- पीएम मोदी डिब्रूगढ़‑मोरान हाईवे पर विकसित आपातकालीन एयरस्ट्रिप पर उतरेंगे, जो पूर्वोत्तर में पहली बार होगा
- इस कार्यक्रम में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और तीनों सैन्य प्रमुखों के शामिल होने की संभावना है
- मोरान एयरस्ट्रिप राष्ट्रीय हाईवे‑2 के करीब 4 किलोमीटर हिस्से पर बनी है और दोनों प्रकार के विमानों के लिए तैयार
पीएम मोदी पूर्वोत्तर भारत से देश और दुनिया, खासकर पड़ोसी देशों को एक अहम सुरक्षा संदेश देने जा रहे हैं. यह संदेश भारत की रणनीतिक तैयारी और सैन्य क्षमता से जुड़ा होगा. दरअसल, पीएम 14 फरवरी 2026 को असम के डिब्रूगढ़‑मोरान राष्ट्रीय राजमार्ग पर विकसित हाईवे‑आधारित इमरजेंसी एयरस्ट्रिप पर उतरेंगे. सूत्रों के मुताबिक, यह पूर्वोत्तर भारत में अपनी तरह का पहला मौका होगा, जब किसी प्रधानमंत्री का विमान एयरपोर्ट के बजाय हाईवे पर बनी आपात लैंडिंग स्ट्रिप पर लैंड करेगा.
पीएम के साथ कार्यक्रम में कौन-कौन रहेगा मौजूद
इस विशेष कार्यक्रम में पीएम मोदी के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और थल सेना, नौसेना व वायुसेना के तीनों प्रमुखों के मौजूद रहने की संभावना है. मोरान इमरजेंसी एयरस्ट्रिप नेशनल हाईवे‑2 के करीब 4.2 किलोमीटर हिस्से पर विकसित की गई है. यह उत्तर‑पूर्व भारत में भारतीय वायुसेना की पहली इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी (ELF) है, जिसे सैन्य और नागरिक, दोनों तरह के विमानों के संचालन के लिए तैयार किया गया है.
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भारत के लिए एयरस्ट्रिप के क्या मायने
इस एयरस्ट्रिप की रणनीतिक अहमियत इसलिए भी बढ़ जाती है क्योंकि यहां से चीन से लगी सीमा की हवाई दूरी लगभग 150 से 200 किलोमीटर के बीच है. रक्षा सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री की मौजूदगी में राफेल और सुखोई लड़ाकू विमानों का विशेष एरियल डेमो आयोजित किया जाएगा. इसके अलावा स्पेशल ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट C‑130 और सैन्य हेलीकॉप्टर भी इस हाईवे एयरस्ट्रिप पर लैंड करेंगे. कार्यक्रम के दौरान फाइटर जेट्स द्वारा हाईवे पर लैंडिंग और टेक‑ऑफ का लाइव प्रदर्शन किया जाएगा. यह पूरा एरियल डेमो करीब 30 से 40 मिनट तक चलेगा.
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पूर्वोत्तर में और मजबूत होगी रणनीतिक स्थिति
इस इमरजेंसी लैंडिंग फैसिलिटी के चालू होने से वायुसेना को आपात स्थिति में वैकल्पिक रनवे की सुविधा मिलेगी, जिससे उसकी ऑपरेशनल क्षमता कई गुना बढ़ जाती है. साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं के दौरान राहत और मानवीय सहायता अभियानों में भी इसका इस्तेमाल किया जा सकेगा. कुल मिलाकर, यह आयोजन न सिर्फ पूर्वोत्तर भारत की रणनीतिक मजबूती और आपात तैयारी को दर्शाएगा, बल्कि हाईवे‑आधारित एयरस्ट्रिप की उपयोगिता को भी राष्ट्रीय स्तर पर सामने लाएगा. प्रधानमंत्री की यह यात्रा बुनियादी ढांचे के विकास और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से एक मजबूत संदेश के तौर पर देखी जा रही है.














