महाराष्ट्र के ठाणे स्थित अपघात दावा न्यायाधिकरण (एमसीएटी) ने लगभग एक दशक पहले हादसे में स्थायी शारीरिक दिव्यांगता से पीड़ित एक लड़की को 25.2 लाख रुपये का मुआवजा देने का आदेश दिया. एमसीएटी ने कहा कि बच्ची का उज्ज्वल भविष्य था, लेकिन हादसे ने उसकी जिंदगी हमेशा के लिए बदल दी. न्यायाधिकरण के सदस्य आर वी मोहिते ने बुधवार को अपने आदेश में कहा कि पीड़ित ग्रेसी नितिन थोराट दुर्घटना के समय केवल एक साल की थी, लेकिन दूसरों की लापरवाही के कारण अब वह जीवन भर चुनौतियों का सामना करेगी.
2016 में हुआ था हादसा
ग्रेसी 16 फरवरी 2016 को नवी मुंबई के दीघा इलाके में अपने घर के सामने खेल रही थी तभी पीछे से एक कार तेजी से आई उसे टक्कर मार दी. अदालत ने बताया कि बच्ची 50 प्रतिशत शारीरिक दिव्यांगता का शिकार हो गई, जिसमें दाहिने कान में मध्यम श्रवण हानि, दाहिनी आंख में कॉर्नियल अपारदर्शिता और चेहरे का पक्षाघात शामिल है.
ब्याज सहित देना होगा मुआवजा
एमसीएटी ने कहा, ‘शिकायतकर्ता (लड़की) के पिता शिक्षक हैं. पीड़िता की माता ट्यूशन पढ़ाती थीं. इसलिए पीड़िता का भविष्य उज्ज्वल था.' एमसीएटी ने कार मालिक सतेंद्रकुमार सी. भटनागर और बीमा कंपनी को मुआवजे के भुगतान के लिए संयुक्त रूप से उत्तरदायी ठहराया और उन्हें याचिका दायर करने की तिथि से नौ प्रतिशत ब्याज सहित 25.2 लाख रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया.
वकील यू.आर. विश्वकर्मा ने पीड़िता का प्रतिनिधित्व किया, जबकि आर.एन. गुरनानी वाहन मालिक की ओर से और ए.के. तिवारी बीमा कंपनी की ओर से पेश हुए. सुधीर वाई. पवार, जिन्हें कार बेची गई थी, को भी प्रतिवादी बनाया गया था लेकिन उन्हें दावा याचिका में प्रतिवादी नहीं बनाया गया.














