रेगिस्तान से रोबोटिक युद्ध की तैयारी, भारतीय सेना की 'भैरव' और 'अशनि' बटालियन में 1 लाख ड्रोन ऑपरेटिव्स तैयार

भारतीय सेना ने रणनीति में बड़ा बदलाव करते हुए भैरव और अशनि बटालियन का गठन किया है. राजस्थान के रेगिस्तान में तैनात इस बटालियन के जवान तकनीक से पूरी तरह लैस है.

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भारतीय सेना ने रणनीति में बदलाव करते हुए भैरव और अशनि बटालियन का गठन किया है.

राजस्थान का रेगिस्तान अब सिर्फ सीमाओं की निगरानी का इलाका नहीं रहा, बल्कि रेगिस्तान अब भविष्य की जंग की नई प्रयोगशाला बन चुका है. भारतीय सेना रणनीति के लिहाज से निर्णायक दौर में प्रवेश कर चुकी है. एक ऐसे दौर में, जहां युद्ध की परिभाषा, उसके साधन और रणनीति, तीनों ही एक साथ बदल रहे हैं. इसी के चलते नसीराबाद से लेकर बीकानेर, जैसलमेर और बाड़मेर तक भारतीय सेना ने तैयारियां शुरू कर दी हैं, जो आने वाले युद्धों की तस्वीर बदल सकती है. इसी कड़ी में 'भैरव' और 'अशनि' नाम की नई बटालियनों का गठन किया गया है. इसमें एक लाख से ज्यादा ड्रोन ऑपरेटिव्स को तैयार किया जा रहा है. भारतीय सेना की बदलती रणनीति पर पढ़िए NDTV की खास रिपोर्ट.  

भैरव और अशनि बटालियन गठित

सेना के वरिष्ठ अधिकारियों के मुताबिक, आने वाली लड़ाइयां अचानक शुरू होंगी, जो बेहद तेज और पूरी तरह से तकनीक आधारित होंगी. ऐसे में सेना को ऐसे सैनिकों की जरूरत है जो केवल हथियार चलाना नहीं, बल्कि तकनीक को युद्ध में बदलना जानते हों. इसी सोच के तहत भैरव और अशनि बटालियन का गठन किया गया है. रेगिस्तान में तैनात तकनीक से लैस भैरव और अशनि के जवान हर चुनौती के लिए तैयार हैं.

वैश्विक रणनीति के तहत भारतीय सेना ने भी किया बदलाव 

एक्सपर्ट्स का मानना है कि अब जंग केवल सीमाओं पर आमने-सामने की मुठभेड़ से कही आगे निकल चुकी है. यह तकनीक, सूचना, गति और सटीक हमलों का संगठित युद्ध बन चुकी है. इसी बदली हुई वैश्विक सैन्य रणनीति को ध्यान में रखते हुए भारतीय सेना ने अपने ढांचे और ऑपरेशनल सोच में बड़ा बदलाव किया है. नसीराबाद में भारतीय सेना अपने भविष्य के युद्ध सिद्धांतों को जमीन पर उतार रही है. यहां जवानों को ड्रोन वॉरफेयर, मल्टी डोमेन ऑपरेशन, नेटवर्क सेंट्रिक वारफेयर और हाईटेक हथियार प्रणालियों में प्रशिक्षित किया जा रहा है.  भैरव बटालियन का गठन इसी व्यापक पुनर्गठन का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य आने वाले दशकों की सैन्य चुनौतियों के लिए सेना को तैयार करना है.

हाइब्रिड फोर्स के तौर पर 'भैरव बटालियन' को ड्रोन वॉरफेयर, मेडिकल इमरजेंसी, विस्फोटक निपटान और डिजिटल युद्ध के लिए तैयार किया गया है. भैरव के जवान कम संसाधनों में ज्यादा असर पैदा करने के लिए प्रशिक्षित किए जा रहे हैं.

दुश्मन की एडवांस डिफेंस सिस्टम पर होगा सीधा टारगेट

साथ ही अशनि बटालियन को भारतीय सेना की शॉक और स्ट्राइक फोर्स के रूप में तैयार किया गया है. अशनि यानी बिजली की तरह तेज हमला. यह बटालियन दुश्मन के एडवांस डिफेंस सिस्टम को तोड़ने और निर्णायक क्षणों में युद्ध की दिशा बदलने के लिए बनाई गई है. ड्रोन और रियल टाइम इंटेलिजेंस के साथ अशनि बटालियन हाई वैल्यू टारगेट्स पर त्वरित कार्रवाई करेगी.

रियल टाइम इंटेलिजेंस में कारगर साबित होंगी बटालियन

इस बीच, भारतीय सेना का तैयार किया गया एक लाख से अधिक ड्रोन ऑपरेटिव्स का नेटवर्क अपने आप में एक बड़ी रणनीतिक पहल माना जा रहा है. ये ड्रोन ऑपरेटिव्स पैदल सेना, बख्तरबंद इकाइयों, तोपखाने और विशेष बलों के साथ एकीकृत रूप से काम कर रहे हैं. अब ड्रोन केवल निगरानी तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे दुश्मन के ठिकानों की पहचान, सीमा पार गतिविधियों पर नजर, रियल टाइम इंटेलिजेंस और सटीक हमलों में निर्णायक भूमिका निभा रहे हैं. 

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