मुख्यमंत्री पद से इस्तीफे के बाद सिद्धारमैया ने भावुक पोस्ट करते हुए अपने राजनीतिक सफर और विचारों को साझा किया. उन्होंने बताया कि राज्यपाल की अनुपस्थिति में उन्होंने राजभवन जाकर अपना इस्तीफा विशेष अधिकारियों को सौंप दिया.
पोस्ट में सिद्धारमैया ने लिखा कि एक गांव में जन्म लेकर उन्होंने कभी नहीं सोचा था कि वह विधायक, मंत्री, विपक्ष के नेता और दो बार मुख्यमंत्री बनेंगे. उन्होंने इस सफर का श्रेय बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान को दिया.
विचारधारा और संघर्ष का जिक्र
उन्होंने कहा कि बुद्ध, बसवन्ना, अंबेडकर और महात्मा गांधी उनके आदर्श रहे हैं. करीब चार दशकों के राजनीतिक जीवन में उन्होंने वंचित, शोषित और गरीब लोगों के लिए ईमानदारी से काम करने को अपनी सबसे बड़ी संतुष्टि बताया.
पार्टी और जनता का जताया आभार
सिद्धारमैया ने कांग्रेस नेतृत्व, सोनिया गांधी, राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के साथ-साथ पार्टी विधायकों, कैबिनेट सहयोगियों और कर्नाटक की जनता का आभार जताया. उन्होंने लिखा कि कन्नडिगा जनता ने ही उन्हें यहां तक पहुंचाया.
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'पद से इस्तीफा, राजनीति से नहीं'
उन्होंने साफ किया कि उनका इस्तीफा सिर्फ मुख्यमंत्री पद तक सीमित है, सक्रिय राजनीति से नहीं. उन्होंने कहा, 'संविधान ही मेरा धर्म है और जनता मेरी भगवान है.'
आखिरी सांस तक लड़ाई का संकल्प
सिद्धारमैया ने कहा कि वह आखिरी सांस तक सामाजिक न्याय के लिए और संविधान विरोधी तथा सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेंगे.














