TCS नासिक केस में NHRC की एंट्री, पुलिस और कंपनी से मांगी रिपोर्ट, जांच तेज

TCS नासिक केस में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने संज्ञान लिया है. आयोग ने पुलिस, श्रम विभाग और कंपनी से रिपोर्ट मांगी है, जिससे मामले की जांच और तेज हो गई है.

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TCS Case Nashik NHRC Issues Notice
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  • नासिक स्थित TCS के BPO यूनिट में यौन उत्पीड़न के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जांच शुरू की है.
  • आयोग ने पुलिस कमिश्नर, श्रम आयुक्त, कंपनी प्रबंधन और राज्य के डीजीपी को रिपोर्ट देने का निर्देश दिया है.
  • पुलिस ने अब तक 9 FIR दर्ज की हैं, जिसमें कर्मचारियों ने उत्पीड़न और धर्मांतरण का आरोप लगाया है
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TCS Case Nashik: महाराष्ट्र के नासिक स्थित TCS के BPO यूनिट में सामने आए यौन उत्पीड़न और कथित धर्मांतरण के मामले में अब राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) की एंट्री हो गई है. आयोग ने पुलिस कमिश्नर, श्रम आयुक्त, कंपनी प्रबंधन और राज्य के डीजीपी को नोटिस जारी कर पूरे मामले में विस्तृत रिपोर्ट और एक्शन टेकन रिपोर्ट तय समयसीमा में पेश करने को कहा है.

मानवाधिकार उल्लंघन के पहलुओं की होगी जांच

आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि शिकायत में उठाए गए मानवाधिकार उल्लंघन के बिंदुओं की गहराई से जांच की जाएगी. साथ ही यह भी देखा जाएगा कि कंपनी के भीतर कर्मचारियों की सुरक्षा और शिकायत निवारण से जुड़े नियमों का पालन सही तरीके से हो रहा था या नहीं.

HR की भूमिका पर उठे सवाल

मामले की शुरुआत एक महिला कर्मचारी की शिकायत से हुई थी. आरोप है कि जब उसने यौन उत्पीड़न की शिकायत करने की कोशिश की, तो एचआर प्रमुख ने उसे हतोत्साहित किया. पीड़िता का दावा है कि उसे कहा गया कि “ऐसी चीजें होती रहती हैं”, जिसके बाद कंपनी के आंतरिक सिस्टम पर गंभीर सवाल खड़े हो गए.

9 FIR दर्ज, 7 आरोपी गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अब तक 9 FIR दर्ज हो चुकी हैं. इनमें 8 महिला कर्मचारियों ने यौन उत्पीड़न और मानसिक प्रताड़ना के आरोप लगाए हैं. वहीं एक पुरुष कर्मचारी ने कार्यस्थल पर धर्मांतरण के प्रयास का आरोप लगाया है. कुल 9 आरोपियों में से 7 को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि एक महिला कर्मचारी अब भी फरार बताई जा रही है.

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संगठित तरीके से काम करने का शक

जांच में सामने आया है कि कई मामलों में एक ही समूह के लोग आरोपी हैं. पुलिस को शक है कि ये कर्मचारी संगठित तरीके से अपने पद का दुरुपयोग कर रहे थे. अधिकांश आरोपी वरिष्ठ पदों पर थे, जिससे पीड़ितों के लिए शिकायत करना आसान नहीं था.

SIT और महिला आयोग भी जांच में जुटे

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया है. वहीं राष्ट्रीय महिला आयोग ने भी फैक्ट-फाइंडिंग कमेटी बनाकर जांच शुरू कर दी है. कंपनी ने साफ किया है कि वह किसी भी प्रकार के उत्पीड़न के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति अपनाती है. आरोप सामने आने के बाद संबंधित कर्मचारियों को सस्पेंड कर दिया गया है. टाटा समूह के चेयरमैन ने भी इस मामले को गंभीर बताते हुए कहा है कि सच्चाई सामने लाने के लिए उच्च स्तर पर जांच जारी है. दूसरी ओर, गिरफ्तार आरोपियों के परिवारों ने पूरे मामले को साजिश बताया है. उनका कहना है कि उनके बच्चों को झूठे आरोपों में फंसाया गया है और निष्पक्ष जांच होनी चाहिए.

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