए. इससे मध्यम और हायर मिडिल क्लास के पास घर चलाने और निवेश के लिए ज्यादा पैसा बचेगा.

टैक्स का नया 'मिडिल स्लैब' (25%): अभी इनकम टैक्स में 20% के बाद सीधे 30% का टैक्स स्लैब आता है. डिमांड यह है कि 30 लाख से 50 लाख रुपये के बीच कमाने वालों के लिए एक बीच का रास्ता निकाला जाए और उन पर 25% टैक्स लगाया जाए. अभी इस ब्रैकेट में आने वाले लोग सीधे सबसे ऊंचे टैक्स रेट (30%) की मार झेलते हैं.

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30% टैक्स सिर्फ 'अमीरों' के लिए: सबसे बड़ी मांग यह है कि 30% वाला सबसे ऊंचा टैक्स रेट केवल उन लोगों पर लगे जिनकी सालाना कमाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है. अभी यह रेट 24 लाख रुपये (New Tax Regime) के बाद ही शुरू हो जाता है. इंडस्ट्री का तर्क है कि 24-25 लाख रुपये कमाने वाला व्यक्ति आज की महंगाई में 'अमीर' की कैटैगरी में नहीं आता, इसलिए उस पर 30% का बोझ डालना ठीक नहीं है.

उद्योग जगत का कहना है कि महंगाई बढ़ने के बावजूद कई सालों से पर्सनल टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. 24 लाख रुपये की इनकम को “हाई इनकम” मानकर 30% टैक्स लगाना अब व्यावहारिक नहीं लगता. इससे मिडिल क्लास पर जरूरत से ज्यादा बोझ पड़ता है.

PHDCCI का तर्क है कि कम टैक्स दरें टैक्स कलेक्शन घटाती नहीं हैं, बल्कि बढ़ाती हैं. इसके लिए उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स का उदाहरण दिया, जिसे 25% करने के बाद भी सरकार की इनकम बढ़ी.आंकड़ों के मुताबिक  2018-19 में कॉरपोरेट टैक्स कलेक्शन था 6.63 लाख करोड़ रुपये, जो 2024-25 में बढ़कर 8.87 लाख करोड़ रुपये हो गया.

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मिडिल क्लास पर सबसे ज्यादा बोझ 

एक्सपर्ट का कहना है कि अगर 30% वाला स्लैब 50 लाख के पार जाता है, तो लोगों के हाथ में खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचेगा. इससे बाजार में रौनक आएगी और देश की इकोनॉमी मजबूत होगी. अभी स्थिति को लेकर चैंबर का कहना है कि सरचार्ज और सेस जोड़ने के बाद कई टैक्सपेयर्स को करीब 39% तक टैक्स देना पड़ता है. यानी कमाई का सिर्फ 60% हिस्सा ही खर्च या बचत के लिए बचता है. विकसित देशों की तुलना में यह बोझ कहीं ज्यादा माना जा रहा है.

हालांकि सरकार ने पिछले कुछ सालों में न्यू टैक्स रिजीम को काफी आसान बनाया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि पूरी तरह 30% स्लैब को 50 लाख तक ले जाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है. लेकिन, सरचार्ज में कटौती की उम्मीद जरूर की जा सकती है. इंडस्ट्री की मांग यह है कि टैक्स स्लैब ऐसी बनाई जाएं कि लोगों को अपनी बढ़ी हुई सैलरी का एक बड़ा हिस्सा टैक्स में न देना पड़े, बल्कि वे उसे खर्च कर सकें जिससे देश की अर्थव्यवस्था को फायदा हो.

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मैन्युफैक्चरिंग और GST पर भी सुझाव 

सिर्फ पर्सनल टैक्स ही नहीं, इंडस्ट्री ने फैक्ट्रियों के लिए 15% कॉरपोरेट टैक्स को फिर से लाने,TDS और TCS नियमों में सुधार और GST ऑडिट को और आसान बनाने के लिए फेसलेस ऑडिट और ITC ट्रांसफर की सुविधा की भी वकालत की है. अब सबकी निगाहें वित्त मंत्री पर हैं कि क्या वो 2026 के इस पिटारे से मिडिल क्लास के लिए कोई बड़ा सरप्राइज निकालती हैं.

फिलहाल सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है. लेकिन बढ़ती महंगाई और इंडस्ट्री के दबाव को देखते हुए टैक्स राहत की उम्मीद जरूर बढ़ी है. अगर 50 लाख तक की इनकम पर टैक्स स्लैब में राहत मिलती है, तो बजट 2026 को मिडिल क्लास के लिए बड़ा तोहफा माना जाएगा.

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