- सैंटियागो मार्टिन के परिवार के तीन सदस्य तीन अलग-अलग पार्टियों से चुनाव लड़कर तीनों ने जीत हासिल की
- लीमा रोज AIADMK से त्रिची जिले की लालगुडी सीट से जीतकर तमिलनाडु की सबसे अमीर विधायक बन गईं
- आधव अर्जुना TVK के टिकट पर चेननई की विल्लीवक्कम सीट से बड़ी मतों के अंतर से विजयी रहे
तमिलनाडु और पुडुचेरी की राजनीति में इस बार एक दिलचस्प तस्वीर उभरकर सामने आई है. साउथ के चुनावी मैदान में पहली बार उतरे ‘लॉटरी किंग' सैंटियागो मार्टिन के परिवार ने ऐसी बाजी मारी, जिस पर हर किसी की निगाह जाना लाजिमी था. यहां खास बात यह रही कि परिवार के तीन सदस्य तीन अलग-अलग राजनीतिक दलों के टिकट पर मैदान में उतरे और तीनों ने ही शानदार जीत दर्ज कर ली. एक ही घर से निकले चेहरे, अलग-अलग पार्टियों के झंडे तले अपनी जीत का परचम लहराया, इस चुनाव ने मार्टिन परिवार को अचानक सुर्खियों के केंद्र में ला खड़ा किया है.
राजनीति में लॉटरी किंग के परिवार का जलवा
‘लॉटरी किंग' सैंटियागो मार्टिन के परिवार ने चुनावी मैदान में पहली बार कदम रखा और तीनों ही उम्मीदवारों ने अलग-अलग पार्टियों से जीत दर्ज कर राजनीतिक हलकों में नई चर्चा छेड़ दी. मार्टिन की पत्नी लीमा रोज ने त्रिची जिले के लालगुडी सीट से AIADMK के टिकट पर 2,739 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. गौर करने वाली बात ये भी है कि 1,049 करोड़ की घोषित संपत्ति के साथ वह तमिलनाडु की सबसे अमीर उम्मीदवार थीं और अब राज्य की सबसे अमीर विधायक बन गई हैं.
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चेन्नई के विल्लीवक्कम में मार्टिन के दामाद आधव अर्जुना, जो विजय की तमिलगा वेट्री कझगम (TVK) के जनरल सेक्रेटरी (कैंपेन) हैं, इस चुनाव में उन्होंने 17,302 वोटों के अंतर से जीत दर्ज की. उन्होंने DMK और AIADMK उम्मीदवारों को शिकस्त दी. इस सीट पर उनका मुकाबला DMK के कार्तिक मोहन से था, जो कभी उनके साथ ही राजनीतिक टीम में काम कर चुके हैं. पड़ोसी केंद्रशासित प्रदेश पुडुचेरी में मार्टिन के बड़े बेटे जोस चार्ल्स मार्टिन ने कामराज नगर सीट से 10,205 वोटों के अंतर से जीत हासिल की. उन्होंने अपनी पार्टी लचिया जननायका काची (LJK) बनाई थी और AINRC-BJP गठबंधन के साथ चुनाव लड़ा था.
लालगुडी में लीमा रोज ने लहराया परचम
लालगुडी सीट DMK का बेहद ही मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, लेकिन लीमा रोज ने शुरुआत से ही बढ़त बनाए रखी. उन्होंने DMK के टी. परिवल्लाल और TVK के उम्मीदवार कुपा कृष्णन (पूर्व AIADMK मंत्री) को हराया. दिलचस्प बात यह रही कि लीमा का इस क्षेत्र से प्रत्यक्ष जुड़ाव नहीं था, वे देवकोट्टई की रहने वाली हैं और कोयंबटूर में रहती हैं. इसके बावजूद उन्होंने लालगुडी को जनसांख्यिकीय समीकरणों के आधार पर चुना, जहां उदयार और ईसाई वोटरों की अच्छी संख्या है. DMK ने उन्हें ‘बाहरी' बताकर प्रचार भी किया, लेकिन इसका असर नहीं पड़ा.
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विल्लीवक्कम में आधव को फायदा
आधव अर्जुना ने तीनों में सबसे कम 197 करोड़ की संपत्ति घोषित की थी. विल्लीवक्कम में उन्हें चुनाव प्रचार के दौरान कई अहम फैक्टर का फायदा मिला. उनके प्रतिद्वंद्वी कार्तिक मोहन को पड़ोसी अन्ना नगर में लंबे समय तक काम करने के बाद अचानक यहां से उतारा गया, जिससे उन्हें प्रचार के लिए कम समय मिला. साथ ही विजय की पेरंबुर क्षेत्र में हुई रैलियों का असर विल्लीवक्कम तक पहुंचा, जिससे आधव की स्थिति मजबूत हुई.
पुडुचेरी में जोस चार्ल्स का दांव सफल
जोस चार्ल्स मार्टिन शुरू में पुडुचेरी की 30 सीटों पर अकेले चुनाव लड़ना चाहते थे, लेकिन बाद में BJP ने उन्हें AINRC-BJP गठबंधन में शामिल कर लिया और दो सीटें आवंटित कीं. करीब 610 करोड़ की संपत्ति के साथ वह पुडुचेरी के सबसे अमीर उम्मीदवार थे. कामराज नगर सीट से उन्होंने लगभग 10 हजार वोटों के अंतर से जीत दर्ज की.
एक परिवार, तीन पार्टियां, तीन जीत
इस चुनाव में सैंटियागो मार्टिन का परिवार अलग-अलग राजनीतिक दलों का हिस्सा बनकर मैदान में उतरा और तीनों ने जीत हासिल की. पत्नी लीमा रोज AIADMK से, बेटे जोस चार्ल्स अपनी पार्टी LJK के साथ गठबंधन में, और दामाद आधव अर्जुना TVK से चुनाव लड़े. नतीजों ने इस परिवार को दक्षिण भारत की राजनीति में एक नई ताकत के रूप में स्थापित कर दिया है.














