
नई दिल्ली:
फिल्म 'शादी में जरूर आना' के कैरेक्टर सत्येंद्र यानि सत्तू (राजकुमार राव) और आरती (कीर्ति खरबंदा) की कहानी यूपी के शहर से है. इन दोनों के मां-बाप इनकी शादी के लिए इन्हें मिलवाते हैं और मिलते-मिलते इन्हें एक-दूसरे से प्यार हो जाता है लेकिन जैसे ही आरती के घर सत्तू की बारात पहुंचती है वैसे ही आरती शादी छोड़कर भाग जाती है. आरती की शादी से भागने की वजह जानने के लिए आपको फिल्म देखना होगा, क्योंकि भागने के बाद कई ट्विस्ट हैं.
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फिल्म 'शादी में जरूर आना' की कहानी दो भागों में है. इंटरवल से पहले के हिस्से में आरती और सत्तू का प्यार है. फिल्म में कहानी कानपुर की है और छोटे शहर के प्यार को अच्छे से दर्शाया गया है. शादी ब्याह का माहौल भी देखने में अच्छा लगता है. शादी से भागने के बाद एक पिता की बेबसी और गुस्सा पर्दे पर रियल लगता है और कहानी में कसाव है. दूसरे भाग में फिल्म सीरियस होती है मगर बोर नहीं करती. इंटरवेल के बाद सत्तू अब आरती से बदला लेना चाहता है. राजकुमार राव का अभिनय दमदार है वही आरती की भूमिका में कीर्ति खरबंदा अच्छी लगी हैं. फिल्म देखते समय लगता है की हम छोटे शहर की कहानी देख रहे हैं.
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इस फिल्म की कमज़ोर कड़ी की अगर बात करें तो वो है इसका क्लाइमेक्स. फिल्म की कहानी में आखरी के 10 से 15 मिनट में मेरे हिसाब से काफी गड़बड़ हो गयी. ऐसा लगा कि सत्तू और आरती को क्लाइमेक्स में मिलाने के चक्कर में काफी ड्रामा क्रिएट कर दिया गया.
इस फिल्म के निर्माता हैं विनोद बच्चन जिन्होंने 2 साल तक निर्माताओं से ठुकराए जाने के बाद फिल्म 'तनु वेड्स मनु' को प्रोड्यूस किया था. इस फिल्म कि कहानी भी 2 साल तक कई निर्माताओं से ठुकराए जाने के बाद विनोद बच्चन के हाथ में आई. इस बार भी उन्होने छोटे शहर कि कहानी को चुना है और इस फिल्म को महज़ 8.5 करोड़ के बजट में अच्छे से बनाया है.
रेटिंगः 3 स्टार
डायरेक्टरः रत्ना सिन्हा
कलाकारः राजकुमार राव, गोविंद नामदेव और कृति खरबंदा
VIDEO:
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फिल्म 'शादी में जरूर आना' की कहानी दो भागों में है. इंटरवल से पहले के हिस्से में आरती और सत्तू का प्यार है. फिल्म में कहानी कानपुर की है और छोटे शहर के प्यार को अच्छे से दर्शाया गया है. शादी ब्याह का माहौल भी देखने में अच्छा लगता है. शादी से भागने के बाद एक पिता की बेबसी और गुस्सा पर्दे पर रियल लगता है और कहानी में कसाव है. दूसरे भाग में फिल्म सीरियस होती है मगर बोर नहीं करती. इंटरवेल के बाद सत्तू अब आरती से बदला लेना चाहता है. राजकुमार राव का अभिनय दमदार है वही आरती की भूमिका में कीर्ति खरबंदा अच्छी लगी हैं. फिल्म देखते समय लगता है की हम छोटे शहर की कहानी देख रहे हैं.
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इस फिल्म की कमज़ोर कड़ी की अगर बात करें तो वो है इसका क्लाइमेक्स. फिल्म की कहानी में आखरी के 10 से 15 मिनट में मेरे हिसाब से काफी गड़बड़ हो गयी. ऐसा लगा कि सत्तू और आरती को क्लाइमेक्स में मिलाने के चक्कर में काफी ड्रामा क्रिएट कर दिया गया.
इस फिल्म के निर्माता हैं विनोद बच्चन जिन्होंने 2 साल तक निर्माताओं से ठुकराए जाने के बाद फिल्म 'तनु वेड्स मनु' को प्रोड्यूस किया था. इस फिल्म कि कहानी भी 2 साल तक कई निर्माताओं से ठुकराए जाने के बाद विनोद बच्चन के हाथ में आई. इस बार भी उन्होने छोटे शहर कि कहानी को चुना है और इस फिल्म को महज़ 8.5 करोड़ के बजट में अच्छे से बनाया है.
रेटिंगः 3 स्टार
डायरेक्टरः रत्ना सिन्हा
कलाकारः राजकुमार राव, गोविंद नामदेव और कृति खरबंदा
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