Nuclear Energy Bill 2025: परमाणु ऊर्जा बिल पर सांसद हनुमान बेनीवाल का विरोध, लोकसभा में बोले- यह विधेयक राष्ट्रहित में नहीं

Rajasthan News: नागौर सांसद ने कहा कि परमाणु क्षेत्र में निजीकरण हमारे संवैधानिक सिद्धांतों, जनता की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही के सिद्धांतों में जड़ से बदलाव का प्रयास है.

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नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल.

Nagaur MP Hanuman Beniwal: नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने न्यूक्लियर एनर्जी सेक्टर में निजीकरण का विरोध जताया. लोकसभा में बुधवार (17 दिसंबर) को 'परमाणु ऊर्जा विधेयक-2025' पर चर्चा में बेनीवाल ने भाग लिया. उनके मुताबिक, यह परिवर्तन सिर्फ बाज़ार खोलने का प्रश्न नहीं, इसमें जोखिम की प्रकृति, लाइबिलिटी और निगरानी-संरचना पूरी तरह बदल जाएगी. आरएलपी संयोजक ने कहा कि यह विधेयक भारत के रूपांतरण का नहीं, बल्कि जोखिम के विस्तार का विधेयक है. देश की जनता को इस विधेयक पर गहरी शंका और सख्त आपत्ति है. क्योंकि सरकार की मंशा के दूसरे पहलू को देखेंगे तो यह सामने आएगा कि यह विधेयक केवल तकनीकी संशोधन नहीं, बल्कि यह हमारे संवैधानिक सिद्धांतों, जनता की सुरक्षा और सरकारी जवाबदेही के सिद्धांतों में जड़ से बदलाव का प्रयास है. सांसद ने कांग्रेस सरकार और अटल बिहारी वाजपेयी सरकार द्वारा किए गए परमाणु परीक्षण को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि वर्तमान एनडीए सरकार सार्वजनिक क्षेत्र के अधीन रहे नाभिकीय ऊर्जा पर निजी कंपनियों को खोलना चाह रही है. 

बेनीवाल ने खड़े किए सवाल

सांसद ने विधेयक को लेकर सरकार पर कई सवालिया निशान खड़े करते हुए कहा, "अगर निजीकरण की प्रक्रिया पारदर्शी, सख्त और जनता-हित की शर्तों पर न हो तो भारी कीमत चुकानी पड़ सकती है. इस विधेयक में देयता की सीमा और ऑपरेटर-उत्तरदायित्व जैसे प्रावधानों का नई तरह से निर्धारण हो रहा है. कई रिपोर्टों के अनुसार यह विधेयक इसलिए भी चिंता का विषय है, क्योंकि नाभिकीय दुर्घटनाएं स्थानीय ही नहीं, बल्कि क्षेत्रीय और पीढ़ियों पर असर डालती हैं. ऐसे बहुत-सीमांत जोखिमों के लिए सीमित लाइबिलिटी पीड़ितों के पुनर्वास और पर्यावरणीय सर्वनाश के समय अपर्याप्त साबित हो सकती है. 

नकली खाद-बीज का भी उठाया मुद्दा 

साथ ही राजस्थान समेत देशभर में नकली खाद-बीज और नकली कीटनाशक से कृषि के उत्पादन पर पड़ने वाले नकारात्मक प्रभाव की भी चर्चा की. उन्होंने कहा कि फसल नष्ट हो जाने की कई शिकायतें किसानों द्वारा प्रशासन के माध्यम से सरकारों तक पहुंचती है. लेकिन सरकार द्वारा आईसीएआर या किसी अन्य संस्थान के माध्यम से वैज्ञानिक अध्ययन ही नहीं करवाया जाता है. हनुमान बेनीवाल ने कहा कि नकली-खाद बीज को लेकर की गई कार्यवाही के संदर्भ में सरकारी आंकड़ों में जो कार्यवाही का विवरण दिया गया है, हकीकत में वो आंकड़े बहुत कम है.  

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