- पाकिस्तान के भारत से न खेलने पर ICC उस पर फाइन लगा सकता है और T20 वर्ल्ड कप के रेवेन्यू शेयर में कट भी संभव.
- इस फैसले से पाकिस्तान क्रिकेट की आर्थिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय साख दोनों को नुकसान होगा.
- PCB को करोड़ों रुपये का नुकसान होगा वो अलग, पहले से खस्ताहाल क्रिकेट बोर्ड की माली हालत और बदतर हो जाएगी.
पाकिस्तान ने टी20 वर्ल्ड कप में भारत से नहीं खेलने का यह फैसला अचानक नहीं आया. पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड और वहां की सरकार काफी समय से भारत के खिलाफ मैचों को ले कर असहज दिख रही थी. आधिकारिक वजह सुरक्षा और राजनीतिक हालात बताई जा रही है, लेकिन अंदर की कहानी इससे कहीं बड़ी है. असल में यह फैसला पाकिस्तान क्रिकेट की कमजोर होती हालत, लगातार हार और खाली होती तिजोरी की सच्चाई भी उजागर करता है. पाकिस्तान के इस फैसले से न सिर्फ टूर्नामेंट की कमाई प्रभावित होगी, बल्कि भविष्य में पाकिस्तान की आईसीसी इवेंट्स में स्थिति और विश्वसनीयता भी खतरे में पड़ सकती है.
भारत और पाकिस्तान के बीच कोई भी मैच सिर्फ खेल नहीं होता, वह भावनाओं, इतिहास और राजनीति से जुड़ा होता है. 2008 के बाद से दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सीरीज बंद है. सिर्फ ICC टूर्नामेंट में ही दोनों टीमें आमने सामने आती हैं. यही वजह है कि हर भारत पाकिस्तान मुकाबला दुनिया का सबसे ज्यादा देखा जाने वाला क्रिकेट मैच बन जाता है
इस बार भी ICC ने मैच भारत में नहीं बल्कि न्यूट्रल वेन्यू पर रखा था ताकि पाकिस्तान सुरक्षा को लेकर कोई बहाना न बने, फिर भी पाकिस्तान ने खेलने से मना कर दिया. इससे साफ है कि मामला सिर्फ जगह या सुरक्षा का नहीं है, बल्कि फैसला पूरी तरह राजनीतिक दबाव में लिया गया है.
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ICC क्या कार्रवाई कर सकता है?
भारत के साथ टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान का मैच नहीं खेलने का फैसला उस पर बड़ी जुर्माना लगाने का कारण बन सकता है. आईसीसी उसे कोड ऑफ कंडक्ट और प्लेइंग कंडीशन के तहत दोषी ठहरा सकता है. भारत के खिलाफ मैच के उसे दो पॉइंट तो गंवाने ही पड़ेंगे, साथ ही पाकिस्तान बोर्ड पर भारी आर्थिक जुर्माना भी लगाया जा सकता है. मीडिया रिपोर्ट्स और क्रिकेट नियमों के मुताबिक यह 5 से 10 मिलियन डॉलर (करीब 40 से 80 करोड़ रुपये) तक हो सकता है. इसके अलावा आईसीसी पाकिस्तान के टी20 वर्ल्ड कप के रेवेन्यू शेयर में कटौती भी करेगा और भविष्य के आईसीसी टूर्नामेंट्स में उसे बड़ा नुकसान भी उठाना पड़ सकता है.
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संबंध जोड़ने वाला क्रिकेट बना तनाव का नया हथियार
पिछले कुछ सालों में पाकिस्तान का भारत के खिलाफ रवैया और ज्यादा सख्त हुआ है. हर अंतरराष्ट्रीय मंच पर बयानबाजी बढ़ी है और क्रिकेट भी उसका शिकार बन गया है. भारत के खिलाड़ियों, मीडिया और आयोजनों के खिलाफ पाकिस्तान में अक्सर नकारात्मक माहौल बनाया जाता है, हालांकि पाकिस्तान में भारतीय खिलाड़ियों की बड़ी संख्या में फैंस भी मौजूद हैं.
2023 एशिया कप में पाकिस्तान टीम भारत नहीं गई, 2025 चैंपियंस ट्रॉफी को लेकर भी विवाद हुआ और अब सीधे टी20 वर्ल्ड कप में भारत से खेलने से इनकार कर दिया गया. यह सिलसिला बताता है कि पाकिस्तान खेल को रिश्ते सुधारने का जरिया बनाने की बजाय तनाव बढ़ाने का हथियार बना रहा है.
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टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का डरावना रिकॉर्ड
अगर मैदान की बात करें तो पाकिस्तान का भारत के खिलाफ टी20 रिकॉर्ड बेहद कमजोर रहा है. टी20 वर्ल्ड कप इतिहास में भारत ने पाकिस्तान को बार बार हराया है. 2007 से लेकर अब तक ज्यादातर मुकाबलों में भारत का पलड़ा भारी रहा है. 2007 टी20 वर्ल्ड कप फाइनल में भारत ने पाकिस्तान को हराकर पहली बार खिताब जीता. 2012, 2014, 2016 और 2022 में भी भारत ने पाकिस्तान को बड़े मुकाबलों में मात दी. पाकिस्तान की इकलौती बड़ी जीत 2021 दुबई में आई, जब उसने भारत को 10 विकेट से हराया, लेकिन वह जीत भी अपवाद बनकर रह गई.
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T20 में भारत के खिलाफ पाकिस्तान का रिकॉर्ड
आलम ये है कि किसी भी अन्य टीम से अधिक रिकॉर्ड 292 टी20 मुकाबले खेलने वाले पाकिस्तान ने इस फॉर्मेट में भारत के खिलाफ आज तक केवल 3 जीत ही दर्ज की है, 13 मैचों में उसे हार का सामना करना पड़ा है. असलियत यह है कि बड़े मंच पर दबाव झेलने में पाकिस्तान बार बार फेल हुआ है. भारतीय गेंदबाजों के सामने उसके बल्लेबाज घुटने टेकते रहे हैं और भारतीय बल्लेबाजों ने पाकिस्तानी गेंदबाजी को बार बार बेनकाब किया है.
क्रिकेट एक्सपर्ट मानते हैं कि पाकिस्तान का भारत से खेलने से भागना सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि मैदान में हार के डर से जुड़ा फैसला भी है. क्योंकि भारत के खिलाफ हार सिर्फ मैच हारना नहीं होता, वह पूरे देश में सवालों और आलोचनाओं का तूफान ले आती है.
पाकिस्तान का बद से बदतर प्रदर्शन
2024 टी20 वर्ल्ड कप में पाकिस्तान का प्रदर्शन बेहद शर्मनाक रहा. अमेरिका जैसी नई टीम से हार और ग्रुप स्टेज में बाहर होना पाकिस्तान क्रिकेट के लिए बड़ा झटका था. एशिया कप और टेस्ट सीरीज में भी टीम का ग्राफ लगातार नीचे गिरा है. पाकिस्तान सुपर लीग भी पहले जैसी चमक नहीं दिखा पा रही है. विदेशी खिलाड़ी पहले जैसी दिलचस्पी नहीं दिखाते और घरेलू क्रिकेट ढांचा कमजोर होता जा रहा है. नए खिलाड़ियों को मौका तो मिल रहा है, लेकिन उन्हें न तो सही मार्गदर्शन मिल रहा है और न ही स्थिर माहौल.
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PCB की अंदरूनी राजनीति और अराजकता
आज की पाकिस्तानी टीम अंदर से टूटी हुई नजर आती है. कप्तानी बदलती रहती है, चयन नीति पर सवाल उठते रहते हैं और खिलाड़ियों के बीच भरोसे की कमी दिखती है. कभी बाबर आजम कप्तान बनते हैं, फिर हटाए जाते हैं, फिर वापस लाए जाते हैं. यही हाल गेंदबाजों और कोचिंग स्टाफ का रहा है.
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की हालत भी टीम जैसी ही बदहाल है. हर सरकार के साथ PCB चेयरमैन बदल जाता है. हर नया चेयरमैन पुरानी योजनाएं खत्म करके नई शुरुआत करता है. इससे लंबे समय की रणनीति बन ही नहीं पाती. खुद पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर भी इसकी आलोचना कर चुके हैं.
पिछले कुछ सालों में PCB पर वित्तीय गड़बड़ियों, गलत नियुक्तियों और अनुबंधों में भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं. ऑडिट रिपोर्ट्स में करोड़ों रुपये की अनियमितताओं की बात सामने आई है. इसका असर सीधा खिलाड़ियों की सैलरी, घरेलू क्रिकेट और इंफ्रास्ट्रक्चर पर पड़ा है.
कुछ रिपोर्टों के अनुसार PCB ने प्रमुख खिलाड़ियों, जैसे बाबर आजम, मोहम्मद रिजवान और शाहीन अफरीदी समेत महिला टीम के खिलाड़ियों को कई महीनों तक वेतन नहीं दिया, जिससे आर्थिक अस्थिरता के संकेत मिले. क्रिकेट टीम की सुविधाओं में कटौती हुई और घरेलू टूर्नामेंटों का बजट घटाया गया. इससे खिलाड़ियों का भरोसा बोर्ड पर लगातार कमजोर हुआ है.
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खाली होती तिजोरी और डूबता ब्रांड पाकिस्तान क्रिकेट
पाकिस्तान क्रिकेट आज सिर्फ मैदान पर नहीं, बल्कि आर्थिक मोर्चे पर भी संघर्ष कर रहा है. PCB की आमदनी का बड़ा हिस्सा ICC इवेंट्स और भारत पाकिस्तान मैचों से आने वाले ब्रॉडकास्ट रेवेन्यू से जुड़ा होता है. भारत के खिलाफ एक मैच का मतलब करोड़ों डॉलर की कमाई होता है.
अब जब पाकिस्तान ने खुद इस मैच से दूरी बना ली है, तो यह सीधे उसकी जेब पर भारी पड़ेगा. ब्रॉडकास्टर्स, स्पॉन्सर्स और ICC सभी नाराज हैं. क्रिकेट इंडस्ट्री के जानकारों का कहना है कि पाकिस्तान यह फैसला लेकर खुद अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार रहा है क्योंकि उस पर बड़ा फाइन लग सकता है.
पाकिस्तान सुपर लीग की कमाई भी घट रही है. टिकट बिक्री कम हो रही है, स्पॉन्सर्स पीछे हट रहे हैं और टीवी व्यूअरशिप में गिरावट आई है. घरेलू क्रिकेट में निवेश कम होने से भविष्य के खिलाड़ियों का विकास भी प्रभावित हो रहा है.
बेतहाशा कर्ज में डूबे पाकिस्तान की आर्थिक हालत पहले ही कमजोर है और क्रिकेट बोर्ड पर सरकार की निर्भरता बढ़ती जा रही है. जब देश खुद आर्थिक संकट से जूझ रहा हो, तब क्रिकेट बोर्ड को बड़े पैकेज देना मुश्किल हो जाता है. इसका असर सीधे टीम की तैयारी, सुविधाओं और प्रदर्शन पर पड़ता है.
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ICC पर दबाव और क्रिकेट जगत में हलचल
पाकिस्तान के इस फैसले से ICC भी मुश्किल में पड़ गई है. भारत पाकिस्तान मैच ICC टूर्नामेंट्स का सबसे बड़ा आकर्षण होता है. इसी एक मुकाबले से टूर्नामेंट की टीआरपी, टिकट बिक्री और विज्ञापन दरें आसमान छू जाती हैं.
अब जब यह मैच नहीं होगा, तो पूरे टूर्नामेंट की ब्रॉडकास्ट वैल्यू घटने का खतरा है. ICC को डर है कि अगर देश राजनीतिक कारणों से चुनिंदा मैच खेलने से इनकार करने लगे, तो टूर्नामेंट की संरचना ही खतरे में पड़ जाएगी.
कई पूर्व क्रिकेटरों ने पाकिस्तान के इस फैसले को खेल की भावना के खिलाफ बताया है. उनका कहना है कि क्रिकेट को पुल बनाना चाहिए, दीवार नहीं. भारत और पाकिस्तान के बीच मैच बंद होने से नुकसान सिर्फ दोनों देशों को नहीं, बल्कि पूरे क्रिकेट जगत को होता है.
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फैंस की नाराजगी और निराशा
इस फैसले से सबसे ज्यादा नुकसान क्रिकेट फैंस को हुआ है. भारत और पाकिस्तान दोनों देशों में करोड़ों लोग इस मुकाबले का बेसब्री से इंतजार करते हैं. यह मैच सिर्फ खेल नहीं, बल्कि जश्न, जुनून और भावनाओं का संगम होता है.
सोशल मीडिया पर पाकिस्तानी फैंस भी अपनी टीम के फैसले से नाराज दिखे. कई लोगों ने लिखा कि हार के डर से मैदान छोड़ देना खेल की आत्मा के खिलाफ है. भारतीय फैंस ने भी इसे मुकाबले से भागने जैसा बताया.
कई पूर्व खिलाड़ियों ने खुलकर कहा कि अगर पाकिस्तान खुद को मजबूत मानता है, तो मैदान पर उतरकर साबित करे, न कि मैच से हटकर.
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क्या यह भारत से हार के डर की राजनीति है?
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि पाकिस्तान का यह फैसला सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि मनोवैज्ञानिक दबाव और डर का भी नतीजा है. भारत के खिलाफ हार का मतलब पाकिस्तान में मीडिया ट्रायल, खिलाड़ियों पर हमला और बोर्ड पर सवालों की बाढ़ आ जाना होता है.
ऐसे में मैच से हट जाना आसान रास्ता लगता है. लेकिन यह आसान रास्ता लंबे समय में पाकिस्तान क्रिकेट को और कमजोर ही करेगा. क्योंकि मजबूत टीम वही होती है जो दबाव में खेलना सीखती है, मैदान से भागती नहीं.
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भारत की चुप्पी
इस पूरे मामले पर भारत ने संयमित प्रतिक्रिया दी है. भारतीय क्रिकेट बोर्ड और सरकार की तरफ से कोई बयान नहीं आया.
भारतीय टीम फिलहाल मजबूत फॉर्म में है न्यूजीलैंड के खिलाफ बड़े रिकॉर्ड्स बनाए हैं और उसके पास युवा और अनुभवी खिलाड़ियों का बेहतरीन पूल है.
क्रिकेट जानकारों का मानना है कि भारत को इस फैसले से ज्यादा नुकसान नहीं होगा, क्योंकि भारत की टीम पहले से ही मजबूत है और टूर्नामेंट में उसके अन्य मुकाबले बड़े आकर्षण बने रहेंगे.
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पाकिस्तान क्रिकेट के भविष्य पर बड़ा सवाल
पाकिस्तान का भारत से खेलने से इनकार सिर्फ एक मैच नहीं रोक रहा, बल्कि यह उसके क्रिकेट भविष्य पर भी सवाल खड़े कर रहा है. अगर पाकिस्तान इसी तरह राजनीति, अस्थिर प्रशासन और कमजोर ढांचे में फंसा रहा, तो वह धीरे धीरे क्रिकेट के बड़े मंच से हाशिए पर चला जाएगा.
आज पाकिस्तान के पास न तो स्थिर बोर्ड है, न मजबूत घरेलू ढांचा और न ही खिलाड़ियों को भरोसा देने वाला सिस्टम. ऊपर से आर्थिक संकट और अंतरराष्ट्रीय अलगाव उसकी मुश्किलें और बढ़ा रहा है.
क्रिकेट जो कभी पाकिस्तान की पहचान और गर्व हुआ करता था, आज वही खेल उसके लिए बोझ बनता जा रहा है. मैदान पर जीत की जगह बहाने, रणनीति की जगह राजनीति और जुनून की जगह डर दिखने लगा है.
पाकिस्तान का टी20 वर्ल्ड कप में भारत के खिलाफ खेलने से इनकार उस गिरावट की कहानी है जिसमें राजनीति, डर, कमजोर प्रदर्शन और खाली होती तिजोरी सब शामिल हैं.
भारत पाकिस्तान मुकाबला क्रिकेट की जान रहा है. इसे खत्म करना क्रिकेट के साथ साथ करोड़ों फैंस की उम्मीदों को भी तोड़ना है. सवाल यह नहीं है कि पाकिस्तान ने यह फैसला क्यों लिया, सवाल यह है कि क्या वह कभी इस डर और गिरावट से बाहर निकल पाएगा या नहीं.
अगर पाकिस्तान क्रिकेट को फिर से जिंदा करना चाहता है, तो उसे मैदान से भागने की नहीं, मैदान में उतरकर लड़ने की आदत डालनी होगी. क्योंकि क्रिकेट इतिहास में वही टीमें याद रखी जाती हैं जो चुनौतियों से भिड़ती हैं, न कि उनसे बचती हैं.













