राजस्थान सरकार के मंत्री किरोड़ी लाल मीणा ने ओडिशा के आदिवासी युवक जीतू मुंडा के मामले पर गहरी संवेदना जताई है. उन्होंने कहा कि जीतू की बेबसी और पीड़ा देखकर कलेजा कांप उठा. यह कागजी खानापूर्ति के नाम पर एक गरीब आदिवासी के साथ की गई प्रताड़ना है, जो किसी भी सभ्य समाज के माथे पर कलंक है.
उन्होंने ओडिशा के मुख्यमंत्री से इस मामले में तत्काल और कठोरतम कार्रवाई की मांग की. साथ ही उन्होंने ऐलान किया कि वे अपना एक महीने का वेतन जीतू मुंडा के परिवार को समर्पित करेंगे.
बैंक वालों ने मांगा डेथ सर्टिफिकेट
दरअसल ओडिशा के क्योंझर जिले में रहने वाले आदिवासी युवक जीतू मुंडा की बहन की मौत हो चुकी थी. परिवार आर्थिक रूप से कमजोर था और बहन के बैंक खाते में जमा राशि ही उसके लिए सहारा थी. जब वह बैंक पहुंचा तो पैसे निकालने के लिए उससे डेथ सर्टिफिकेट मांगा गया. यहीं से उसकी परेशानियों की शुरुआत हो गई.
डेथ सर्टिफिकेट के लिए लगाए चक्कर
जीतू ने डेथ सर्टिफिकेट बनवाने के लिए सरकारी दफ्तरों के कई चक्कर लगाए, लेकिन हर बार नई औपचारिकताएं और अड़चनें सामने आती रहीं. लगातार चक्कर लगाने और काम नहीं होने से वह मानसिक रूप से टूटने लगा. आखिरकार सिस्टम से हताश होकर जीतू ने ऐसा कदम उठाया जिसने पूरे देश को झकझोर दिया.
बहन का कंकाल लेकर पहुंचा बैंक
वह अपनी बहन की कब्र पर गया और उसका कंकाल निकालकर बैंक पहुंच गया, ताकि यह साबित कर सके कि उसकी बहन की मृत्यु हो चुकी है. बैंक में यह दृश्य देखकर लोग सन्न रह गए. मामले के तूल पकड़ने के बाद बैंक प्रबंधन की ओर से सफाई दी गई है. बैंक का कहना है कि ग्राहक को प्रताड़ित नहीं किया गया और नियमों के अनुसार ही दस्तावेज मांगे गए थे. इस घटना ने कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. सरकारी प्रक्रियाएं इतनी जटिल हो गई हैं कि इंसानियत पीछे छूट जाए.
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