कोटा में ऑपरेशन से डिलीवरी के बाद दो मांओं ने तोड़ा दम, 4 की किडनी फेल, 2 डॉक्टरों पर गिरी गाज

कोटा के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल की चर्चा इस वक्त जयपुर से लेकर दिल्ली तक है. AIIMS और SMS अस्पताल के डॉक्टरों की खास टीम इस वक्त वहीं मौजूद है जो मरीजों को अटेंड करने के साथ-साथ ये पता लगाने में जुटी है कि सिजेरियन डिलीवरी के 6 महिलाओं की तबीयत कैसे बिगड़ी? इस खबर में पढ़ें अब तक की पूरी टाइमलाइन...

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कोटा के अस्पताल में प्रसूताओं की मौत के बाद भजनलाल सरकार ने बड़ा एक्शन लिया है.
NDTV Reporter

Rajasthan News: राजस्थान के कोटा स्थित न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) में सिजेरियन (C-Section) डिलीवरी के बाद प्रसूताओं की तबीयत बिगड़ने का मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है. सोमवार रात से शुरू हुए इस घटनाक्रम में शनिवार सुबह तक 6 प्रभावित प्रसूताओं में से 2 (पायल और ज्योति) की मौत हो चुकी है, जबकि 4 अन्य का इलाज नेफ्रोलॉजी और आईसीयू (ICU) वार्ड में चल रहा है. इस मामले में जहां परिजनों ने अस्पताल प्रशासन पर गलत दवा देने और मेडिकल फाइलें गायब करने के गंभीर आरोप लगाए हैं, वहीं जिला प्रशासन और मेडिकल कॉलेज के बयानों में विरोधाभास देखने को मिला है. राज्य सरकार ने मामले की हाई लेवल जांच शुरू कर दी है और जयपुर से विशेषज्ञों की टीम कोटा पहुंच चुकी है. आइए जानते हैं कि इस केस में अब तक क्या-क्या हुआ और इस वक्त कोटा के अस्पताल में कैसे हालात हैं...

9 मई 2026 के अपडेट्स

इस मामले में सरकार ने शनिवार सुबह बड़ी कार्रवाई की है. लापरवाही बरतने पर डॉक्टर नवनीत कुमार और दो नर्सों (गुरजौत कौर और निमेश वर्मा) को सस्पेंड कर दिया गया है. कॉन्ट्रैक्ट (UTB) पर काम कर रही डॉक्टर श्रद्धा उपाध्याय को तुरंत नौकरी से हटा दिया गया है. दो बड़े डॉक्टरों (यूनिट हेड डॉ. बीएल पटीदार और डॉ. नेहा सीहरा) को नोटिस देकर जवाब मांगा गया है कि उनकी देखरेख में इतनी बड़ी चूक कैसे हुई. सरकार ने साफ कर दिया है कि मरीजों की जान से खिलवाड़ करने वाले किसी भी कर्मचारी को बख्शा नहीं जाएगा और पूरे मामले की गहराई से जांच जारी है.

8 मई 2026 के अपडेट्स

मृतका ज्योति के घर पहुंचे लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला

कोटा मेडिकल कॉलेज की इस घटना ने जयपुर से लेकर दिल्ली तक हलचल मचा दी है. लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला इस मामले में सीधे तौर पर नजर बनाए हुए हैं. घटना की जानकारी मिलते ही वे पहले अस्पताल पहुंचे और फिर शुक्रवार (8 मई) देर रात अनंतपुरा की क्रेशर बस्ती में मृतका ज्योति के घर जाकर पीड़ित परिवार से मुलाकात की. उन्होंने पीड़ित परिवार को ढांढस बंधाया और हर संभव सहायता व दोषियों को सख्त सजा दिलाने का आश्वासन दिया. सोशल मीडिया पर अपना बयान साझा करते हुए स्पीकर ओम बिरला ने कहा, 'मेडिकल कॉलेज अस्पताल में दो प्रसूताओं की मृत्यु अत्यंत हृदय विदारक और दुखद है. आज क्रेशर बस्ती में पीड़ित परिवार से मिलकर गहरी संवेदना व्यक्त की. परिजनों को आश्वस्त किया है कि पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी.'

कांग्रेस ने बनाई 4 सदस्यीय जांच समिति, 3 दिन में मांगी रिपोर्ट

राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी (PCC) ने भी मामले में दखल देते हुए एक 4 सदस्यीय फैक्ट-फाइंडिंग समिति का गठन किया है. पीसीसी अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने समिति को तत्काल कोटा पहुंचकर तथ्यात्मक जांच करने के निर्देश दिए हैं. इस समिति के सदस्य में पूर्व मंत्री परसादी लाल मीणा, विधायक डूंगरराम गेदर, महासचिव व जिला कोटा प्रभारी पुष्पेन्द्र भारद्वाज और चिकित्सा प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष डॉ. विकास महला शामिल हैं. यह समिति 3 दिन के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट पीसीसी चीफ को सौंपेगी.

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7 मई 2026 के अपडेट्स

मेडिकल रिपोर्ट में खुलासा: प्रसूता रागिनी की किडनी पर असर

इटावा निवासी और वर्तमान में गंभीर हालत में भर्ती प्रसूता रागिनी (B+ ब्लड ग्रुप) की सोनोग्राफी रिपोर्ट में कई मेडिकल कॉम्प्लिकेशन सामने आई हैं. रिपोर्ट के अनुसार, रागिनी की दोनों किडनी में 'Increased Echogenicity' पाया गया है, जो सीधे तौर पर किडनी डैमेज या गंभीर इंफेक्शन की ओर इशारा करता है. इतना ही नहीं, पेट के भीतर खून जमा होना (Moderate Hemoperitoneum) और 'Blood on aspiration' (पेट से खून जैसा तरल मिलना) जैसे गंभीर लक्षण पाए गए हैं. रिपोर्ट में लिवर का बढ़ना (Hepatomegaly) भी दर्ज है, जिससे स्पष्ट है कि किसी जहरीले तत्व या गलत दवा ने शरीर के मुख्य अंगों पर सीधा हमला किया है.

रागिनी के पति लोकेश मीणा और भाई विकास मीणा ने बताया कि तीन बेटियों के बाद उनके घर बेटा हुआ था. उन्होंने अंदेशा जताया है कि रात में कोई गलत दवा दी गई, जिसके बाद यूरिन बंद होने जैसी शिकायतें शुरू हुईं.

परिजनों का आरोप: पुरानी फाइलें गायब की गईं

मृतका ज्योति (जिसने 4 मई को बेटे को जन्म दिया था) के पति रवि और अन्य परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया. परिजनों का सीधा आरोप है कि ऑपरेशन के बाद जब मरीज को पोस्ट-ऑपरेटिव वार्ड में शिफ्ट किया गया, तब उन्हें एक इंजेक्शन लगाया गया जिसके बाद तबीयत बिगड़ी. परिजनों ने आरोप लगाया, 'डॉक्टर अब नई पर्ची बनवाने को कह रहे हैं और पुरानी फाइलें गायब कर दी गई हैं. हम चाहते हैं कि पुरानी फाइल सामने आए ताकि पता चले कि कौन सी दवा दी गई थी.'

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दो अधिकारियों के विरोधाभासी बयान

इस मामले में कोटा प्रशासन के दो अधिकारियों के बयानों ने अलग-अलग रुख पेश किया है. जिला कलेक्टर पीयूष सामरिया ने स्पष्ट किया कि 3 मई को भर्ती के वक्त महिलाओं की स्थिति सामान्य थी. बाद में अचानक तबीयत क्यों बिगड़ी, इसकी हर एंगल से जांच हो रही है. मेडिकल प्रोटोकॉल खंगाले जा रहे हैं. जयपुर की टीम ने दवाओं के सैंपल लिए हैं, जिन्हें FSL (फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी) जांच के लिए भेजा गया है.

मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. नीलेश कुमार जैन: डॉ. जैन ने बताया कि मृतका पायल की तबीयत रात करीब 3 बजे बिगड़ी थी, जिसे 10 मिनट में संभाल लिया गया. मरीज का ब्लड प्रेशर डाउन हुआ और बाद में रीनल फेलियर की स्थिति बनी. उन्होंने शुरुआती जांच में स्टाफ को क्लीन चिट देते हुए कहा, 'अब तक किसी तरह की मानवीय लापरवाही सामने नहीं आई है. ये मेडिकल कॉम्प्लिकेशन हो सकता है. बताया है. प्रभावित महिलाओं में प्लेटलेट्स कम होने और यूरिन आउटपुट बंद होने के लक्षण मिले हैं.'

'जयपुर शिफ्ट नहीं किया जाएगा कोई मरीज'

राज्य सरकार के निर्देश (चिकित्सा मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर) पर जयपुर के SMS अस्पताल और एम्स से विशेषज्ञों की टीम कोटा पहुंची है. संभागीय आयुक्त अनिल कुमार ने अस्पताल का दौरा कर मरीजों का हाल जाना. उन्होंने स्पष्ट किया है कि फिलहाल किसी भी मरीज को जयपुर रेफर नहीं किया जा रहा है. सभी को निगरानी और डायलिसिस पर कोटा में ही रखा गया है.

प्रशासनिक समझाइश के बाद मृतका ज्योति के शव का महावीर नगर थाना पुलिस की मौजूदगी में मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम करवाया गया.

कांग्रेस नेता ने मुंडन कराकर किया प्रदर्शन

अस्पताल के बाहर कांग्रेस नेता चेतन सोलंकी के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने मुंडन कराकर विरोध प्रदर्शन किया और 20-20 लाख रुपये मुआवजे की मांग की. भाजपा विधायक संदीप शर्मा और मंत्री हीरालाल नागर ने भी अस्पताल पहुंचकर सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है.

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अब कैसे हैं हालात?

अस्पताल में फिलहाल अलर्ट मोड है. विशेषज्ञों की निगरानी में भर्ती 4 महिलाओं का डायलिसिस और इलाज किया जा रहा है. अस्पताल के वार्डों में अब सन्नाटा और खौफ है. उन नवजात बच्चों को NMCH वार्ड में शिफ्ट किया गया है, जिनकी मांएं या तो इस दुनिया में नहीं रहीं या जिंदगी की अंतिम जंग लड़ रही हैं.

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