Ajmer News: राजस्थान की सियासत में 'बेटा पॉलिटिक्स' को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है. पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत (Ashok Gehlot) के 'मंत्रियों के बेटों के दखल' वाले बयान पर कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत (Avinash Gehlot) ने शुक्रवार देर शाम अजमेर की धरती से तीखा पलटवार किया है. अजमेर के माली सैनी प्रीमियर लीग में पहुंचे मंत्री ने NDTV राजस्थान से खास बातचीत में कांग्रेस को आईना दिखाते हुए सचिन पायलट (Sachin Pilot) के बेटे का मुद्दा उठा दिया है.
'अपने घर में झांके कांग्रेस, फिर दे नसीहत'
अविनाश गहलोत ने कहा कि दूसरों पर सवाल उठाने से पहले कांग्रेस को अपने भीतर देखना चाहिए. उन्होंने सोशल मीडिया पर वायरल हुई सचिन पायलट के बेटे की फोटो का जिक्र करते हुए पूछा कि क्या वह चिंता का विषय नहीं है? मंत्री ने आरोप लगाया कि पिछले 5 वर्षों में कांग्रेस के कई विधायक और सांसदों के बच्चों ने जमकर भ्रष्टाचार किया, जिस पर तत्कालीन सरकार का कोई नियंत्रण नहीं था. उन्होंने तंज कसा कि यदि गहलोत जी को 'ब्रेक' लगाना ही है, तो इसकी शुरुआत कांग्रेस नेताओं के परिवारों से होनी चाहिए.
अशोक गहलोत ने क्या बयान दिया था?
पूर्व सीएम गहलोत ने कहा था, 'राजस्थान में जब से भाजपा सरकार बनी है, तब से चर्चा है कि मंत्रियों, उपमुख्यमंत्री और यहां तक कि मुख्यमंत्री के बेटों का सरकारी कामकाज में दखल बढ़ गया है. मैं उन्हें सलाह देना चाहूंगा कि अपने बेटों को सत्ता के गलियारों से थोड़ा दूर रखें. बेटों को अगर आप सरकार के ज्यादा नजदीक लाओगे, तो वे बिगड़ सकते हैं. आपको पता भी नहीं चलेगा कि वे कब आपको और आपकी सरकार को बदनाम करवा देंगे. बदनामी सिर्फ आपकी नहीं, बल्कि पूरे मंत्रालय और मुख्यमंत्री की भी होगी. घर के अंदर उन्हें अच्छे संस्कार दें, लेकिन बाहर सरकारी फाइलों और दफ्तरों से उन्हें दूर ही रखें। लोकतांत्रिक प्रणाली के लिए यह उचित नहीं है कि परिवार के सदस्य शासन में सक्रिय दखल दें.'
पायलट के बेटे की किन तस्वीरों की बात कर रहे हैं मंत्री?
दरअसल, कैबिनेट मंत्री अविनाश गहलोत ने सचिन पायलट के बेटे आरन पायलट (Aaran Pilot) की उन तस्वीरों का जिक्र किया है, जो हाल ही में सोशल मीडिया पर उनकी राजनीतिक सक्रियता और एनएसयूआई (NSUI) के कार्यक्रमों में भागीदारी के दौरान वायरल हुई थीं. इन तस्वीरों में आरन पायलट अपने पिता सचिन पायलट के साथ रैलियों में पदयात्रा करते और समर्थकों के बीच घिरे नजर आए थे, जिसे भाजपा ने कांग्रेस के 'परिवारवाद' और 'नई पीढ़ी की लॉन्चिंग' के तौर पर पेश किया. मंत्री अविनाश गहलोत का सीधा तर्क यह है कि अशोक गहलोत दूसरों को नसीहत देने के बजाय पहले अपनी ही पार्टी के बड़े नेताओं के बेटों के बढ़ते सियासी रसूख और दखल पर जवाब दें.
OBC आरक्षण पर 'ट्रिपल टेस्ट' है अनिवार्य
राजनीतिक हमलों के साथ-साथ अविनाश गहलोत ने प्रदेश के ओबीसी राजनीतिक आरक्षण पर भी स्थिति साफ की. उन्होंने स्पष्ट किया कि राजस्थान सरकार सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और 'ट्रिपल टेस्ट' की प्रक्रिया के आधार पर ही आगे बढ़ेगी. ओबीसी आयोग वर्तमान में सर्वे का काम कर रहा है और रिपोर्ट तैयार करने के लिए सरकार से अतिरिक्त समय मांगा गया है. मंत्री ने कहा कि राजस्थान में 50 प्रतिशत से अधिक ओबीसी आबादी है और उन्हें राजनीतिक प्रतिनिधित्व दिलाना उनका अधिकार है. अविनाश गहलोत ने भरोसा दिलाया कि जैसे ही आयोग अपनी रिपोर्ट सौंपेगा और चुनाव आयोग प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा, राज्य सरकार चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार रहेगी. उन्होंने दोहराया कि भाजपा सरकार सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है और न्यायालय के दिशा-निर्देशों के अनुरूप ही फैसले लिए जाएंगे.
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