22 करोड़ दो... भारी मुनाफा होगा, 3 माह में बुजुर्ग गंवा बैठा जिंदगी भर की कमाई, पुणे की कहानी हिला देगी

जांच में सामने आया है कि यह पूरी साजिश अक्टूबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच रची गई. महज 90 दिनों के भीतर, जालसाजों ने बुजुर्ग को इस कदर अपने झांसे में लिया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई उनके हवाले कर दी.

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  • पुणे में एक 85 वर्षीय सेवानिवृत्त उद्यमी ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर करोड़ों की धोखाधड़ी का शिकार हुआ
  • अक्टूबर 2025 से जनवरी 2026 के बीच साइबर अपराधियों ने 90 दिनों में बुजुर्ग की सारी जमा पूंजी ठगी में ले ली
  • साइबर अपराधियों ने 26 मोबाइल नंबर, इंटरनेट कॉल्स, 3 वेब लिंक और एक फर्जी मोबाइल ऐप का इस्तेमाल किया
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पुणे:

महाराष्ट्र की सांस्कृतिक राजधानी पुणे से साइबर अपराध का एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिस प्रशासन और आम जनता के होश उड़ा दिए हैं. हडपसर इलाके में रहने वाले एक 85 वर्षीय सेवानिवृत्त उद्यमी ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग के नाम पर ₹22.03 करोड़ की धोखाधड़ी का शिकार हुए हैं. यह पुणे शहर के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा साइबर फ्रॉड माना जा रहा है.
 

धोखाधड़ी का जाल: अक्टूबर 2025 से शुरू हुआ खेल
जांच में सामने आया है कि यह पूरी साजिश अक्टूबर 2025 से 12 जनवरी 2026 के बीच रची गई. महज 90 दिनों के भीतर, जालसाजों ने बुजुर्ग को इस कदर अपने झांसे में लिया कि उन्होंने अपनी जीवन भर की गाढ़ी कमाई उनके हवाले कर दी.


कैसे बुना गया ठगी का ताना-बाना?
साइबर अपराधियों ने बुजुर्ग को शिकार बनाने के लिए आधुनिक तकनीक और मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल किया. शेयर बाजार में निवेश पर अवास्तविक रिटर्न का वादा किया गया. ठगी के लिए 26 मोबाइल नंबरों, इंटरनेट फोन कॉल्स, 3 वेब लिंक और एक फर्जी मोबाइल ऐप का उपयोग किया गया. पीड़ित ने अपनी कंपनी बंद होने के बाद बेची गई चल और अचल संपत्तियों से मिली पूरी जमा-पूंजी इस उम्मीद में लगा दी कि उन्हें बड़ा मुनाफा होगा.


150 बैंक खातों में फैला है पैसा
पुणे साइबर पुलिस की शुरुआती जांच में एक चौंकाने वाला पैटर्न सामने आया है. बुजुर्ग ने कुल रकम 150 अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर की. ये खाते भारत के विभिन्न कोनों नोएडा, कोलकाता, बेंगलुरु और अन्य जगह में फैले हुए हैं. सात अलग-अलग बैंकों के खातों का उपयोग मनी लॉन्ड्रिंग की तरह पैसे घुमाने के लिए किया गया.


पुलिस की कार्रवाई
पुणे साइबर पुलिस ने मामला दर्ज कर तकनीकी जांच शुरू कर दी है. पुलिस अब उन 26 मोबाइल नंबरों और बैंक खातों के 'ट्रेल' को ट्रैक कर रही है ताकि मुख्य आरोपियों तक पहुंचा जा सके. हालांकि, इतनी बड़ी राशि का अलग-अलग राज्यों में फैल जाना जांच टीम के लिए एक बड़ी चुनौती बना हुआ है.

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