- पुणे के किसान सुनील उकिर्डे को 10 एकड़ में प्याज उगाने पर प्रति एकड़ भारी नुकसान हो रहा है.
- किसान की इस बदहाली का मुख्य कारण नेफेड द्वारा तय किया गया बेहद कम खरीद मूल्य है.
- प्याज की खेती में लागत भी न निकलने से किसान ने तहसीलदार को पत्र लिखकर 'गांजा' उगाने की इजाजत मांगी है.
महाराष्ट्र में प्याज उत्पादक किसानों की हालत दिन-ब-दिन दयनीय होती जा रही है. लगातार बढ़ती लागत और बाजार में मिलने वाले बेहद कम दामों के कारण अब खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है. इस आर्थिक तंगी और बेबसी के बीच पुणे जिले से एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसने प्रशासन से लेकर सरकार तक को सोच में डाल दिया है. यहां एक परेशान किसान ने प्याज के बदले 'गांजा' उगाने की मांग कर दी है. ( पुणे से अविनाश पवार की रिपोर्ट)
यह अनोखा और भावुक मामला पुणे के जुन्नर तालुका के डिंगोरे गांव का है. यहाँ के एक प्रगतिशील प्याज उत्पादक किसान सुनील उकिर्डे ने अपनी बदहाली से तंग आकर सीधे तहसीलदार को पत्र लिखा है. सुनील का कहना है कि मौजूदा परिस्थितियों में पारंपरिक खेती करना अब नामुमकिन हो गया है, इसलिए सरकार और प्रशासन उन्हें गांजे की खेती करने की आधिकारिक अनुमति प्रदान करे.
लागत ₹1.20 लाख, घाटा ₹45 हजार प्रति एकड़
किसान सुनील ने अपने पत्र में साल 2025-26 के सीजन का पूरा लेखा-जोखा पेश किया है. उन्होंने बताया कि इस सीजन में उन्होंने कुल 10 एकड़ जमीन पर प्याज की बुवाई की थी. इस खेती में बीज, खाद, कीटनाशक, मजदूरी और सिंचाई को मिलाकर प्रति एकड़ करीब ₹1,20,000 का खर्च आया.
इसके विपरीत, सरकार द्वारा नेफेड (NAFED) के जरिए जो खरीद मूल्य तय किया गया है, वह महज ₹12.35 प्रति किलो है. यह भाव लागत के मुकाबले बहुत कम है. इस सरकारी दर के हिसाब से किसान को प्रति एकड़ ₹40,000 से ₹45,000 का सीधा घाटा उठाना पड़ रहा है. सुनील ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि कर्ज और नुकसान के इस जाल से बाहर निकलने के लिए सरकार या तो उन्हें उनके हक का सही दाम दे, या फिर इस घाटे की भरपाई के लिए गांजा उगाने की इजाजत दे.
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