AI Summit 2026: नौकरियां छीनने वाला AI, नौकरियां देने वाला कैसे बनेगा? बहुत काम आएगी ये जानकारी

AI Summit 2026: अक्सर कहा जाता है कि AI लोगों से उनकी नौकरियां छीन लेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से अब लोगों की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है और ये पहलू थोड़ा ज्यादा मजबूत है. आइए समझते हैं इस बारे में-

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नौकरियां छीनने वाला AI, नौकरियां देने वाला कैसे बनेगा?

AI Summit 2026: राजधानी दिल्ली में 16 फरवरी से 'AI इम्पैक्ट समिट' शुरू होने जा रहा है. इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों, ब्राजील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा जैसे कई विश्व नेता शामिल होंगे. साथ ही सुंदर पिचाई, सैम ऑल्टमैन, जेन्सेन हुआंग, बिल गेट्स और कई बड़े टेक कंपनियों के CEO भी इसमें हिस्सा लेंगे. ऐसे में ये साफ है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) अब केवल तकनीक का विषय नहीं रह गया है, बल्कि भविष्य की अर्थव्यवस्था और रोजगार से जुड़ा बड़ा मुद्दा बन चुका है. दुनिया के बड़े नेता और टेक कंपनियों के प्रमुख एक मंच पर इकट्ठा हो रहे हैं ताकि यह समझा जा सके कि AI को खतरे के रूप में नहीं, बल्कि अवसर के रूप में कैसे देखा जाए.

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अक्सर कहा जाता है कि AI लोगों से उनकी नौकरियां छीन लेगा. आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के आने से अब लोगों की जरूरत ही नहीं रह जाएगी. सब काम AI की मदद से आसानी से किए जा सकेंगे. ये तमाम बातें कुछ हद तक ठीक भी हैं. आसान भाषा में समझें, तो नई तकनीक आने पर पुराने काम बदलते हैं. जैसे-एटीएम आने के बाद बैंक टेलर की जरूरत कम हो गई, सेल्फ-चेकआउट मशीनों ने कैशियर की भूमिका कम दी या ऑनलाइन शॉपिंग से दुकानों का तरीका बदल गया. लोग अब दुकानों पर जानें की बजाय घर बैठे शॉपिंग करना ज्यादा पसंद करने लगे हैं.  इसी तरह AI भी कई काम ऑटोमेट कर रहा है, जिससे कुछ क्षेत्रों में बदलाव तय है. लेकिन तस्वीर का दूसरा पहलू भी है और ये पहलू थोड़ा ज्यादा मजबूत है. आइए समझते हैं इस बारे में- 

क्या कहती हैं रिपोर्ट?

विश्व आर्थिक मंच की रिपोर्ट के अनुसार, आने वाले सालों में जहां लाखों नौकरियां खत्म होंगी, वहीं उससे ज्यादा नई नौकरियां पैदा भी होंगी. 2025 तक 85 मिलियन नौकरियां खत्म होने का अनुमान है, लेकिन 97 मिलियन नई भूमिकाएं भी बनेंगी. यानी बदलाव होगा, लेकिन मौके भी बढ़ेंगे. AI खुद से काम नहीं करता है, उसे इंसान चलाते हैं. ऐसे में AI इंसानों की जगह नहीं ले सकता है. AI में इंसानों जैसी सोच, भावनाएं और नैतिक निर्णय लेने की क्षमता नहीं है. ये बस एक इक्विपमेंट है, जो इंसानों की क्षमता को बढ़ाता है. जैसे कैलकुलेटर ने गणितज्ञों को खत्म नहीं किया, बल्कि उनका काम आसान किया, वैसे ही AI भी काम की स्पीड और क्वालिटी दोनों बढ़ा सकता है. कई कंपनियों में AI के इस्तेमाल से प्रोडक्शन बढ़ा है और वर्कर्स का बोझ कम हुआ है.

PwC की रिपोर्ट के मुताबिक, 2030 तक AI वैश्विक अर्थव्यवस्था में 15.7 ट्रिलियन डॉलर जोड़ सकता है. लेकिन यह पैसा तभी बनेगा जब इंसान और मशीन मिलकर काम करेंगे. यानी भविष्य 'ह्यूमन + AI' का है, न कि 'ह्यूमन vs AI' का. इसे भी आसान भाषा में समझें तो डॉक्टर AI की मदद से जल्दी और सटीक जांच कर सकते हैं. किसान डेटा की मदद से बेहतर फसल उगा सकते हैं. छोटे व्यापारी AI टूल्स से अपने ग्राहकों को बेहतर सेवा दे सकते हैं. 

लेकिन इसके लिए सबसे जरूरी है नई स्किल सीखना. आने वाले सालों में आधे से ज्यादा कर्मचारियों को रीस्किलिंग और अपस्किलिंग करनी होगी. सरकारों और कंपनियों को ट्रेनिंग प्रोग्राम चलाने होंगे. स्कूल और कॉलेजों में भी डिजिटल और टेक स्किल्स पर ज्यादा ध्यान देना होगा.

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इस बात का रखें ध्यान 

AI न तो पूरी तरह खतरा है और न ही कोई जादू. यह एक मजबूत इक्विपमेंट है. अगर सही पॉलिसी बनें, नैतिक नियम तय हों और लोग नई स्किल सीखें, तो AI रोजगार कम नहीं करेगा, बल्कि आपको और बेहतर अवसर देगा. यानी भविष्य उन्हीं को होगा जो बदलाव को अपनाएंगे और उसके साथ खुद को अपग्रेड करने को तैयार होंगे. 

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