90 का दशक ऐसा दौर था, जब टेलीविजन पर आने वाले सीरियल लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन जाते थे. दोपहर में स्कूल से लौटने के बाद बच्चों को जहां खाने का इंतजार रहता था, वहीं घर के बड़े अपने पसंदीदा धारावाहिक का समय याद रखते थे. उस दौर में मनोरंजन के लिए आज की तरह ढेर सारे चैनल और ओटीटी प्लेटफॉर्म नहीं थे. दूरदर्शन पर आने वाले कार्यक्रम ही परिवार को एक साथ बैठने का मौका देते थे. इन्हीं सीरियलों में एक नाम ऐसा था, जिसने अपनी कहानी और दमदार महिला किरदार से दर्शकों के बीच खास जगह बनाई. इस शो का नाम था ‘शांति- एक घर की बुनियाद'.
पत्रकार बनकर अन्याय के खिलाफ खड़ी हुई थीं मंदिरा बेदी
साल 1994 में शुरू हुए इस धारावाहिक में मंदिरा बेदी ने शांति नाम की युवती का किरदार निभाया था. शांति एक पत्रकार थी, जो सच का पता लगाने और गलत काम करने वालों को बेनकाब करने का हौसला रखती थी. उसकी जिंदगी का मकसद सिर्फ अपना करियर बनाना नहीं, बल्कि अपनी मां के साथ हुए अन्याय की सच्चाई सामने लाना भी था.
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कहानी में शांति का सामना एक प्रभावशाली परिवार से होता है, जिसके अतीत में कई राज छिपे थे. उसकी मां तुलसी के साथ हुए अपराध ने पूरे परिवार की जिंदगी बदल दी थी. अपनी मां को इंसाफ दिलाने के लिए शांति उन लोगों के खिलाफ खड़ी होती है, जिनके पास ताकत और रसूख दोनों थे. इस संघर्ष में उसे कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह पीछे हटने के लिए तैयार नहीं होती.
शांति की बिंदी और अंदाज बन गया था पहचान
उस समय टेलीविजन पर महिला किरदार अक्सर पारिवारिक रिश्तों के इर्द-गिर्द नजर आते थे, लेकिन शांति की छवि उनसे अलग थी. वह अपने फैसले खुद लेती थी और जरूरत पड़ने पर ताकतवर लोगों से भी सवाल करती थी. मंदिरा बेदी ने इस भूमिका को जिस आत्मविश्वास के साथ निभाया, उससे उन्हें घर-घर में पहचान मिली. उनके माथे पर बनी तीर जैसी बिंदी भी शांति के लुक का खास हिस्सा बन गई थी. उनका अंदाज इतना लोकप्रिय हुआ कि दर्शकों के लिए मंदिरा बेदी को शांति के किरदार से अलग करके देखना मुश्किल हो गया. शो की कहानी में हर मोड़ के साथ नए रहस्य सामने आते थे, जो दर्शकों की दिलचस्पी बनाए रखते थे.
स्कूल से लौटते ही टीवी के सामने जम जाती थी महफिल
‘शांति' उस दौर के दर्शकों के लिए सिर्फ एक धारावाहिक नहीं था, बल्कि रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा था. स्कूल से लौटने वाले बच्चे हों या घर के काम निपटाती महिलाएं, इस शो के प्रसारण का समय कई लोगों को याद रहता था. इसकी कहानी ने परिवार, रिश्तों, अन्याय और महिला आत्मनिर्भरता जैसे विषयों को मनोरंजक अंदाज में सामने रखा.
आज मनोरंजन के इतने विकल्प मौजूद हैं कि दर्शक अपनी पसंद के कार्यक्रम कभी भी देख सकते हैं. इसके बावजूद 90 के दशक के ऐसे धारावाहिकों की यादें लोगों के दिलों में बसी हुई हैं. ‘शांति' भी उन्हीं शोज में शामिल है, जिसकी चर्चा होते ही उस दौर का टेलीविजन और परिवार के साथ बैठकर सीरियल देखने वाले दिन याद आ जाते हैं.
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