सुनेत्रा पवार: विरासत, नेतृत्व और सत्ता की नई कहानी, आज बनेंगी महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी CM

राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार कई सालों से सक्रिय राजनीति से दूर रहीं, लेकिन वह हमेशा बारामती के चुनावी अभियानों में पर्दे के पीछे से प्रेरक शक्ति बनी रहीं. अब अजित पवार के निधन के बाद वो महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी सीएम बनने जा रही हैं.

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NCP की राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार, आज लेंगी डिप्टी सीएम पद की शपथ.
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  • सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनेंगी और शनिवार को शपथ ग्रहण करेंगी.
  • उनका जन्म ओसमानाबाद में हुआ और वे एक राजनीतिक व कृषक परिवार से आती हैं.
  • उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा और ग्रामीण विकास के लिए Environmental Forum of India की स्थापना की.
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पुणे/मुंबई:

Sunetra Pawar Profile: महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के प्रमुख अजित पवार के निधन से महाराष्ट्र की राजनीति में एक बड़ा शून्य पैदा हो गया है. अजित दादा के जाने के बाद शनिवार को उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र की पहली महिला उपमुख्यमंत्री बनेंगी. शुक्रवार हुई NCP की आपात बैठक में सुनेत्रा पवार को डिप्टी CM पद की जिम्मेदारी संभालने का प्रस्ताव दिया गया, पार्टी नेताओं की सलाह पर सुनेत्रा ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया गया है. शनिवार को शाम में सुनेत्रा पवार डिप्टी सीएम पद की शपथ लेंगी. इस शपथ ग्रहण के लिए सुनेत्रा पवार बारामती से रवाना हो गई है. वो पुणे होते हुए शनिवार को मुंबई पहुंचेंगी. जहां शनिवार शाम महाराष्ट्र की राजनीति का एक नया अध्याय शुरू होगा. 

शादी से पहले भी सुनेत्रा पवार को मिली राजनैतिक विरासत 

महाराष्ट्र की पहली महिला डिप्टी मुख्यमंत्री बनने वाली सुनेत्रा पवार का जन्म 18 अक्टूबर 1963 को ओसमानाबाद, महाराष्ट्र में हुआ था. वे एक राजनीतिक और कृषक पृष्ठभूमि से आती हैं और उनके परिवार का राजनीति से गहरा नाता रहा है. उनके पिता पद्मसिंह पाटिल खुद एक पूर्व राज्य मंत्री और लोकसभा सांसद रह चुके हैं. 

भाई पद्मसिंह पाटिल बीजेपी से जुड़े रहे हैं

उनके बड़े भाई पद्मसिंह पाटिल भी भारतीय राजनीति में सक्रिय रहे हैं और वे भारतीय जनता पार्टी (BJP) से भी जुड़े रहे हैं, जिससे सुनेत्रा पवार का पारिवारिक राजनीतिक नेटवर्क दोनों प्रमुख दलों से जुड़ा हुआ है. सुनेत्रा पवार और अजित पवार के दो बेटे हैं – जय पवार और पार्थ पवार. पार्थ पवार ने राजनीति में कदम रखा और 2019 के लोकसभा चुनाव में मावळ सीट से चुनाव लड़ा, लेकिन सफलता नहीं मिली. 

सुनेत्रा ने शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास ने किए कई काम

सुनेत्रा पवार ने शिक्षा, पर्यावरण और ग्रामीण विकास के क्षेत्र में सक्रिय भूमिका निभाई है. उन्होंने 2010 में Environmental Forum of India (EFOI) नामक एक गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की, जो जैविक खेती, पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण समुदायों के सशक्तिकरण पर काम करता है. 

विद्या प्रतिष्ठान की ट्रस्टी भी हैं सुनेत्रा पवार

वे World Entrepreneurship Forum (France) की थिंक-टैंक सदस्य भी हैं और Savitribai Phule Pune University की सीनेट की सदस्य रही हैं, जहाँ उन्होंने शिक्षा नीति और उच्च शिक्षा के विकास में योगदान दिया है. इसके अलावा, सुनेत्रा पवार Vidya Pratishthan Trust की ट्रस्टी भी हैं, जो महाराष्ट्र की एक प्रमुख शैक्षणिक संस्था है और हजारों विद्यार्थियों को गुणवत्ता शिक्षा प्रदान करती है. 

2024 में ननद सुप्रिया के खिलाफ लड़ी चुनाव, लेकिन मिली हार

सुनेत्रा पवार ने सक्रिय राजनीति में प्रवेश अपेक्षाकृत देर से किया. उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में बारामती से अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने के लिए चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, लेकिन उन्हें शरद पवार की बेटी और उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी सुप्रिया सुळे से हार का सामना करना पड़ा. 

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उसके बाद महज कुछ समय में ही वे महाराष्ट्र से राज्यसभा सांसद चुनी गईं, जब उन्हें बिना विपक्षी चुनौती के निर्विरोध निर्वाचित किया गया. इससे उनके राजनीतिक भविष्य को मजबूत राष्ट्रीय मंच मिला. 

पति के असामयिक निधन के बाद केंद्रीय भूमिका में आईं सुनेत्रा पवार

अजित पवार की अचानक मृत्यु के बाद, महाराष्ट्र की राजनीति में सुनेत्रा पवार का नाम महत्वपूर्ण स्थान पर आ गया है. राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा है कि उनके अनुभव, पारिवारिक नेटवर्क और सामाजिक प्रतिबद्धता के कारण पार्टी नेतृत्व उन्हें आगे बढ़ा सकता है, खासकर ऐसे समय में जब पार्टी को एक मजबूत नेतृत्व की आवश्यकता है. 

सुनेत्रा पवार पर्यावरण मुद्दों की सक्रिय हस्ती

सुनेत्रा पवार न केवल एक राजनीतिक व्यक्तित्व हैं, बल्कि महाराष्ट्र के सामाजिक और पर्यावरणीय मुद्दों पर सक्रिय सशक्त हस्ती भी हैं. वे अपने परिवार की राजनीतिक विरासत को आगे ले जाने के साथ-साथ स्वयं भी एक स्वतंत्र राजनीतिक पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर हैं. उनका राजनीतिक सफर यह दर्शाता है कि वे परंपरागत राजनीतिक ढांचे से निकलकर नई दिशा की ओर बढ़ रही हैं, जिसमें सामाजिक कार्य, शिक्षा और ग्रामीण विकास के साथ राजनीति का संयोजन प्रमुख भूमिका निभाता है.

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