ALS (एमियोट्रोफिक लेटरल स्केलेरॉसिस) से पीड़ित ब्रैड स्मिथ अब फिर से बोल पा रहे हैं. यह पॉसिबल हुआ Neuralink के ब्रेन इम्प्लांट और AI वॉइस क्लोनिंग तकनीक की मदद से. ब्रैड स्मिथ को 37 साल की उम्र में ALS बीमारी का पता चला था. यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर की मांसपेशियों को कमजोर कर देती है, जिससे व्यक्ति चलने-फिरने और बोलने की क्षमता खो देता है. ब्रैड के साथ भी ऐसा ही हुआ और कुछ समय बाद वह पूरी तरह बोलने में असमर्थ हो गए.
हालांकि उनकी सोचने-समझने की क्षमता बिल्कुल सामान्य थी. पहले वह अपनी बात कहने के लिए आई-ट्रैकिंग सिस्टम का इस्तेमाल करते थे, लेकिन यह तरीका धीमा, थकाने वाला और कई बार सही काम नहीं करता था.
Neuralink इम्प्लांट कैसे करता है काम?
ब्रैड स्मिथ उन शुरुआती लोगों में से एक हैं, जिन्हें Neuralink का ब्रेन इम्प्लांट लगाया गया. यह छोटा-सा डिवाइस दिमाग के उस हिस्से में लगाया जाता है, जो शरीर की गतिविधियों को कंट्रोल करता है. इसमें बेहद पतले तार होते हैं, जो दिमाग के सिग्नल को पढ़ते हैं. इस इम्प्लांट की मदद से ब्रैड अब सिर्फ अपने दिमाग के जरिए कंप्यूटर कर्सर को कंट्रोल कर सकते हैं.
ब्रैड स्मिथ के मुताबिक वह दिमाग में कुछ हरकतों की कल्पना करते हैं, जैसे जीभ हिलाना, जिससे कर्सर मूव करता है. वहीं, जबड़ा कसने की कल्पना 'क्लिक' का काम करती है. इस तरह वह बिना हाथ-पैर हिलाए टाइप कर सकते हैं, वीडियो एडिट कर सकते हैं और डिजिटल डिवाइस का इस्तेमाल कर सकते हैं.
AI ने वापस दिलाई असली आवाज
इस तकनीक का सबसे खास हिस्सा है AI वॉइस क्लोनिंग, जिसने ब्रैड की आवाज को फिर से जिंदा कर दिया. AI मॉडल को उनकी पुरानी आवाज की रिकॉर्डिंग से ट्रेन किया गया है. अब जब ब्रैड कुछ टाइप करते हैं, तो वही टेक्स्ट उनकी असली जैसी आवाज में बदल जाता है. इससे बातचीत ज्यादा नैचुरल और इमोशनल लगती है, ना कि किसी रोबोट की तरह.
ब्रैड के अनुसार, यह बदलाव उनकी जिंदगी के लिए 'गेम चेंजर' साबित हुआ है. अब वह अपने बच्चों के साथ खेल सकते हैं, परिवार से बात कर सकते हैं और रोजमर्रा की जिंदगी में फिर से शामिल हो पाए हैं.
Elon Musk ने क्या कहा?
Elon Musk ने इस उपलब्धि पर कहा कि तकनीक का असली उद्देश्य लोगों की जिंदगी को बेहतर बनाना होना चाहिए. Neuralink इसी दिशा में काम कर रहा है, जहां गंभीर बीमारियों से जूझ रहे लोगों को फिर से जीवन जीने का मौका मिल सके.














