Apple ने बिना अपने AI के कमा डाले ₹7000 करोड़! देखते रह गए मार्क जकरबर्ग और एलन मस्क

अगर पूरे साल की बात करें, तो सिर्फ 2025 में ही Apple ने GenAI ऐप्स से लगभग 900 मिलियन डॉलर (करीब ₹7000 करोड़) की कमाई कर ली. यह दिखाता है कि AI ऐप्स पर लोगों का भरोसा और खर्च दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं.

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आज के समय में AI का ट्रेंड तेजी से बढ़ रहा है और इसी ट्रेंड का फायदा Apple भी उठा रहा है. खास बात यह है कि Apple ने अभी तक अपना कोई बड़ा AI चैटबॉट लॉन्च नहीं किया है, फिर भी कंपनी इस AI बूम से खूब पैसा कमा रही है. यह कमाई सीधे AI बनाने से नहीं, बल्कि अपने App Store के जरिए हो रही है, जहां अलग-अलग AI ऐप्स लोगों द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हैं.

रिपोर्ट के मुताबिक, 2025 में Apple के App Store पर मौजूद जनरेटिव AI (GenAI) ऐप्स से कमाई में बहुत बड़ा उछाल देखा गया. साल की शुरुआत में हर महीने लगभग 35 मिलियन डॉलर की कमाई हो रही थी, जो अगस्त तक बढ़कर 101 मिलियन डॉलर तक पहुंच गई. बाद में इसमें थोड़ी गिरावट जरूर आई, लेकिन कुल मिलाकर ग्रोथ काफी मजबूत रही.

अगर पूरे साल की बात करें, तो सिर्फ 2025 में ही Apple ने GenAI ऐप्स से लगभग 900 मिलियन डॉलर (करीब ₹7000 करोड़) की कमाई कर ली. यह दिखाता है कि AI ऐप्स पर लोगों का भरोसा और खर्च दोनों तेजी से बढ़ रहे हैं.

इस कमाई में सबसे बड़ा योगदान ChatGPT का है. रिपोर्ट के अनुसार, ChatGPT अकेले ही Apple की GenAI ऐप्स से होने वाली कमाई का लगभग 75% हिस्सा दे रहा है यानी ज्यादातर यूजर्स AI ऐप्स में ChatGPT पर ही पैसा खर्च कर रहे हैं. वहीं, दूसरे नंबर पर आने वाला Grok सिर्फ 5% योगदान दे पाया. इससे साफ पता चलता है कि AI मार्केट में अभी यूजर्स का ध्यान और भरोसा सबसे ज्यादा ChatGPT पर ही है.

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दरअसल, Apple की रणनीति बाकी कंपनियों से काफी अलग है. जहां OpenAI, Google और दूसरी कंपनियां AI मॉडल बनाने में अरबों डॉलर खर्च कर रही हैं, वहीं Apple प्लेटफॉर्म का फायदा उठा रहा है. iPhone आज भी करोड़ों लोगों के लिए AI ऐप्स तक पहुंचने का सबसे बड़ा जरिया है. इसका फायदा Apple को यह मिलता है कि हर सब्सक्रिप्शन या इन-ऐप खरीदारी पर उसे कमीशन मिलता है यानी बिना खुद AI बनाए भी Apple लगातार कमाई कर रहा है.

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हालांकि Apple पूरी तरह पीछे नहीं है. कंपनी अपनी वर्चुअल असिस्टेंट Siri को AI के साथ अपग्रेड करने की तैयारी में है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें Google के Gemini AI का इस्तेमाल हो सकता है, और इस पार्टनरशिप की कीमत करीब 1 बिलियन डॉलर सालाना हो सकती है.

Apple का फोकस क्लाउड AI की बजाय on-device AI पर है यानी iPhone के अंदर ही मौजूद डेटा और Apple के अपने चिप्स की मदद से AI फीचर्स दिए जाएंगे, जिससे यूजर्स की प्राइवेसी भी बनी रहे.

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