भारत में बढ़ते साइबर अपराध और 'डिजिटल अरेस्ट' जैसे खतरों से निपटने के लिए सरकार अब एक क्रांतिकारी कदम उठाने जा रही है. गृह मंत्रालय (MHA) ने इसके लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है. ये समिति बैंकिंग और यूपीआई (UPI) ऐप्स के लिए 'किल स्विच' (Kill Switch) फीचर लाने पर विचार कर रही है. यह फीचर ऑनलाइन वित्तीय धोखाधड़ी की स्थिति में यूजर्स के लिए सुरक्षा कवच का काम करेगा.
क्या है 'किल स्विच' और यह कैसे काम करेगा?
'किल स्विच' आपके बैंक खाते या डिजिटल वॉलेट के लिए एक इमरजेंसी बटन की तरह है. ये लोगों को संदिग्ध लेनदेन से त्वरित सुरक्षा देगा, नुकसान से बचाएगा और साइबर हेल्पलाइन तक पहुंच के लिए समय देगा.
- तुरंत सुरक्षा: यदि किसी यूजर को लगता है कि वह स्कैम का शिकार हो रहा है या उसके खाते से संदिग्ध लेनदेन हो रहा है, तो वह इस बटन को दबाकर तुरंत सभी ट्रांजैक्शन ब्लॉक कर सकता है.
- नुकसान पर लगाम: स्कैमर्स अक्सर डिवाइस का रिमोट एक्सेस पाकर या लिंक के जरिए पैसे उड़ाते हैं. यह फीचर जालसाजों को पैसे ट्रांसफर करने से रोक देगा.
- समय की बचत: लेनदेन रुकने के बाद यूजर को साइबर हेल्पलाइन या बैंक से संपर्क करने का समय मिल जाएगा, जिससे बड़ी चपत लगने से बचा जा सकेगा.
सरकार की नई रणनीति
फिलहाल साइबर अपराधियों को पकड़ना एक बड़ी चुनौती है क्योंकि कई स्कैम्स विदेशों से संचालित होते हैं. ऐसे में सरकार का ध्यान अब 'प्रिवेंशन' (रोकथाम) पर है. अपराधियों को पकड़ने से पहले, सरकार का लक्ष्य यूजर्स को ऐसे तकनीकी हथियार देना है जिससे वे खुद अपने पैसे को सुरक्षित रख सकें.
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