TCS के बाद अब विप्रो में बवाल! पुणे ऑफिस की कर्मचारी बोलीं-'धर्म बदलने की बात नहीं मानी तो नौकरी से निकाला'

विप्रो कार्यालय पुणे महाराष्‍ट्र की पूर्व महिला प्रोजेक्ट मैनेजर ने बॉस व वरिष्ठ प्रबंधकों पर धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का दबाव बनाने का गंभीर आरोप लगाया है. ऐसा ही केस पूर्व में नास‍िक स्थित टीसीएस कंपनी के कार्यालय में भी सामने आ चुका है. 

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TCS के बाद अब विप्रो में बवाल! पुणे ऑफिस की कर्मचारी बोलीं-'धर्म बदलने की बात नहीं मानी तो नौकरी से निकाला'
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  • विप्रो कार्यालय की पूर्व महिला प्रोजेक्ट मैनेजर ने बॉस पर लगाए कई गंभीर आरोप.
  • पुणे पीड़िता का कहना है कि विरोध करने पर उन्हें नौकरी से निकालने की धमकी दी गई.
  • विप्रो कंपनी ने उत्पीड़न के खिलाफ 'जीरो-टोलरेंस' नीति की बात कही है.

महाराष्ट्र के नासिक में टीसीएस कार्यालय में कथित धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण के मामले ने पूरे देश को झकझोर दिया था. अब महाराष्ट्र के पुणे से भी ऐसा ही एक गंभीर मामला सामने आया है. आईटी कंपनी विप्रो के पुणे कार्यालय की एक पूर्व कर्मचारी ने अपने बॉस पर धार्मिक उत्पीड़न के गंभीर आरोप लगाए हैं.  इन आरोपों के सामने आते ही पुलिस और कंपनी, दोनों ने अपने-अपने स्तर पर मामले की जांच शुरू कर दी है. कथित धर्मांतरण के दबाव के आरोपों पर विप्रो का आधिकारिक बयान भी आया है, जिसमें कंपनी ने कहा है कि जांच में पुलिस का पूरा सहयोग किया जा रहा है.

विप्रो की पूर्व कर्मचारी ने मानवाधिकार आयोग से भी की श‍िकायत

दरअसल, आईटी क्षेत्र की प्रमुख कंपनी विप्रो की एक पूर्व कर्मचारी ने कंपनी के पुणे कार्यालय में कार्यरत अपने वरिष्ठ सहयोगियों पर धार्मिक उत्पीड़न और जबरन धर्मांतरण का प्रयास करने का गंभीर आरोप लगाया है. पीड़ित कर्मचारी ने इस संबंध में स्थानीय पुलिस प्रशासन और मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है.

व‍िप्रो में धार्मिक विश्वासों के कारण निशाना बनाने का आरोप

शिकायतकर्ता के अनुसार, पुणे के हिंजवड़ी स्थित विप्रो परिसर में काम करने के दौरान कुछ वरिष्ठ प्रबंधकों और टीम लीडर्स द्वारा उन्हें उनके धार्मिक विश्वासों के कारण निशाना बनाया गया. आरोप है कि पीड़िता पर एक विशिष्ट धर्म को अपनाने और उसकी प्रथाओं का पालन करने के लिए लगातार मानसिक दबाव डाला जा रहा था. जब कर्मचारी ने इसका विरोध किया, तो कार्यस्थल पर उनका उत्पीड़न और अधिक बढ़ा दिया गया.

खराब परफॉर्मेंस रिव्यू देने की धमकी 

पीड़िता ने अपनी शिकायत में यह भी उल्लेख किया है कि बात न मानने पर उन्हें खराब परफॉर्मेंस रिव्यू देने और नौकरी से निकालने की धमकियां दी गईं. इस लगातार बढ़ते मानसिक तनाव और प्रताड़ना के चलते आखिरकार उन्हें अपने पद से इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा. उन्होंने कंपनी की आंतरिक प्रक्रिया के तहत भी शिकायत दर्ज कराई थी, मगर वहां से उचित प्रतिक्रिया न मिलने पर उन्होंने कानूनी रास्ता अपनाने का फैसला किया.

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विप्रो की आंतरिक नीतियों के तहत जांच 

इस मामले के सामने आने के बाद पुणे पुलिस और संबंधित विभाग आरोपों की सत्यता की जांच कर रहे हैं. आईटी कंपनियों में कर्मचारियों की सुरक्षा और धार्मिक स्वतंत्रता को लेकर इस घटना के बाद एक बार फिर बहस शुरू हो गई है. विप्रो की ओर से इस पूरे मामले की अपनी आंतरिक नीतियों के तहत जांच करने की बात कही गई है. फिलहाल, पुलिस प्रशासन और कंपनी दोनों स्तरों पर जांच जारी है.

महिला प्रोजेक्ट मैनेजर ने की श‍िकायत 

पुणे पुलिस के सीनियर पुलिस इंस्पेक्टर बालाजी पंढारे ने बताया क‍ि "विप्रो कंपनी की एक महिला प्रोजेक्ट मैनेजर ने हमारे पास शिकायत दर्ज कराई है कि उनकी महिला बॉस (जो इंश्योरेंस से जुड़े काम देखती थीं) ने उनके खिलाफ कुछ आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं. आरोप है कि बाद में महिला बॉस ने प्रोजेक्ट मैनेजर से इस्तीफा देने को कहा और उनका इस्तीफा पत्र ले लिया. इसके बाद पीड़िता ने हमारे पास एक आवेदन जमा किया. चूंकि उनकी महिला बॉस अब बेंगलुरु में रहती हैं और वहीं से काम संभालती हैं, इसलिए शिकायतकर्ता ने उनके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. हम इस बात की भी जांच करेंगे कि इस शिकायत के संबंध में कंपनी ने अब तक क्या कार्रवाई की है."

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धार्मिक उत्पीड़न के आरोपों पर विप्रो ने क्या कहा?

इस पूरे विवाद पर विप्रो कंपनी ने अपना आधिकारिक पक्ष रखते हुए कहा है, "विप्रो में कर्मचारियों का कल्याण, गरिमा और सम्मान सर्वोपरि है. हम किसी भी प्रकार के दुर्व्यवहार, भेदभाव, उत्पीड़न या ऐसे कार्यों के प्रति 'जीरो-टोलरेंस' की नीति अपनाते हैं, जो किसी व्यक्ति के मौलिक अधिकारों और स्वतंत्रता से समझौता करते हों."

कंपनी ने आगे कहा, "हम इस मामले में पुलिस अधिकारियों के साथ पूरी तरह से सहयोग कर रहे हैं और पुणे पुलिस को सभी प्रासंगिक दस्तावेज और जानकारियां उपलब्ध करवा दी हैं. चूंकि मामला वर्तमान में जांच के अधीन है, इसलिए हम इस मामले की विशिष्टताओं पर टिप्पणी नहीं कर सकते. हम अपने सभी कर्मचारियों के लिए एक सुरक्षित, समावेशी और सम्मानजनक कार्यस्थल बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं."

इस संबंध में हिंदू जनजागृति समिति ने बुधवार को पुणे पत्रकार भवन में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की थी, जिसमें पीड़ित महिला ने साल 2019 से 2025 तक विप्रो में काम करने के दौरान अपने साथ हुई आपबीती का पूरा ब्यौरा सामने रखा. पुणे पुलिस अब महिला द्वारा लगाए गए इन सभी आरोपों और कंपनी के आंतरिक रिकॉर्ड्स की गहन जांच कर रही है.

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