राजस्थान में NEET पेपर लीक मामले में कितने किरदार, कितने राज्यों से कनेक्शन? पढ़िए पूरा चिट्ठा

CBI ने कई संदिग्ध लोगों से पूछताछ की है और फिलहाल राजस्थान से केवल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन बाकी लोग अब भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं.

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  • सीकर के राकेश कुमार मंडावरिया ने बिवाल भाइयों से पेपर 15 लाख रुपये में खरीदा.
  • 30 अप्रैल से 2 मई के बीच सीकर में गेस पेपर फैलना शुरू हुआ, जो बाद में तेजी से वायरल हो गया
  • राजस्थान पुलिस ने 150 लोगों से पूछताछ की, 40 को हिरासत में लिया और मामला सीबीआई को सौंप दिया.
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राजस्थान के बिवाल परिवार के तीन सदस्य - दिनेश बिवाल, मांगीलाल बिवाल और विकास बिवाल - को CBI ने NEET 2026 पेपर लीक मामले में गिरफ्तार किया है. आरोप है कि इन्होंने पेपर खरीदकर सीकर के कोचिंग नेटवर्क के जरिए फैलाया. पुलिस सूत्रों के मुताबिक इस मामले में करीब 150 लोगों से पूछताछ की गई, लगभग 40 लोगों को हिरासत में लिया गया और 12 प्रमुख संदिग्धों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए. जांच एजेंसियों को शक है कि सीकर के आरके कंसल्टेंसी संचालक राकेश कुमार मंडावरिया ने बिवाल भाइयों से 15 लाख रुपये में पेपर खरीदा और छात्रों व कोचिंग संस्थानों में 3 से 5 लाख रुपये तक में बेचा.

सूत्रों के अनुसार 30 अप्रैल से 2 मई के बीच, NEET परीक्षा से पहले, कथित "गेस पेपर" सीकर में फैलना शुरू हुआ और बाद में छात्रों व स्थानीय नेटवर्क के जरिए तेजी से वायरल हो गया. 

जांच के दायरे में केमिस्ट्री शिक्षक सत्यनारायण "भाई सर" चौधरी भी हैं. उनके संस्थान के प्रचार पोस्टरों में बिवाल परिवार के बच्चों की तस्वीरें मिलीं. SOG ने उनसे पूछताछ की थी, लेकिन उसके बाद से वे सार्वजनिक रूप से दिखाई नहीं दे रहे हैं.

 सीकर की पीपराली रोड पर स्थित आरके कंसल्टेंसी नाम का करियर गाइडेंस सेंटर
Photo Credit: NDTV

बिवाल परिवार मुख्य आरोपी

CBI ने NEET परीक्षा पेपर लीक 2026 मामले में राजस्थान से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है. ये वे मुख्य आरोपी हैं जिन पर पेपर खरीदकर उसे सीकर के कोचिंग हब्स तक पहुंचाने का आरोप है, जहां से वह वायरल हुआ. गिरफ्तार किए गए तीनों एक ही परिवार से हैं. दिनेश बिवाल और मांगीलाल बिवाल जो भाई हैं, और तीसरा आरोपी विकास मांगीलाल का बड़ा बेटा है.

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लेकिन इन प्रमुख गिरफ्तारियों के पीछे राजस्थान में एक कहीं बड़ा नेटवर्क छिपा हुआ है. ऐसे लोग जिनसे पूछताछ हुई, जिन्हें हिरासत में लिया गया और जो अब भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं. यह एक ऐसा अदृश्य नेटवर्क है जिसके पास अब भी देश के सबसे बड़े पेपर लीक घोटालों में से एक की कई अहम कड़ियों के जवाब हो सकते हैं. 

"राकेश सर" - उत्तराखंड में पकड़ा

इन प्रमुख संदिग्धों में एक नाम है राकेश कुमार मंडावरिया का, जो सीकर की पीपराली रोड पर स्थित आरके कंसल्टेंसी नाम के करियर गाइडेंस सेंटर का मालिक है. वह मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के छात्रों का सलाहकार, पेपर सॉल्वर और नवोदय विद्यालय का पूर्व छात्र है. "राकेश सर" का दफ्तर एक छोटी दुकान जितना है, जहां से वह अपना कारोबार चलाता था. दुकान के शटर बंद हैं लेकिन एयर कंडीशनर ऑन छोड़ दिया गया है. ऐसा लगता है जैसे जांच एजेंसियों के शिकंजा कसते ही यहां काम करने वाले लोग या तो जल्दबाजी में भाग गए या पुलिस उन्हें उठाकर ले गई.

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सूत्रों के मुताबिक राकेश मंडावरिया NEET पेपर लीक मामले का एक अहम किरदार है. आरोप है कि उसने बिवाल भाइयों से 15 लाख रुपये में पेपर खरीदा और उसे छात्रों व कोचिंग संस्थानों में 3 से 5 लाख रुपये तक में बेचा. घोटाले का खुलासा होते ही राकेश गायब हो गया और बाद में उसे उत्तराखंड से पकड़ा गया. 

पीपराली रोड स्थित उसके ऑफिस से उसके स्टाफ को हिरासत में लिया गया और राजस्थान पुलिस ने वहां मौजूद कंप्यूटर व इलेक्ट्रॉनिक उपकरण सील कर दिए.

सीकर के आरके कंसल्टेंसी संचालक राकेश कुमार मंडावरिया को उत्तराखंड से हिरासत में लिया गया
Photo Credit: NDTV

"व्हिसलब्लोअर" की भूमिका

सूत्रों का कहना है कि 30 अप्रैल से 2 मई के बीच, 3 मई की सुबह होने वाली NEET परीक्षा से पहले ही कथित "गेस पेपर" सीकर में फैलना शुरू हो गया था. कुछ छात्रों ने इसे 2 मई की रात को मात्र 15 हजार रुपये में “गेस पेपर” बताकर बेचा. कुछ ने इसे मुफ्त में भी साझा किया. इसी दौरान एक छात्र ने इसे अपने दोस्त, केरल में पढ़ रहे सीकर के एक MBBS छात्र को भेजा. उस छात्र ने यह पेपर अपने पिता को भेजा, जो सीकर में पीजी हॉस्टल चलाते हैं. वही बाद में व्हिसलब्लोअर बने और पूरे लीक का पर्दाफाश हुआ.

स्पेशल ऑपरेशंस ग्रुप (SOG) द्वारा राकेश मंडावरिया को करीब दो दर्जन अन्य लोगों के साथ उठाकर CBI को सौंपे जाने के बाद से वह अपने गृह नगर नहीं लौटा है. CBI ने अभी तक उसे गिरफ्तार नहीं किया है, लेकिन पुलिस सूत्रों का कहना है कि इस घोटाले में उसकी भूमिका स्थापित हो चुकी है और उसे कभी भी गिरफ्तार किया जा सकता है.

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"भाई सर" का कोचिंग संस्थान

NEET पेपर लीक के पीछे एक और रहस्यमयी चेहरा है सत्यनारायण चौधरी, जिन्हें सीकर में "भाई सर" के नाम से जाना जाता था. एसएन चौधरी का कथित तौर पर "दीप करियर इंस्टीट्यूट" नाम का एक कोचिंग संस्थान है जो अब बंद दिखाई देता है. लेकिन NEET 2025 में सफल छात्रों को बधाई देने वाले दीप करियर इंस्टीट्यूट के एक पोस्टर में उन छात्रों की तस्वीरें हैं जिनका सीधा संबंध जयपुर के जमवारामगढ़ स्थित बिवाल परिवार से है, जो राजस्थान में पेपर लीक का मुख्य आरोपी माना जा रहा है. 

इन छात्र-छात्राओं के नाम हैं पलक बिवाल, सानिया बिवाल और गुंजन बिवाल. ये मांगीलाल और दिनेश बिवाल के परिवार से हैं. आरोप है कि इन्होंने हरियाणा के यश नामक व्यक्ति से पेपर खरीदा और उसे सीकर में राकेश मंडावरिया तक पहुंचाया. ऐसे में एसएन चौधरी के पोस्टर में इनकी तस्वीरों का होना महज संयोग नहीं माना जा रहा.

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पोस्टर में बिवाल परिवार के सफल अभ्यर्थियों के नाम
Photo Credit: NDTV

भाई सर और बिवाल परिवार का कनेक्शन

पलक, गुंजन और सानिया बिवाल उन पांच बच्चों में शामिल हैं जिन्होंने मुख्य आरोपी परिवार से परीक्षा दी थी. पलक और सानिया कथित तौर पर घनश्याम की बेटियां हैं, जो बिवाल परिवार के सबसे बड़े भाई थे और जिनकी मृत्यु हो चुकी है. 

गुंजन, मुख्य आरोपी दिनेश बिवाल की बेटी है और बताया जाता है कि वह वाराणसी के एक मेडिकल कॉलेज में पढ़ रही है.

एसएन चौधरी ने अपने करियर इंस्टीट्यूट के प्रचार पोस्टर में बिवाल परिवार की तीन छात्राओं को सफलता की कहानी के रूप में पेश किया. "भाई सर" सीकर के कई कोचिंग संस्थानों में केमिस्ट्री शिक्षक के रूप में काम कर चुके हैं. उनका "दीप करियर इंस्टीट्यूट" वास्तव में एक सफल संस्थान था या फिर बड़े पेपर लीक नेटवर्क का एक फ्रंट - यह अब जांच का विषय है. 

"द मास्टर स्ट्रोक" - गेस पेपर

सूत्रों के अनुसार यह संस्थान मार्च 2025 में शुरू हुआ था और नवंबर 2025 में बंद हो गया. स्थानीय लोगों का कहना है कि इसके बाद वह नागौर के लाडनूं में एक कोचिंग संस्थान में पढ़ाने लगे. स्थानीय सूत्रों ने पुलिस को यह भी बताया कि "भाई सर" "द मास्टर स्ट्रोक" नाम से गेस पेपर तैयार करते थे और कई बार उन गेस पेपर के सवाल असली परीक्षा से मेल खाते थे, जिसके बाद सीकर में जश्न मनाया जाता था. 

इन तमाम दावों की अब जांच एजेंसियां पुष्टि करने में जुटी हैं. SOG ने एसएन चौधरी से पूछताछ की थी, लेकिन CBI के तीन मुख्य आरोपियों को दिल्ली ले जाने के बाद से वह सार्वजनिक रूप से गायब बताए जा रहे हैं.

राजस्थान पुलिस ने CBI को सौंपी जांच

पुलिस सूत्रों ने NDTV को बताया कि पेपर लीक मामले में करीब 150 लोगों से पूछताछ की गई. इनमें लगभग 40 लोगों को हिरासत में लिया गया और 12 प्रमुख संदिग्धों के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए. इनमें कई छात्र भी शामिल थे, जिन्हें इस शर्त पर छोड़ा गया कि जरूरत पड़ने पर वे पूछताछ के लिए उपस्थित होंगे. 

पुलिस सूत्रों का कहना है कि राजस्थान पुलिस के तीन मुख्य उद्देश्य थे -  यह स्थापित करना था कि पेपर लीक वास्तव में हुआ था, उसकी व्यापकता और नेटवर्क का आकलन करना और फिर मामला CBI को सौंपना, जो अब किया जा चुका है. CBI ने सभी संदिग्धों से पूछताछ की है और फिलहाल राजस्थान से केवल तीन लोगों को गिरफ्तार किया है, लेकिन बाकी लोग अब भी जांच एजेंसियों के रडार पर हैं और इस नेटवर्क के संचालन और उसकी अवधि को लेकर महत्वपूर्ण सुराग दे सकते हैं. जैसे-जैसे जांच आगे बढ़ेगी, ये रहस्यमय चेहरे NEET पेपर लीक 2026 घोटाले की सबसे अहम कड़ियों के रूप में सामने आ सकते हैं.

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