एक बार फिर बढ़ेगा पचपदरा रिफाइनरी का खर्च, 13 साल में 79 हजार करोड़ रुपये तक पहुंची लागत

रिफाइनरी का शिलान्यास 22 सितंबर 2013 को तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत की सरकार के वक्त में हुआ. इसी साल विधानसभा चुनाव के बाद सरकार बदल गई थी. इसके बाद साल 2018 में फिर से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया.

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पचपदरा रिफाइनरी को बाड़मेर के मंगला टर्मिनल और गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से जोड़ा गया है.

राजस्थान की बहुप्रतीक्षित पचपदरा रिफाइनरी का इंतजार एक बार फिर लंबा हो गया है. करीब 13 साल से तैयार हो रही इस महत्वाकांक्षी परियोजना का उद्घाटन सोमवार (20 अप्रैल) को होना था. लेकिन अंतिम समय में हुए हादसे ने पूरे कार्यक्रम को टाल दिया गया. पीएम नरेंद्र मोदी को इसका लोकार्पण करना था, उससे एक दिन पहले ही रिफाइनरी की मुख्य CDU यूनिट में आग लग गई. आग इतनी भीषण थी कि उसका धुआं 3-4 किलोमीटर दूर तक दिखाई दिया. 

मामले में जांच शुरू 

जिस यूनिट में आग लगी, वहीं से कुछ मीटर दूर प्रधानमंत्री का कार्यक्रम प्रस्तावित था. ऐसे में इस घटना ने सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. पेट्रोलियम मंत्रालय ने मामले की जांच के आदेश दे दिए हैं. शुरुआती जानकारी के अनुसार, हीट एक्सचेंजर यूनिट के एक वॉल्व से हाइड्रोकार्बन रिसाव होने से हादसा हुआ. 

2004 में शुरू हुई क्रूड ऑयल की खोज

साल 2004 में बाड़मेर के मंगला में क्रूड ऑयल की खोज शुरू हुई. इस फील्ड से साल 2009 में तेल उत्पादन शुरू हुआ. यहीं से रिफाइनरी बनाने की योजना शुरू हुई. 22 सितंबर 2013 को तत्कालीन सीएम अशोक गहलोत की सरकार के वक्त सोनिया गांधी ने रिफाइनरी का शिलान्यास किया था. प्रोजेक्ट की कीमत 37 हजार 230 करोड़ रुपए रखी गई है. हालांकि विधानसभा चुनाव के चलते 5 दिन बाद यानी 27 सितंबर से ही राज्य में आचार संहिता लग गई. इसके बाद राज्य में बीजेपी सरकार का गठन हुआ. 

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13 साल में प्रोजेक्ट की लागत हुई दोगुनी 

प्रधानमंत्री मोदी ने साल 2018 में फिर से इस प्रोजेक्ट का शुभारंभ किया, तब तक लागत बढ़कर 43 हजार करोड़ रुपए से अधिक हो चुकी थी. इसके बाद भी धीमी प्रगति, कोविड-19 और अन्य कारणों से काम प्रभावित हुआ. अब यह लागत बढ़कर करीब 79 हजार करोड़ रुपए तक पहुंच चुकी है. करीब 13 साल में इस परियोजना की लागत में करीब 42 हजार करोड़ रुपए की बढ़ोतरी हो चुकी है. विशेषज्ञों का मानना है कि प्रोजेक्ट की लागत में एक बार फिर इजाफा हो सकता है.

यह रिफाइनरी देश की सबसे बड़ी ग्रीनफील्ड इंटीग्रेटेड रिफाइनरी में से एक है, जिसकी सालाना क्षमता 9 मिलियन मीट्रिक टन है. इसे बाड़मेर के मंगला टर्मिनल और गुजरात के मुंद्रा पोर्ट से पाइपलाइन के जरिए जोड़ा गया है. इससे न केवल पेट्रोल-डीजल बल्कि बेंजीन, ब्यूटाडीन और पॉलीप्रोपाइलीन जैसे पेट्रोकेमिकल उत्पाद भी बनाए जा सकेंगे. 

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प्रोजेक्ट से बदल गई कई गांवों की तस्वीर

स्थानीय स्तर पर भी इस परियोजना ने बड़ा बदलाव लाया है. आसपास के गांवों में रोजगार के नए अवसर पैदा हुए हैं, सड़क और पानी जैसी सुविधाओं में सुधार हुआ है. लेकिन बार-बार हो रही देरी और अब यह हादसा लोगों की उम्मीदों पर पानी फेर रहा है.

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