‘युवा सांझ कार्यक्रम’ को लेकर पंजाब पुलिस का बड़ा दावा, 2,358 भटके युवाओं को गैंगस्टरों के प्रभाव से बचाया

अब तक 1,519 युवाओं की प्रोफाइल राज्य स्तर के ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर’ में दर्ज की गई हैं. इनमें से 1,490 युवाओं को जागरूक किया जा चुका है, जबकि 1,109 युवाओं ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया.

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  • पंजाब पुलिस का युवा सांझ कार्यक्रम युवाओं को सोशल मीडिया से अपराध की दिशा में जाने से रोकने की पहल है.
  • इस अभियान के तहत अब तक 2,358 युवाओं की पहचान की गई और उन्हें काउंसलिंग तथा मार्गदर्शन दिया गया है.
  • DGP गौरव यादव ने कहा कि पुलिस गैंगस्टरों के खिलाफ कार्रवाई कर रही तो दूसरी ओर निगरानी एवं काउंसलिंग भी.
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पंजाब पुलिस का ‘युवा सांझ कार्यक्रम' राज्य में भटके हुए युवाओं को सही दिशा देने की एक अहम पहल बनकर उभरा है.  कम्युनिटी पुलिसिंग को मजबूत करते हुए इस अभियान के तहत अब तक 2,358 ऐसे युवाओं की पहचान की गई है, जो सोशल मीडिया के जरिए गैंगस्टर या अपराधी नेटवर्क के प्रभाव में आ सकते थे. पुलिस ने समय रहते उन्हें चिन्हित कर उन्हें अपराध की राह से दूर रखने का प्रयास किया है. 

यह पहल ‘गैंगस्टरों ते वार' अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसका उद्देश्य केवल कठोर कार्रवाई ही नहीं, बल्कि युवाओं को नकारात्मक प्रवृत्तियों से बाहर निकालना भी है. पंजाब पुलिस ने बताया कि सोशल मीडिया विश्लेषण के आधार पर युवाओं की पहचान की जा रही है और फिर उन्हें काउंसलिंग, मार्गदर्शन और सामुदायिक जुड़ाव के जरिए सकारात्मक दिशा में आगे बढ़ाया जा रहा है. 

युवा सांझ सॉफ्टवेयर में दर्ज 1,519 युवाओं की प्रोफाइल

अब तक 1,519 युवाओं की प्रोफाइल राज्य स्तर के ‘युवा सांझ सॉफ्टवेयर' में दर्ज की गई हैं. इनमें से 1,490 युवाओं को जागरूक किया जा चुका है, जबकि 1,109 युवाओं ने काउंसलिंग सत्रों में भाग लिया. जिला खुफिया इकाइयों और स्थानीय टीमों के सहयोग से इन युवाओं तक पहुंच बनाई गई है. 

डीजीपी गौरव यादव के मुताबिक, पंजाब पुलिस दोहरी रणनीति पर काम कर रही है—एक तरफ गैंगस्टरों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और दूसरी ओर युवाओं की लगातार निगरानी एवं काउंसलिंग. इसमें मनोवैज्ञानिक विश्लेषण, पारिवारिक सहयोग और जरूरत पड़ने पर पुनर्वास जैसी व्यवस्थाएं शामिल हैं. 

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कार्यक्रम में समाजसेवी, मनोवैज्ञानिक और NGO भी शामिल

जमीनी स्तर पर जिला ‘युवा सांझ' समितियां इस पहल को आगे बढ़ा रही हैं, जिनमें पुलिस अधिकारियों के साथ-साथ समाजसेवी, मनोवैज्ञानिक और एनजीओ भी शामिल हैं. इस कार्यक्रम के जरिए युवाओं को नशे, हथियार संस्कृति और अपराध से दूर रखकर उन्हें शिक्षा, कौशल और रोजगार की दिशा में प्रेरित किया जा रहा है. 

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