संजय राऊत की किताब: 5 बड़े दावे

इस किताब का नाम है ‘नरकातलं स्वर्ग’ (नरक में स्वर्ग). इसमें राऊत ने सिर्फ जेल में बिताए अपने दिन ही नहीं बताए, बल्कि कई खुलासे भी किए हैं. संजय राऊत को जुलाई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत पात्रा चाल मामले में गिरफ्तार किया था.

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(फाइल फोटो)
मुंबई:

संजय राऊत, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के सांसद, अपने विवादास्पद लेखन के लिए जाने जाते हैं.चाहे वो ‘सामना' अखबार में लिखे जाने वाले दैनिक संपादकीय हों या उनका साप्ताहिक कॉलम ‘रोखठोक', राऊत की बातें महाराष्ट्र की राजनीति में अक्सर चर्चा का सबब बन जाती हैं. अब उन्होंने मराठी में एक किताब लिखी है  जो मुंबई की आर्थर रोड जेल में बिताए गए समय के संस्मरणों पर आधारित है.

इस किताब का नाम है ‘नरकातलं स्वर्ग' (नरक में स्वर्ग). इसमें राऊत ने सिर्फ जेल में बिताए अपने दिन ही नहीं बताए, बल्कि कई खुलासे भी किए हैं. संजय राऊत को जुलाई 2022 में प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम कानून (PMLA) के तहत पात्रा चाल मामले में गिरफ्तार किया था. आठ दिन ED की हिरासत में रखने के बाद उन्हें न्यायिक हिरासत में मुंबई की कुख्यात आर्थर रोड जेल भेजा गया.

इस किताब में राऊत ने दावा किया है कि केंद्र में सत्ता में आने के बाद बीजेपी विपक्षी नेताओं को खत्म करने की मुहिम चला रही है — और वे भी उसी का शिकार हुए. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से जुड़े पांच बड़े दावे किए हैं, जिनमें दिवंगत शिवसेना प्रमुख बाल ठाकरे और एनसीपी (शरद पवार गुट) के नेता शरद पवार के साथ हुई मुलाकातों का ज़िक्र है:

1) शरद पवार ने नरेंद्र मोदी की गिरफ्तारी को रोका था। राऊत के अनुसार, गोधरा दंगों के बाद नरेंद्र मोदी के खिलाफ माहौल था. कई वरिष्ठ गुजरात पुलिस अधिकारियों को सीबीआई ने गिरफ्तार किया था. उस समय केंद्र में यूपीए सरकार मोदी को गिरफ्तार करने पर विचार कर रही थी. लेकिन एक कैबिनेट बैठक में शरद पवार ने इसका विरोध किया और कहा कि मोदी एक चुने हुए नेता हैं, उनकी गिरफ्तारी गलत होगी.

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2) मोदी ने अमित शाह को जमानत दिलाने के लिए पवार से मदद मांगी थी राऊत लिखते हैं कि एक मर्डर केस में अमित शाह को जमानत देने का विरोध कर रहे थे सीबीआई के एक अधिकारी, जो महाराष्ट्र कैडर के थे. मोदी ने तब शरद पवार को फोन किया और मदद मांगी. पवार की मदद से शाह को राहत मिली.

3) अमित शाह ने एक केस में मदद के लिए बाल ठाकरे से मुलाकात की थी. राऊत के अनुसार, अमित शाह अपने बेटे जय शाह के साथ बाल ठाकरे से मिलने उनके घर गए थे. किसी ने उन्हें सलाह दी थी कि ठाकरे उनकी मदद कर सकते हैं. ठाकरे ने मनोहर जोशी के फोन से जज को कॉल कर कहा, "आपका पद चाहे जो हो, मत भूलिए कि आप एक हिंदू हैं."

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4) बाल ठाकरे ने मोदी को मुख्यमंत्री पद से हटने से बचाया.गोधरा दंगों के बाद बीजेपी मोदी को गुजरात के मुख्यमंत्री पद से हटाना चाहती थी. इससे पहले कि यह फैसला लागू होता, एल.के. आडवाणी मुंबई में बाल ठाकरे से मिलने गए. ठाकरे ने उन्हें कहा कि मोदी को हटाया तो गुजरात हाथ से चला जाएगा. इसके बाद मोदी को पद पर बनाए रखा गया.

5) राऊत ने शाह को फोन कर कहा — मुझे गिरफ्तार कर लो. राऊत का दावा है कि उनकी गिरफ्तारी से पहले ED उनके दोस्तों को परेशान कर रही थी. उन्होंने शाह को फोन किया और कहा कि इस राजनीतिक लड़ाई में उनके दोस्तों को बलि का बकरा न बनाया जाए. राऊत ने कहा कि वे दिल्ली में हैं और वहीं गिरफ्तार होने को तैयार हैं. शाह ने कहा कि उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है.

इन घटनाओं के ज़रिए राऊत यह दिखाना चाहते हैं कि मोदी और शाह ने उन नेताओं के प्रति कृतज्ञता नहीं दिखाई जिन्होंने मुश्किल समय में उनकी मदद की थी बल्कि बाद में उन्हीं की पार्टियों में बगावत करवाई.

मराठी में लिखी गई इस किताब का विमोचन पिछले शनिवार को प्रसिद्ध कवि और पटकथा लेखक जावेद अख्तर, शरद पवार, उद्धव ठाकरे और तृणमूल कांग्रेस के सांसद साकेत गोखले ने किया. इसके हिंदी और अंग्रेजी संस्करण अगले महीने दिल्ली में लॉन्च किए जाएंगे.

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